ऋषिकेश में मुनिकीरेती व स्वर्गाश्रम के बीच गंगा नदी पर जानकी सेतु समय से तैयार करना बड़ी चुनौती

 तीर्थनगरी ऋषिकेश में मुनिकीरेती व स्वर्गाश्रम के बीच गंगा नदी पर बन रहे जानकी सेतु (झूला पुल) के निर्माण में लोनिवि ने अब पूरी ताकत झोंक दी है। विश्व प्रसिद्ध लक्ष्मणझूला पुल के बंद होने के बाद रामझूला पुल पर बढ़े अतिरिक्त दबाव ने जानकी सेतु को विकल्प के तौर पर तैयार करने के लिए विभाग को मजबूर कर दिया है। लोनिवि अब जनवरी 2020 तक हर हाल में जानकी सेतु को तैयार करने में जुट गया है।

टिहरी व पौड़ी जिलों को तीर्थनगरी से जोडऩे वाले दो महत्वपूर्ण पुलों लक्ष्मणझूला व रामझूला में से लक्ष्मणझूला को आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है। सो, अब रामझूला पुल पर ही पूरा दारोमदार टिका हुआ है। इन दोनों पुलों के विकल्प के तौर पर वर्ष 2006 में मुनिकीरेती के कैलाश गेट व स्वर्ग आश्रम के वेद निकेतन घाट के बीच जानकी सेतु के निर्माण की परिकल्पना की गई थी।

दिसंबर 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने करीब 30 करोड़ की लागत से बनने वाले इस झूला पुल के लिए चार लाख रुपये की टोकन मनी जारी की। इसके बाद यहां झूला पुल के बजाय मोटर पुल की संभावनाएं तलाशी गई ओर इस कवायद में छह साल का समय निकल गया। वर्ष 2012 में शासन से यहां थ्री-लेन ब्रिज निर्माण की स्वीकृति मिली। 25 मार्च 2013 को इसके लिए शासनादेश जारी कर धन आवंटित भी कर दिया गया। पुल निर्माण की जिम्मेदारी जायका कंपनी को सौंपी गई।

वर्ष 2016 के हरिद्वार अर्धकुंभ से पहले इस पुल को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था। मगर, कंपनी का काम इतना धीमा रहा कि तय समय पर पुल नहीं बन पाया। नतीजा कंपनी से जानकी सेतु के निर्माण का कार्य छीन लिया गया। वर्ष 2016 में 346 मीटर लंबे इस थ्री-लेन ब्रिज को पूरा करने का कार्य हिलवेज कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया। मगर, बजट के अभाव में इस कंपनी ने भी कुछ समय बाद काम बंद कर दिया। बीते वर्ष जब इस पुल की लागत का आकलन किया गया तो रिवाइज्ड एस्टीमेट 50.79 करोड़ पहुंच चुका था। इसमें से 11 दिसंबर 2018 को वित्त समिति ने 49 करोड़ की मंजूरी देते हुए पुल के निर्माण का काम शुरू करवाया।

फिलहाल जानकी सेतु के निर्माण का कार्य 83 प्रतिशत पूरा हो चुका है। लोनिवि ने कार्यदायी संस्था को 30 जनवरी 2020 तक काम पूरा करने की डेडलाइन दी है। अब जबकि, लक्ष्मणझूला आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है और रामझूला आबादी का भारी दबाव झेल रहा है, तब तय समय पर जानकी सेतु का निर्माण एक बड़ी चुनौती है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि जनवरी 2020 के आखिर तक हर हाल में जानकी सेतु का निर्माण पूरा हो जाएगा। यदि तय समय पर निर्माण पूरा होता है तो जानकी सेतु रामझूला पुल का बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। साथ ही लोनिवि को भी रामझूला पुल की मेंटेनेंस के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।

उत्तराखंड का पहला थ्री-लेन ब्रिज होगा जानकी सेतु 

कैलाश गेट व वेद निकेतन के बीच गंगा में निर्माणाधीन जानकी सेतु उत्तराखंड में पहला थ्री लेन पुल होगा। इस पुल के दोनों ओर पैदल लेन बनाई जाएगी, जिसमें एक लेन आने के लिए व दूसरी जाने के लिए होगी। जबकि, बीच वाले हिस्से में दुपहिया वाहनों व ठेलियों के लिए जगह होगी। हालांकि, इस पुल को चौपहिया वाहनों के गुजरने लायक भार क्षमता का बनाया जा रहा है। बावजूद इसके पुल पर विशेष परिस्थितियों में ही वाहनों का आवागमन हो सकेगा। लोनिवि के अधिशासी अभियंता मो.आरिफ खान ने बताया कि पुल पर थ्री लेन के लिए बनने वाले डिवाइडर्स को विशेष परिस्थितयों में अलग कर इसे चौपहिया वाहनों के लिए खोला जा सकता है।

मो.आरिफ खान (अधिशासी अभियंता, लोनिवि, नरेंद्ररनगर, टिहरी) का कहना है कि जानकी सेतु का 83 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। अब इस पर सिर्फ रस्से खींचे जाने हैं, जिसमें करीब डेढ़ माह का समय लगेगा। इसके बाद 274 मीटर लंबा डैक बिछाया जाएगा, जो बनकर तैयार हो चुका है। उम्मीद है कि डेडलाइन से पूर्व पुल तैयार हो जाएगा।

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