आरबीआई हुयी सख्त ईएमआई पेमेंट की चूक पर, ये कार्रवाई हो सकती है…

आज के समय में घर, गाड़ी या जरूरत के अन्य सामानों के लिए लोन लेना आम बात हो गयी है। लेकिन कई बार लाइफ में ऐसी अनएक्सपेक्टेड चीजें हो जाती हैं जब आप लोन के ईएमआई का पेमेंट समय पर नहीं कर पाते हैं। ऐसे में आपको काफी सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि रिजर्व बैंक ने ईएमआई पेमेंट में चूक करने वालों के खिलाफ ज्यादा सख्ती दिखाने का संकेत दिया है।

लिए जा सकते हैं ये एक्शन ईएमआई पेमेंट मिस होने पर
कई बार इनकम की कमी से तो कई बार टेक्निकल दिक्कतों से ना चाहते हुए भी ईएमआई का पेमेंट मिस हो जाता है। बार-बार ऐसा होने पर लोन देने वाले कॉमर्शियल बैंक एवं नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां आपके खिलाफ कई तरह के एक्शन ले सकती हैं। शुरुआत में लोन देने वालों आपको एसएमएस, ईमेल के जरिए ऐसा नहीं करने की चेतावनी देती है। इसके साथ ही वे आपकी ईएमआई पर लेट फाइन भी लगा देती हैं।
90 दिन तक रिपेमेंट नहीं होने पर एनपीए हो सकता है आपका अकाउंट
अगर आप लगातार 90 दिन तक ईएमआई का रिपेमेंट नहीं करते हैं तो आपके अकाउंट को लेंडर नॉन-परफॉर्मिंग अकाउंट्स में डाल देते हैं। इसका मतलब ये हुआ कि इसके बाद आपको किसी भी तरह का लोन नहीं मिलेगा। बैंक चाहें तो आपके क्रेडिट कार्ड लिमिट को भी फ्रीज कर सकते हैं।
चेतावनी के बावजूद सुधार नहीं होने पर क्रेडिट प्रोफाइल हो जाता है डाउनग्रेड
लोन देने वाले बैंक आपको अलग-अलग माध्यमों से रिमाइंडर भेजते हैं। अगर आप फिर भी रिपेमेंट नहीं कर पाते हैं तो वे आपके क्रेडिट प्रोफाइल को डाउनग्रेड कर देते हैं। इससे आपको फ्यूचर में किसी भी तरह का लोन लेने में काफी दिक्कत पेश आती है। कोई भी व्यक्ति ऐसी स्थिति नहीं चाहेगा क्योंकि किसी ने कहा है कि रुपया भगवान नहीं है लेकिन उससे कम भी नहीं है। ऐसे में कई बार आप ऐसी स्थिति में फंस सकते हैं, जहां आपका काम लोन लेने से निकल जाएगा लेकिन ऐसी स्थिति में आपको यह मदद भी नहीं मिल पाएगी। इसलिए अपनी क्रेडिट रेटिंग को किसी भी स्थिति में डाउनग्रेड नहीं होने देना चाहिए।
लीगल एक्शन भी है संभव
बैंक की ओर से कई बार चेतावनी दिये जाने के बावजूद लोन का रिपेमेंट नहीं करने पर अधिकारी चाहें तो लीगल एक्शन भी ले सकते हैं। ऐसे मामलों में वे मामले को लीगल डिपार्टमेंट को भेज देते हैं जो कारण-बताओ नोटिस जारी कर सकता है। इसके अलावा लोन की रिकवरी के लिए लोन लेने वाली की संपत्ति को अटैच भी किया जा सकता है।





