कोर्ट के लिए मुश्किल है बाबरी विध्वंस मामले का फैसला समय से सुना पाना, बचे हैं सिर्फ 20 दिन

लखनऊ। अयोध्या स्थित कथित ढांचा विध्वंस मामले में फैसला सुनाने में 20 दिन बाकी रह गए हैं लेकिन अगर देखा जाए तो अदालती प्रक्रिया बहुत लंबी है, जिसे देखते हुए समय से फैसला सुनाना टेढ़ी खीर नजर आ रहा है।
बहुचर्चित ढांचा विध्वंस मामले में 6 दिसंबर 1992 को सर्वप्रथम पहली रिपोर्ट थानाध्यक्ष राम जन्मभूमि प्रियंवदा नाथ शुक्ला ने दर्ज कराई थी, जिसमें हजारों कारसेवकों के अलावा कुछ नामजद आरोपी बनाए गए। इसी दिन दूसरी रिपोर्ट राम जन्मभूमि चौकी प्रभारी जी पी तिवारी ने दर्ज कराई। इन दोनों ही मामलों की प्रारंभिक विवेचना स्थानीय पुलिस के द्वारा की गई उसके बाद राज्य सरकार की संस्तुति पर सीबी सीआईडी ने जांच प्रारंभ की। इसके अलावा मीडिया एवं अन्य लोगों द्वारा 47 रिपोर्टें दर्ज कराई गईं, जिन्हें बाद में विवेचना के दौरान एक में सम्मिलित कर दी गई।
इसके बाद तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार की संस्तुति पर केंद्र सरकार ने पूरे मामले को विवेचना के लिए सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई ने अपनी जांच में कई आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए।
इस प्रकार सीबीआई ने पहला आरोपपत्र 40 आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया तथा दूसरा आरोप पत्र 9 लोगों के विरुद्ध दाखिल किया पत्रावली के अनुसार अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विष्णु हरि डालमिया, विनय कटियार, उमा भारती एवं साध्वी ऋतंभरा के विरुद्ध रायबरेली की अदालत में मुकदमा चला। जहां पर विशेष न्यायालय ने 1 मार्च 1992 को मामले में संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू की।
इस मामले में अब तक 17 आरोपियों जिनमें बालासाहेब ठाकरे अशोक सिंघल गिरिराज किशोर विष्णु हरि डालमिया विनोद कुमार वत्स राम नारायण दास लक्ष्मी नारायण महा त्यागी हरगोविंद सिंह डी बी राय महंत अवैद्यनाथ महामंडलेश्वर स्वामी बैकुंठ लाल शर्मा परमहंस रामचंद्र दास एवं सतीश कुमार नागर की मृत्यु हो चुकी है।
सीबीआई की विशेष अदालत में अभियोजन की ओर से 354 गवाहों को पेश किया गया है जिन्होंने मौखिक साक्ष्य के अलावा विभिन्न समाचार पत्रों की कटिंग एवं वीडियो कैसेट्स को साबित किया। इस प्रकार गत 6 मार्च 2020 को सीबीआई ने अपने गवाहों को पेश करने की प्रक्रिया समाप्त कर दी।
अभियोजन साक्ष्य समाप्त होने के उपरांत अदालत ने गत 4 जून को धारा 313 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत आरोपियों के बयान दर्ज करने की कार्रवाई शुरू की जो लगातार 55 दिन तक चलती रही और यह कार्रवाई 28 जुलाई को समाप्त हुई। 6 मार्च 2020 तक 32 आरोपियों के विरुद्ध विचारण की कार्रवाई की गई परंतु एक आरोपी ओमप्रकाश पांडे के फरार होने के करण अब विशेष अदालत के न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार यादव के समक्ष केवल 31 आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई चल रही है।
अभियोजन साक्ष्य समाप्त होते ही अदालत पक्षकारों को बार-बार अवगत करा रही है कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले को 31 अगस्त के पूर्व समाप्त करने का निर्देश दिया है लिहाजा शीघ्र से शीघ्र विधिक कार्यवाही संपन्न की जाए।
पत्रावली के अनुसार बचाव पक्ष की ओर से 9 अधिवक्ता नियुक्त हैं जिनमें वरिष्ठ अधिवक्ता आईबी सिंह एवं कुंवर मृदुल राकेश के अलावा विमल कुमार श्रीवास्तव, मनीष कुमार त्रिपाठी, केके मिश्रा, एस के शर्मा, अभिषेक रंजन, प्रशांत सिंह अटल के अलावा विवेक श्रीवास्तव है। जबकि अभियोजन की ओर से सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ललित कुमार सिंह, पूर्णेन्दु चक्रवर्ती एवं आर के यादव हैं।
अगर सामान्य तौर पर एक अधिवक्ता को 1 दिन के लिए बहस का समय दिया जाए तो निर्णय लिखाने का समय बहुत कम बचता है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी जहां पर उम्मीद की जाती है कि बचाव पक्ष की ओर से सफाई साक्ष्य प्रस्तुत किया जाएगा क्योंकि विशेष अदालत ने बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं को बचाव साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए अंतिम मौका 12 अगस्त तक के लिए दिया है।





