ईद मिलाद-उन-नबी पर शांति का पैगाम, बिना डीजे के तिरंगे संग निकलेगा जुलूस

जुलूस में डीजे नहीं होंगे, बल्कि तिरंगा ध्वज और “हिन्दुस्तान जिंदाबाद” के नारों से देशभक्ति का संदेश दिया जाएगा। आयोजन में मुस्लिम समाज के साथ अन्य धर्मों के लोग भी शामिल होंगे। दरगाह परिसर पर दुआ के बाद सर्वधर्म लंगर होगा, जिसमें सभी समुदाय एक साथ भोजन करेंगे।

पैगंबर मुस्तफा नबीए करीम की यौमें पैदाइश ईद मिलाद उल नबी के अवसर पर शहर में पांच सितंबर, गुरुवार को सर्वधर्म हजरत दूल्हा बादशाह बाबा दरगाह कमेटी की ओर से एकता और भाईचारे का प्रतीक विशाल जुलूस निकाला जाएगा। इस जुलूस की विशेषता होगी कि इसमें लोगों को तकलीफ देने वाले डीजे शामिल नहीं होंगे। कमेटी ने बताया कि इस जुलूस में तिरंगा ध्वज प्रमुख रूप से लहराएगा और बच्चे व युवा “हिन्दुस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाकर माहौल को देशभक्ति से सराबोर करेंगे। आयोजन को लेकर मुस्लिम समाज के साथ अन्य धर्मों के लोग भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की तैयारी कर रहे हैं।

दरगाह परिसर पर दुआ के बाद सर्वधर्म लंगर का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी समुदाय के लोग एक साथ भोजन ग्रहण करेंगे। कमेटी का कहना है कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश देने वाला भी है।

बैठक में बनी कार्ययोजना
आयोजन की तैयारियों को लेकर गुरुवार की शाम दरगाह परिसर में विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वधर्म कमेटी महासचिव नौशाद खान ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहर तक बड़ी संख्या में मुस्लिम समाजजन, स्कूल और मदरसों के बच्चे जुलूस में शामिल हों, इसके लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। कमेटी अध्यक्ष रिजवान पठान ने कहा कि पैगंबर मुस्तफा नबीए करीम की यौमें पैदाईश को खूबसूरती से मनाने के लिए बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। सजधज कर बच्चे इस दिन को यादगार बनाने में योगदान देंगे।
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जुलूस का मार्ग और स्वरूप
जुलूस दोपहर में दरगाह परिसर से प्रारंभ होकर तहसील चौराहा, लीसा टाकिज चौराहा, पान चौराहा, कोतवाली चौराहा, लाल मस्जिद चौराहा, सब्जी मंडी, नमक चौराहा होते हुए बड़ा बाजार से वापस दरगाह पहुंचेगा। इसमें अखाड़े, घोड़े, बग्गी, इस्लामी झंडे, सहनाई और बैंड-बाजे शामिल होंगे।

सभी धर्मों की भागीदारी
कमेटी के सदस्य हमीद हाजी उमरजी ने कहा कि जुलूस में सभी धर्मों के लोग शामिल होंगे। यही इस आयोजन की सबसे बड़ी ताकत है कि यह केवल एक धर्म तक सीमित न होकर सर्वधर्म सद्भाव का संदेश देगा। बैठक में प्रमुख रूप से हनीफ, अजीत चाचा, खोली भाई, आमिर मौलाना खान, यामीन बिजली, बिलाल अहमद, अनवर बाबा, भंवर दादा मेवाड़ा, अजहर बाबा, अमजद लाला, आफताब अली, छोटा पहलवान, जहीर भाई, हसीन भाई, तय्यब, आरिफ अंसार, अबरार हाजी, शहजाद भाई, जाहिर, डॉक्टर इम्तियाज और अब्दुल्ला सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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