ऑफिस हो या घर, दूसरों के कमेंट्स को पर्सनली लेना कैसे छोड़ें?

इस आर्टिकल में आप दूसरों की बातों को दिल पर न लेने के तरीकों के बारे में जानेंगे, जो अक्सर मानसिक परेशानी का कारण बनते हैं।
क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि ऑफिस में बॉस ने आपके काम में कोई कमी निकाल दी, या घर पर किसी रिश्तेदार ने कोई ताना मार दिया, और आप दिन भर उसी बात को सोच-सोच कर परेशान होते रहे? हम इंसान हैं और भावनाओं से भरे हैं, इसलिए बुरा लगना बहुत आम बात है।
हालांकि, सच्चाई यह है कि दूसरों की बातों को दिल से लगाकर हम सिर्फ अपना ही मानसिक सुख छीनते हैं, सामने वाले का कुछ नहीं जाता। जी हां, अगर आप भी इस आदत से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो वास्तविकता को स्वीकार करते हुए इन 6 आसान और असरदार ट्रिक्स को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लें।
‘पॉज’ बटन का करें इस्तेमाल
जब कोई आपको कुछ ऐसा कहता है जो आपको चुभता है, तो हमारा पहला रिएक्शन पलटकर जवाब देने या दुखी हो जाने का होता है। यहीं पर आपको रुकना है। तुरंत कोई रिएक्शन देने के बजाय एक गहरी सांस लें और 10 सेकंड तक रुकें। यह छोटा-सा ‘पॉज’ आपके दिमाग को शांत करता है और आपको स्थिति को सही तरीके से समझने का मौका देता है।
हर बात आपके बारे में नहीं होती
कई बार लोग आपको जो भला-बुरा कहते हैं, उसका आपसे कोई लेना-देना नहीं होता। हो सकता है कि सामने वाला अपने किसी पर्सनल स्ट्रेस, थकान या खराब मूड की वजह से आप पर अपना गुस्सा निकाल रहा हो। इसे अंग्रेजी में Q-TIP (Quit Taking It Personally – बातों को दिल पर लेना छोड़ें) रूल कहा जाता है। दूसरों की नेगेटिविटी का कूड़ा अपने दिमाग में डंप न होने दें।
‘फैक्ट’ और ‘राय’ में समझें फर्क
अगर कोई आपसे कहता है कि “तुम तो हमेशा काम बिगाड़ देते हो,” तो जरा दिमाग लगाकर सोचिए कि क्या यह सच है या महज उनकी एक राय? बता दें, ज्यादातर मामलों में यह सिर्फ उनकी राय होती है। आपको यह समझना होगा कि किसी एक इंसान की राय आपकी सच्चाई नहीं बन सकती।
बात पर ध्यान दें, लहजे पर नहीं
कभी-कभी लोग आपको सही फीडबैक देते हैं, लेकिन उनके बोलने का तरीका इतना कड़वा होता है कि हम बुरा मान जाते हैं। ऐसे में उनके तीखे लहजे को नजरअंदाज करें और देखें कि क्या उनकी बात में कोई ऐसी काम की चीज है जिससे आप खुद को बेहतर बना सकते हैं? अगर हां, तो उस सीख को अपनाएं, अगर नहीं तो बात को वहीं छोड़ दें।
अपनी अहमियत खुद पहचानें
अगर आप खुद पर भरोसा नहीं करेंगे, तो दूसरों की बातें आपको हमेशा चोट पहुंचाएंगी। अपनी खूबियों और कमियों को स्वीकार करें। जब आपको अंदर से पता होता है कि आप कौन हैं और कितने काबिल हैं, तो बाहर वालों के नेगेटिव कमेंट्स आपके कॉन्फिडेंस की दीवार को नहीं गिरा सकते।
‘लेट गो’ की कला सीखें
पुरानी बातों को मन में दबा कर रखना ऐसा है जैसे जहर आप खुद पिएं और उम्मीद करें कि नुकसान सामने वाले का हो। जो बीत गया, उसे जाने दें। माफ करना सीखें, उनके लिए नहीं, बल्कि अपनी खुद की मानसिक शांति के लिए।
इन आदतों को अपनाने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन रोजाना अभ्यास से आप निश्चित रूप से एक शांत और खुशहाल इंसान बन सकते हैं।





