कारी कोसी का श्राप या ठेकेदार की लापरवाही? एक ही गांव से उठीं पांच अर्थियां

यह हादसा नदी किनारे हो रहे बांध निर्माण कार्य में ठेकेदार की लापरवाही का नतीजा है। ठेकेदार ने मिट्टी निकालकर बांध तो बना दिया, लेकिन नदी में कई गहरे गड्ढे छोड़ दिए। इन्हीं गड्ढों में से एक ने पांच जिंदगियां निगल लीं।

पूर्णिया जिले के कसबा प्रखंड के सुभाष नगर गांव में शनिवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। नदी किनारे बने गहरे गड्ढे में डूबकर एक ही गांव के पांच लोगों की मौत हो गई। एक ही दिन में पांच अर्थियां उठने से पूरे गांव में मातम पसरा रहा। गांव से करीब एक किलोमीटर दूर मिलिट्री पुल स्थित श्मशान घाट पर सभी का अंतिम संस्कार किया गया।

मृतक सचिन कुमार की मां पूनम देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि वे बेटे को पुलिस की वर्दी में देखना चाहती थीं, लेकिन यह सपना हमेशा के लिए अधूरा रह गया। आठ साल पहले ही बीमारी से पति मनोज राय का निधन हो चुका था। इसके बाद दूसरे के घरों में काम कर उन्होंने सचिन को पढ़ाया-लिखाया। सचिन ने मैट्रिक प्रथम श्रेणी से पास किया था और पांच महीने बाद इंटर की परीक्षा देनी थी।

गौरी की मां पुतुल देवी की भी स्थिति संभल नहीं रही। कटिहार के सलोनी में उनका ससुराल है और पति दिल्ली में मजदूरी करते हैं। पांच बच्चों में गौरी चौथे नंबर पर थी। कुछ महीने पहले ही पुतुल देवी अपने मायके आई थीं। शौच के लिए गौरी अपनी मामी सुलोचना देवी के साथ नदी किनारे गई, जहां उसका पैर फिसल गया और वह गहरे गड्ढे में जा गिरी। बेटी को बचाने के चक्कर में सुलोचना देवी भी डूब गईं। सुलोचना देवी के बेटे राकेश ने बताया कि फुफेरी बहन गौरी को बचाने में उनकी मां की भी जान चली गई। उनके भाई सन्नी को गांव के युवकों कृष्णा और शेखर ने बचा लिया, वरना उनकी भी मौत हो जाती। मां को उन्होंने ही मुखाग्नि दी।

18 वर्षीय शेखर राय की मौत ने पिता गोपाल राय की कमर तोड़ दी है। मजदूरी कर किसी तरह परिवार चलाने वाले गोपाल ने बताया कि शेखर सबसे बड़ा बेटा था और घर की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। कुछ ही महीनों में बहन की शादी तय थी और पैसे जुटाने के लिए पिता-पुत्र दिल्ली जाने वाले थे। लेकिन उससे पहले ही यह हादसा हो गया। शेखर ने भी डूबते बच्चों और महिला को बचाने की कोशिश की, लेकिन वह खुद पानी की गहराई में समा गया।

मौत की नदी कैसे बनी?
दरअसल, यह हादसा नदी किनारे हो रहे बांध निर्माण कार्य में ठेकेदार की लापरवाही का नतीजा है। ठेकेदार ने मिट्टी निकालकर बांध तो बना दिया, लेकिन नदी में कई गहरे गड्ढे छोड़ दिए। इन्हीं गड्ढों में से एक ने पांच जिंदगियां निगल लीं।
हादसा शनिवार दोपहर करीब 4 बजे हुआ। 9 वर्षीय गौरी और उसकी मामी सुलोचना गहरे गड्ढे में समा गईं। शोर सुनकर सचिन, शेखर और करण नदी में कूद पड़े, लेकिन गहराई और तेज बहाव के कारण वे भी डूब गए। शाम तक ग्रामीणों और गोताखोरों की मदद से पांचों शव बाहर निकाले गए।

प्रशासन हरकत में, मुआवजा और जांच का भरोसा
घटना की सूचना मिलते ही मंत्री लेसी सिंह और विधायक आफाक आलम मौके पर पहुंचे। उन्होंने ठेकेदार और जिम्मेदार इंजीनियरों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। पूर्णिया डीएम अंशुल कुमार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की और कहा कि मामले की जांच होगी तथा दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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