कोविंद का समर्थन करेगी NCP? सोनिया ने…

राष्ट्रपति उम्मीदवार चुनने के मसले पर विपक्ष की बैठक से पहले दर्जन भर विपक्षी दलों का कुनबा बिखरता दिख रहा है. शरद पवार की पार्टी एनसीपी के एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने की अटकलों के बीच सोनिया गांधी ने पवार के घर अपने दूत भेजे हैं. यही नहीं सीताराम येचुरी भी कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और अहमद पटेल के साथ पवार के घर पहुंचे हैं.

शरद पवार के घर पर एनसीपी और कांग्रेस की बैठक चल रही है.
इससे पहले गुरुवार की सुबह कांग्रेस नेता अहमद पटेल और गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की है. तीनों नेताओं के बीच पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई.
हालांकि राष्ट्रपति उम्मीदवार को लेकर विपक्ष में दरार साफ दिखने लगी है, जेडीयू ने पहले ही एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को अपना समर्थन देने का ऐलान कर दिया है. जेडीयू की इस चाल लालू की पार्टी के राजद के नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने नीतीश कुमार पर निशाना साधा है.
रघुवंश प्रसाद ने कहा कि नीतीश कुमार एक तरफ तो बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन की बनाने की बात करते हैं, दूसरी ओर एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार का समर्थन करते हैं.
इस बीच कांग्रेस के नेतृत्व में होने वाली विपक्ष की बैठक पर सभी की नजर होगी. बैठक से पहले शरद पवार ने एनसीपी के नेताओं की बैठक बुलाई है. सूत्रों के मुताबिक एनडीए उम्मीदवार को समर्थन देने के नीतीश कुमार के फैसले से विपक्ष में नाराजगी है.
इससे पहले बुधवार को कांग्रेस नेता मीरा कुमार ने कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से मुलाकात की, जिसके बाद सरगर्मी बढ़ गई है. इस बीच सीपीएम नेता सीताराम येचुरी का भी बयान आया है कि विपक्ष राष्ट्रपति चुनाव जरूर लड़ेगा.
बताया जा रहा है कि इस बैठक कई नामों पर चर्चा हो सकती है. सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की बैठक में इन सात नामों पर चर्चा संभव है.
1. मीरा कुमार
2. सुशील कुमार शिंदे
3. प्रकाश अम्बेडकर
4. मल्लिकार्जुन खड़गे
5. भालचंद मुंगेरकर
6. गोपाल कृष्ण गांधी
7. डी राजा
चुनाव के लिए कांग्रेस के विकल्प के बारे में पूछे जाने पर पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि यह एक काल्पनिक सवाल है तथा 17 जुलाई के चुनाव के लिए विपक्ष एक संयुक्त रणनीति के बारे में फैसला करेगा. वहीं सपा के नरेश अग्रवाल ने कहा कि विपक्षी दल बैठक में संयुक्त रूप से किसी उम्मीदवार के बारे में फैसला करेंगे.
जेडीयू ने बुधवार को अपनी बैठक में एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन का फैसला किया जिसके बाद वह अब विपक्ष की इस बैठक में शामिल नहीं होंगे. नीतीश कुमार पहले भी ऐसे संकेत दे चुके थे कि वह कोविंद का विरोध नहीं करेंगे.
अगर मीरा कुमार-रामनाथ कोविंद आमने-सामने हुए तो..?
एजुकेशन के लिहाज से देखा जाए तो रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार दोनों ही काबिल व्यक्ति हैं. लोकसभा अध्यक्ष के रूप में मीरा कुमार की सफल पारी को देश की जनता देख चुकी है. मीरा कुमार अगली पीढ़ी की दलित हैं. असल में वे पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की पुत्री हैं और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस जैसे प्रतिष्ठित कॉलेज से पढ़ाई की है. वे 1970 में भारतीय विदेश सेवा के लिए चुनी गई थीं और कई देशों में राजनयिक के रूप में सेवा दे चुकी हैं.
दूसरी तरफ, कोविंद एक कानपुर देहात जिले के एक गांव में साधारण परिवार में पैदा हुए. उन्होंने कानपुर के एक कॉलेज से पढ़ाई की और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के बाद राजनीति में प्रवेश किया. उनका प्रशासनिक अनुभव बिहार के राज्यपाल के रूप में है. दोनों ने वकालत की पढ़ाई की है. कोविंद का चयन भी प्रशासनिक सेवा के लिए हो चुका था, लेकिन उन्होंने नौकरी करने की जगह वकालत करना पसंद किया. मीरा कुमार 72 साल की हैं, जबकि रामनाथ कोविंद 71 साल के हैं.





