इस यूनिवर्सिटी पर हरियाणा सरकार कसेगी शिकंजा, सरकार ने गठित की दो सदस्यीय कमेटी

आतंकी गतिविधियों के आरोपों से सुर्खियों में आई अल फलाह यूनिवर्सिटी पर अब हरियाणा सरकार भी शिकंजा कसेगी। कई विवाद और शिकायत सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने अल फलाह यूनिवर्सिटी की जांच शुरू कर दी है। जांच के लिए आईएएस श्यामल मिश्रा के नेतृत्व में एक कमेटी गठितन की है। कमेटी में उच्च शिक्षा विभाग के एक अधिकारी को भी शामिल किया गया है। कमेटी को कॉलेज से जुड़ी शिकायतें व अन्य कागजात सौंप दिए गए हैं। कमेटी सभी बिंदुओं की गहनता से जांच कर रही है। कमेटी जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट हरियाणा सरकार को सौंपेगी। उसके बाद ही राज्य सरकार यूनिवर्सिटी पर कोई फैसला ले सकेगी।
बीते साल दस नवंबर को दिल्ली बम धमाके में जिन आरोपियों का नाम सामने आया था उनमें से तीन प्रमुख डॉक्टर फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में फैकल्टी मेंबर थे। इनमें डाॅ. शाहीन, डाॅ. उमर और डाॅ. मुजम्मिल शामिल थे। बम धमाकों में 15 से ज्यादा लोगों की जानें गई थी।
विवादों में आने के बाद केंद्र की कई एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी थी। वहीं, इस मामले में कुछ विद्यार्थियों के अभिभावकों ने हरियाणा सरकार को भी शिकायत भेजी थी। इन शिकायतों में संदिग्ध गतिविधियां, फेकल्टी की कमी, विद्यार्थियों की पढ़ाई पर संकट के बादल जैसी शिकायतें आई थी। इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार ने कमेटी गठित की है। उधर, राज्य सरकार के पास यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई करने का रास्ता भी साफ हो गया है। हाल ही में हरियाणा सरकार ने निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2025 पारित किया था। सरकार ने संशोधित नियमों को भी अधिसूचित कर दिया है।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी करीब 70 एकड़ में फैली हुई है। इस यूनिवर्सिटी को ट्रस्ट की ओर से संचालित की जाती है। 2014 में हरियाणा सरकार ने इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया था। 2019 में इस यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू हुई थी। यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान का दर्जा भी प्राप्त है।





