काशी में चल रहे धर्म संसद में संत ने कहा- बिना राम मंदिर निर्माण के सरकार किसी काम की नहीं

काशी में चल रही परम धर्म संसद 1008 का मंगलवार को आखिरी दिन है। सुबह शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि व प्रवर धर्माधीश स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पूजन कर धर्म संसद की शुरुआत की।काशी में चल रहे धर्म संसद में संत ने कहा- बिना राम मंदिर निर्माण के सरकार किसी काम की नहीं

अयोध्या से आए संत ने कहा कि बिना राम मंदिर निर्माण के सरकार किसी काम की नहीं है। धर्म संसद के अखिरी दिन पहले सत्र में सावित्री देवी ने गंगा और संस्कृति को जिंदा रखने की अपील की।

तेलंगाना से आई एक महिला ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सवाल किया। उसका कहना था कि वैष्णों देवी के मंदिर में महिलाओं को प्रवेश मिलता है तो सबरीमाला मंदिर में प्रवेश पर क्यों रोक है। केरल के संतों ने अपील करते हुए कहा कि केरल सरकार द्वारा सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर होने वाली संप्रदायिकता को रोकने के लिए कदम उठाए जाएं।

छत्तीसगढ़ से आए महंत बालकदास ने गाय संरक्षण के मुद्दे पर बात की। उन्होंने बताया कि मैं गाय के गोबर से लकड़ी बनाता हूं। बता दें कि धर्म संसद के अंतिम दिन हवन का आयोजन किया जा रहै है। 

सनातन धर्मी होने के नाते हमारी सबसे अधिक जिम्मेदारी 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि धर्म संसद के तीसरे दिन आज मंगलवार को मंदिर रक्षा समेत कई महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे। समापन सत्र में परम धर्माधीश शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती परमधर्मादेश जारी करेंगे।

इसके साथ ही उन्होंने अगली परम धर्म संसद की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रयागराज अर्द्धकुंभ में 29 से 31 जनवरी तक धर्म संसद का दूसरा आयोजन किया जाएगा। वहीं धर्म संसद मंगलवार को शुरू हुई तो गूगल ब्वाय कौटिल्य को सम्मानित किया गया।

उन्होंने कहा कि परम धर्म संसद-1008 का उद्देश्य अन्य धर्मों का अपमान करना नहीं है। सभी धर्मों के तौर-तरीके व विचार अलग हैं। सभी का आदर करना ही सनातन धर्म का कर्तव्य है। हमें किसी को दुख पहुंचाने का विचार छोड़, उनके अच्छे विचारों को आत्मसात करना चाहिए। सनातन धर्मी होने के नाते हमारी जिम्मेदारी सबसे अधिक है। 

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