इन श्रापों से मुक्ति पाए बिना व्यक्ति को नहीं होती संतान सुख की प्राप्ति

प्राचीन काल में जब भी ऋषि – मुनि किसी व्यक्ति से नाराज हो जाते थे तो उसे श्राप दे देते थे और मुनियों द्वारा दिए गए श्राप का फल भी लोगों को भोगना पड़ता था। अगर देखा जाए तो श्राप का सीधा सा अर्थ होता है बद्दुआ। जिस प्रकार व्यक्ति को दुआओं से सुख – समृद्धि की प्राप्ति होती है उसी प्रकार बद्दुआ से व्यक्ति के जीवन की सारी खुशियां छिन जाती हैं। शास्त्रों के अनुसार कुछ श्राप ऐसे होते हैं जो संतान प्राप्ति में बाधा बनते हैं। अगर किसी व्यक्ति को ये श्राप मिले हों तो चाहकर भी उसे संतान सुख की प्राप्ति नहीं होती है। वे कौनसे श्राप हैं जो संतानप्राप्ति में बाधा उत्पन्न करते हैं आइए जानते हैं इनके बारे में ………..इन श्रापों से मुक्ति पाए बिना व्यक्ति को नहीं होती संतान सुख की प्राप्ति

शास्त्रों के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को ब्राह्मण निसंतान रहने का श्राप दे दे तो उसे इस श्राप के परिणाम स्वरूप संतान सुख से वंचित रहना पड़ता है। जब तक व्यक्ति इस श्राप से मुक्ति नहीं पा लेता है त​ब तक उसे संतान की प्राप्ति नहीं होती है।

जिस व्यक्ति से उसके पितर नाखुश होते हैं और अप्रसन्न होकर उसे निसंतान होने का श्राप दे देते हैं ऐसे व्यक्ति को संतान की प्राप्ति नहीं होती है। इसी वजह से निसंतान दंपत्तियों को गया में विधिवत श्राद्ध करने की सलाह दी जाती है जिससे उनके पितरों को पितर योनि से छुटकारा मिले और व्यक्ति को श्राप से मुक्ति प्राप्त हो।

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