आदेश बाद भी हलियापुर तहसील को बल्दीराय में नहीं जोड़ा गया

सुलतानपुर, 31 अक्टूबर (UjjawalPrabhat.Com)। तीन कानूनगो सर्किल के 29 गांव को नवनिर्मित तहसील बल्दीराय में शामिल करने की प्रक्रिया शासन प्रशासन की शिथिलता के चलते ठप सी पड़ गई है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों ने उक्त गांव को शामिल नहीं किया इन 29 गांवों के हजारों नागरिक शासन एवं प्रशासन की मनमानी का शिकार बन गए हैं।
बताते चले कि विकासखंड बल्दीराय के 65 ग्राम पंचायत आज भी अपने मूल क्षेत्र में है, इन्हें प्रवर्तित नहीं किया गया किंतु बल्दीराय के तहसील का दर्जा दिलाने के लिए हलियापुर थाने की तीन कानूनगो सर्किल के 29 गांव को अलग कर दिया गया। शासन द्वारा इन गांव की पूर्ति धनपतगंज ब्लॉक के सर्किलो को जोड़कर पूरा करवा लिया गया। जिसका खामियाजा वर्तमान समय में धनपतगंज एवं हलियापुर के सर्किल के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्र के निवासी एडवोकेट मनोज सिंह ने बताया कि हलियापुर थाने से संबंधित 29 गांव की सारी विकास योजनाएं ब्लॉक मुख्यालय से ही संचालित हो रही हैं। किंतु परिसीमन करने में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा राजनीति के चलते 29 गांव को तहसील बल्दीराय में नहीं शामिल किया गया, जो सोचने का विषय है। गांव के नागरिकों को ब्लॉक के कार्य करवाने हेतु बल्दीराय आना पड़ रहा है, लेकिन तहसील कार्य के लिए 50 किलोमीटर की दूरी तय करके सदर सुलतानपुर जाना पड़ रहा है। यही नहीं हलियापुर के कराए गये परिसीमन में राजनीतिक के दबाव में आकर अधिकारियों ने 29 गांव के मतदाताओं को सुलतानपुर संसदीय क्षेत्र व विधानसभा क्षेत्र इसौली से वोट डालने से वंचित कर दिया गया। जबकि आजादी के बाद से ही पुरानी व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही थी। यहां अधिकारियों की मनमानी सिर चढ़कर बोल रही है, गांव के नागरिकों का कहना है कि अगर शासन को इस 29 गांव को अलग करना ही था सारी प्रक्रिया अलग ही की जाती और सुलतानपुर जिले से पूरे क्षेत्र को अलग करके हलियापुर को ब्लॉक का दर्जा दिया जाता और इस क्षेत्र को अमेठी जिले से जोड़ा जाता। 29 गांव का ब्लाक बल्दीराय और तहसील जिला मुख्यालय कैसे हो गया यह भेदभाव वाला कैसा परिसीमन है।
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उच्च न्यायालय में दायर याचिका पर हुआ था आदेश
सूत्रों के अनुसार हलियापुर थाना क्षेत्र के तीन कानूनगो त्रिरहुत, हलियापुर व भवानीगढ़ के अंतर्गत ग्राम हलियापुर रन मूसेपुर, पिपरी, जमालपुर, उमरा, कुआसी, डेहरियावा, कापा गौरापरानी, ऐसे ही मुकुंदपुर, भवानीगढ,़ रामपुर, सराय, बग्गा, जरईकला, उसकामऊ, फतेहपुर, बड़ाडांड, काकरकोला, तहसील बल्दीराय में शामिल करने हेतु जागरूक लोगों द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। माननीय न्यायालय हलियापुर थाने के इस गांव को नवनिर्मित तहसील में शामिल करने का आदेश पारित किया था। सूत्र बताते हैं कि यह आदेश तहसील बल्दीराय के तहसीलदार वीपी सिंह को मिला था 29 गांव की तमन्ना धरी की धरी रह गई जब तहसीलदार बीपी सिंह का स्थानांतरण हो गया। तहसीलदार के जाते ही 29 गांव तहसील में शामिल करने वाली फाइल कहां गुम हो गई किसी को पता नहीं चला। फिलहाल चाहे जो भी 29 गांवों के हजारों ग्रामीण आज शासन-प्रशासन की उपेक्षा का दंश झेलने को मजबूर हो गए हैं।
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लोकसभा चुनाव के बहिष्कार करने की बन रही रणनीति
29 गांव के नागरिकों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उनका कहना है कि या तो हलियापुर को ब्लॉक का दर्जा दिया जाए या तत्कालीन गांव को बल्दीराय तहसील में जोड़ा जाय। अगर शासन-प्रशासन नागरिक को इस महत्वपूर्ण मांग को नहीं माना तो 29 गांव के हजारों मतदाता आगामी लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
रिपोर्ट- रंजीत सिंह/अरूण साहू





