एकतरफा दोस्ती निभाते-निभाते थक गए हैं आप? Friendship Burnout का हो सकता है संकेत

दोस्ती दुनिया का सबसे खूबसूरत रिश्ता माना जाता है। वो हंसी-मजाक, वो देर रात तक बातें और मुसीबत में एक-दूसरे का सहारा बनना। लेकिन, जरा ठहरकर सोचिए… क्या आपकी दोस्ती में यह सब सिर्फ आपकी तरफ से हो रहा है?

क्या आपको ऐसा लगता है कि सिर्फ आप ही कॉल करते हैं, आप ही मिलने का प्लान बनाते हैं और जब आपको जरूरत होती है, तो सामने वाला हमेशा ‘बिजी’ होता है? अगर हां, तो हो सकता है आप भी शायद Friendship Burnout के शिकार हो रहे हों। आइए, विस्तार से जानते हैं इसके बारे में।

क्या है फ्रेंडशिप बर्नआउट?
आसान शब्दों में कहें तो, जब किसी दोस्ती को निभाने में आप अपनी सारी एनर्जी लगा दें और बदले में आपको सिर्फ बेरुखी मिले, तो दिमाग और दिल थकने लगता है। इसे ही फ्रेंडशिप बर्नआउट कहते हैं। यह वो स्थिति है जब किसी दोस्त का मैसेज आने पर चेहरे पर मुस्कान नहीं, बल्कि माथे पर शिकन आ जाती है।

कैसे पहचानें कि इसमें फंस चुके हैं आप?
खुद से पूछें ये तीन सवाल:

क्या पहल हमेशा आप करते हैं? अगर आप मैसेज न करें, तो क्या हफ्तों तक उनकी तरफ से सन्नाटा रहता है?
क्या आप ‘इमोशनल डस्टबिन’ बन गए हैं? यानी वो सिर्फ तब याद करते हैं जब उन्हें कोई समस्या हो, लेकिन आपकी बात सुनने के लिए उनके पास टाइम नहीं होता।
उनसे बात करके थकान होती है? उनसे मिलने या बात करने के बाद आप खुश महसूस करने के बजाय लो फील करने लगते हैं।

कैसे करें डील?
अगर आपको लग रहा है कि यह कहानी आपकी है, तो घबराएं नहीं। यहां कुछ आसान तरीके हैं जिनसे आप अपनी मानसिक शांति वापस पा सकते हैं:

‘मैचिंग एनर्जी’ का नियम अपनाएं
जितनी कोशिश वो कर रहे हैं, उतनी ही आप करें। अगर वो एक कदम बढ़ाते हैं, तो आप भी एक बढ़ाएं। अगर वो पीछे हट रहे हैं, तो आप उनके पीछे भागना बंद कर दें। कभी-कभी लोगों को आपकी अहमियत तब समझ आती है, जब आप उनके लिए हमेशा उपलब्ध नहीं रहते।

खुलकर बात करें
कभी-कभी दोस्त को पता ही नहीं होता कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं। बिना आरोप लगाए, प्यार से उन्हें समझाएं। जैसे- “मुझे लगता है कि आजकल सिर्फ मैं ही प्लान बना रहा हूं, मुझे तुम्हारी कमी महसूस होती है।” अगर वो सच में आपके दोस्त होंगे, तो वो समझेंगे और सुधार करेंगे।

कुछ रिश्तों को मान लें ‘एक्सपायरी डेट’
यह कड़वा सच है, लेकिन हर दोस्त जिंदगी भर के लिए नहीं होता। अगर समझाने और कोशिश करने के बाद भी चीजें नहीं बदल रही हैं, तो समझदारी इसी में है कि आप इज्जत के साथ उस रिश्ते से थोड़ा दूर हो जाएं।

दोस्ती सुकून देने के लिए होती है, बोझ बनने के लिए नहीं। अपनी वैल्यू कम करके किसी का ध्यान पाने से बेहतर है कि आप उन लोगों के साथ वक्त बिताएं जो सच में आपकी परवाह करते हैं।

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