क्या जल्लीकट्टू सांस्कृतिक अधिकार हैं, सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ करेगी तय

नई दिल्ली।बैलों पर काबू पाने का खेल जल्लीकट्टू और बैलगाड़ी दौड़ सांस्कृतिक अधिकार हैं या नहीं, इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ करेगी। इन खेलों से जुड़े तमिलनाडु और महाराष्ट्र सरकार के कानूनों के खिलाफ दायर याचिकाएं संविधान पीठ को सौंपी जाएंगी।
चीफ जस्टिस ने कहा हम विवाद का अंत चाहते हैं
– चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच ने इस मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया। चीफ जस्टिस ने कहा, ‘हम विवाद का अंत चाहते हैं। राज्य कहते हैं कि एक वर्ग के सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा के लिए कानून बनाए हैं।
– बड़ी बेंच फैसला करेगी कि क्या जल्लीकट्टू और बैलगाड़ी दौड़ जैसे मामलों में कानून बनाने के लिए राज्य विधायी रूप से पात्र हैं? क्या यह दोनों संविधान के अनुच्छेद 29 (1) के तहत सांस्कृतिक अधिकारों के दायर में आते हैं? क्या इन्हें संवैधानिक रूप से संरक्षण दे सकते हैं?’
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सप्ताह बाद सुनवाई
– जल्लीकट्टू और बैलगाड़ी की दौड़ की अनुमति के लिए दोनों राज्यों (महाराष्ट्र और तमिलनाडु) ने केंद्र सरकार के पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम कानून, 1960 में संशोधन किया था। इनकी वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इन मामलों पर 6 सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।





