क्या आपकी आंखें आपकी उम्र ज्यादा दिखा रही हैं? बस ये एक स्किनकेयर रूटीन बदल देगा आपका लुक

शरीर के बाकी हिस्से की स्किन की तुलना में आंखों के आस-पास की स्किन ज्यादा पतली और सेंसिटिव होती है। यही वजह है कि आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स, पफीनेस और फाइन लाइन्स सबसे पहले नजर आते हैं।

अगर इन समस्याओं को दूर रखना है तो सही तत्वों से युक्त क्रीम या सीरम बेहतर रिजल्ट दे सकते हैं। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि किस तरह की आई क्रीम और सीरम आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकते हैं और उसे लगाना कैसे है।

आई क्रीम और सीरम लगाने के ये होते हैं फायदे
पफीनेस: आंखों के आस-पास पफीनेस या सूजन की समस्या फ्लूइड रिटेंशन, एलर्जी या नींद की कमी की वजह से हो सकती है। ऐसे में कैफीन जैसे तत्व ब्लड वेसल्स का फैलाव कम कर सूजन दूर करते हैं।
डार्क सर्कल्स: यह समस्या अनुवांशिक कारणों, स्किन के पतले होने या पिग्मेंटेशन की वजह से हो सकती है। विटामिन सी, नियासिनमाइड या रिकोरेक्स एक्स्ट्रैक्ट जैसे तत्व कालेपन को दूर करने में मदद कर सकते हैं।
बारीक रेखाएं: उम्र बढ़ने के साथ कोलेजन की घटती मात्रा और लचीलेपन की कमी से स्किन पर फाइन लाइन्स या बारीक रेखाएं नजर आने लगती हैं। ऐसे में हयालूरोनिक एसिड और कोलेजन बढ़ाने वाले तत्व जैसे रेटिनॉल और पेप्टाइड्स मददगार हो सकते हैं।

ऐसे करें इस्तेमाल
रोजाना सुबह और शाम चेहरा साफ और मॉइश्चराइज करने के बाद आई क्रीम या सीरम इस्तेमाल करें। आपको बस मटर के दाने बराबर इसे लेना है और आंखों के नीचे लगाना है। इसे आंखों के अंदर इस्तेमाल ना करें। सुबह के समय सनस्क्रीन लगाना ना भूलें।

जैसा स्किन टाइप वैसा फॉर्मूला
आपकी स्किन का टाइप जैसे ऑयली, ड्राई या कॉम्बिनेशन है तो प्रोडक्ट का प्रभाव भी उसके अनुसार ही होगा। ऑयली स्किन पर बस सीरम ही काफी होता है, वहीं ड्राई स्किन वालों को ज्यादा रिच फॉर्मूला प्रोडक्ट लगाने की जरूरत होती।

इन बातों का रखें ध्यान
चाहे आई क्रीम लगा रहे हों या फिर सीरम, पैच टेस्ट करना ना भूलें। इससे किसी भी प्रकार का रिएक्शन होने का खतरा नहीं होगा।
सीरम लगाने के बाद कुछ मिनट का इंतजार करें, उसके बाद ही आई क्रीम लगाएं।
कभी भी प्रोडक्ट को रगड़कर न लगाएं, हमेशा उंगलियों को टैप करते हुए ही प्रोडक्ट को लगाएं।
आकर्षक पैकेजिंग या महंगे प्रोडक्ट की जगह अपने लिए सूटेबल प्रोडक्ट लें।

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