ओह! तो इस कारण देश का बेशकीमती हीरा कोहीनूर ब्रिटश में मौजूद है, जानिए ये बड़ा सच

कोहिनूर का अर्थ होता है रोशनी का पहाड़ और इस पहाड़ को देश में वापस लाने की मांग एक बार नहीं बल्कि कई बार उठाई गई है। बता दें साल 2016 में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कोहिनूर हीरा ब्रिटिशों द्वारा ‘जबरन नहीं लिया गया और न ही चोरी’ किया गया था। इतना ही नहीं सरकार ने बताया था कि कोहिनूर हीरा उस समय पंजाब पर शासन करने वाले महाराजा रणजीत सिंह के उत्तराधिकारी द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी को तोहफे के तौर पर दिया गया था। लेकिन अब कोहिनूर हीरा को लेकर एक और नया खुलासा किया गया है
वहीं खबरों के मुताबिक सरकार ने पीआईएल के जवाब में कहा था कि महाराजा रणजीत सिंह के रिश्तेदारों ने एंग्लो-सिख युद्ध के खर्चों को कवर करने के लिए अंग्रेजों को कोहिनूर बतौर ‘स्वैच्छिक मुआवजे’ के रूप में दिया था। दरअसल एक्टिविस्ट रोहित सभरवाल ने एक आरटीआई दायर की जिसमें उन्होंने कोहिनूर को ब्रिटेन में ट्रांसफर करने की जानकारी मांगी थी। तो वहीं रोहित ने बताया कि वो नहीं जानते थे कि आरटीआई पत्र के लिए किसे अप्रोच करें इसलिए उन्होंने आरटीआई को सीधे पीएमओ प्रधानमंत्री को भेज दिया। जिसके बाद रोहित द्वाया दायर की गई आरटीआई को एएसआई को भेजा गया।
राष्ट्रपति भवन से जुड़ी कुछ अनोखी बाते, जिसे खुद नहीं जानते भारतीय
रोहित द्वारा भेजा गया आरटीआई पत्र का जवाब देते हुए एएसआई ने लिखा कि ‘रिकॉर्ड्स के मुताबिक सन् 1849 में लॉर्ड डलहौजी और महाराजा दिलीप सिंह के बीच लाहौर संधि हुई थी। उस समय लाहौर के महाराजा ने इंग्लैंड की क्वीन को कोहिनूर सौंप दिया था।’ जबकि एएसआई के जबास के मुताबिक संधि में साफ होता है कि कोहिनूर को दिलीप सिंह की इच्छा पर अंग्रेजों को नहीं सौंपा गया था जबकि उनकी काफी कम थी वो नाबालिग थे।





