केंद्रीय विमान मंत्रालय ने दी मंजूरी, अब बनेगा इंटरनेशनल एयरपोर्ट…


बता दें कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय में शुक्रवार शाम चार बजे से बैठक हुई थी, जिसमें इस बात पर मुहर लगनी थी कि जेवर में प्रस्तावित एरिया पर एयरपोर्ट उपयुक्त है या नहीं। ओएलएस सर्वे के बाद यह बैठक काफी अहम थी।
इसके बाद आज जेवर एयरपोर्ट को मंत्रालय से हरी झंडी मिल गई। शुक्रवार की बैठक में यमुना प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार भी व शामिल हुए। उन्होंने बताया था कि एयरपोर्ट से जुड़ी तकनीकी पहलुओं पर चर्चा हुई। मंत्रालय का रुख सकारात्मक दिखा था। हवा का दबाव व कई और मुद्दों पर चर्चा हुई। और आज शनिवार को इसकी घोषणा कर दी गई।
हालांकि जेवर में एयरपोर्ट बनने को लेकर उहापोह और मंत्रियों के बयान थे उससे जेवर में एयरपोर्ट बनना एक सपना ही लग रहा था। बता दें कि केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री पी अशोक गजपति राजू ने यहां तक कह दिया था कि जेवर हवाईअड्डा एक विचार है। हालांकि, उड्डयन निदेशालय के निर्देश पर यमुना प्राधिकरण जेवर के आसपास की जमीन का सर्वे राइट्स संस्था से करा रहा था और इसकी रिपोर्ट 15 जून को आनी थी।
दरअसल, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री पी अशोक गजपति राजू ने दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान एक सवाल के जवाब में बताया कि जेवर में हवाईअड्डा बनाना एक विचार है। दिल्ली के हवाईअड्डे पर भीड़भाड़ है और इसे दूर करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दूसरा हवाईअड्डा बनाने का विचार है।
हालांकि, जिले के सांसद व पूर्व उड्डयन राज्य मंत्री रहे डॉ. महेश शर्मा ने सीएम से मिलकर जेवर एयरपोर्ट के लिए हामी भरवा ली थी और एक प्रस्ताव केंद्र को भी भिजवा दिया था। इसके बाद 2017 में जैसे ही भाजपा सत्ता में आई तो सीएम की तरह से जेवर में एयरपोर्ट बनाने की बात कही गई।
सीएम ने यमुना प्राधिकरण को आवश्यक निर्देश भी दिए कि प्रोजेक्ट के लिए उचित कार्यवाही की जाए। यमुना प्राधिकरण ने उड्डयन निदेशालय को पत्र लिखा तो निदेशालय ने कहा कि नए सिरे से सर्वे जरूरी है। मौजूदा समय में राइट्स संस्था सर्वे कर रही है, जिसकी रिपोर्ट 15 जून को मिलेगी।
जेवर के अलावा दूसरा स्थान नहीं
-डॉ. महेश शर्मा, केंद्रीय मंत्री
– 2001 में प्रदेश की भाजपा सरकार ने प्रस्ताव तैयार किया।
– 2003 में जेवर में प्रोजेक्ट के लिए जगह निर्धारित की गई।
– 2007 में बसपा सरकार ने यमुना प्राधिकरण के 35 गांवों की करीब 2471 एकड़ जमीन रिजर्व कर मास्टर प्लान तैयार किया।
– 2010 टीरामबोल के नेतृत्व में एक टीम गठित, करीब 5000 करोड़ खर्च का अनुमान। 74 फीसदी निजी और शेष खर्च सरकार का।
– 2011 उड्डयन विभाग, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, दिल्ली एयरपोर्ट से दूरी 72 या 120 किलोमीटर के विवाद सुलझाकर 90 किलोमीटर तय कर दी गई।
– 2012 में सपा सरकार बनते ही प्रोजेक्ट को निरस्त कर दिया गया।
– 2013 में आगरा कुशीनगर में एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया।
– 2014 में रक्षा मंत्रालय ने प्रस्ताव को नकार दिया।
– 26 मई 2015 को प्रदेश सरकार ने आगरा व हिरनगांव में एयरपोर्ट बनाने को पत्र भेजा।
– 27जून 2015 उड्डयन विभाग, पवन हंस, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, एयर इंडिया समेत अन्य विभाग के अधिकारियों ने एनसीआर में दूसरा एयरपोर्ट को लेकर गहन चर्चा की थी। जिसमें जेवर ही उपयुक्त जगह माना।
– 7 जुलाई 2015 को सैफई, बाह तहसील की भदरौली व जेवर में एयरपोर्ट बनाने के लिए सीएम ने पीएम को पत्र लिखा।
– 30 जून 2016 को रक्षा मंत्रालय की तरफ से मिली एनओसी।
– 6 अप्रैल 2017 को प्रदेश के सीएम आदित्यानाथ योगी ने प्रोजेक्ट पूरा करने का दिया मौखिक आदेश





