ऐसा होता रहा?…तो किसी काम के नहीं रहेंगे एटीएम!!

हैदराबाद। यदि एक बार लोग बिना नकद लेन-देन शुरू कर दें, तो हजारों एटीएम का उपयोग बंद हो जाएगा। इनकी सुरक्षा, मेंटीनेंस आदि पर बैंक काफी पैसा खर्च करते हैं।
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मगर, कैशलेस लेन-देन शुरू हो जाने के बाद बैंकों को नए एटीएम की स्थापना नहीं करनी होगी, जिससे उन्हें हर महीने काफी बचत होगी। एक बैंक अधिकारी के अनुसार, एक एटीएम स्थापित करने में 6 लाख रुपए और हर महीने इसके मेंटीनेस आदि पर करीब 50,000 रुपए का खर्च आता है।
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नोटबंदी और 8 नवंबर को एटीएम से नकद निकासी की मात्रा सीमित करने के बाद कई लोगों ने कैशलेस लेन-देन किया। एटीएम के जरिए बैंक विभिन्न सेवाएं जैसे नकद जमा करना, पैसे निकालना, पैसे ट्रांसफर करना आदि प्रदान कर रहे हैं। मगर, ज्यादातर इनका प्रयोग नकद निकासी के लिए किया जा रहा है।
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एक बार लोग कैशलेस लेनदेन करना शुरू कर देते हैं, तो नकद जमा करने को छोड़कर एटीएम की सभी सेवाएं स्मार्टफोन पर उपलब्ध हो जाएंगी। एस्टोनिया सिर्फ ऐसा देश है, जहां 100 फीसद लेनदेन कैशलेस होता है।
इसके आलावा बेल्जियम में 93 फीसद, फ्रांस में 92 फीसद, कनाडा में 90 फीसद, ब्रिटेन में 89 फीसद, स्वीडन में 89 फीसद और ऑस्ट्रेलिया में 86 फीसद लेनदेन कैशलेस होता है। हालांकि, भारत में ऐसी स्थिति बनने में अभी समय लगेगा क्योंकि देश में 86 फीसद लोग नकद लेन-देन करते हैं।





