आग लगने से 100 बीघा जमीन पर खड़ी गेहूं की फसल जलकर खाक

पकी हुई खेती में आग लग गई। देखते ही देखते 100 बीघा में खड़ी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। घटना शाजापुर के शुजालपुर क्षेत्र की है। हालातों को देखते हुए किसानों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया। फायर ब्रिगेड की देरी पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा।

फायर ब्रिगेड की देरी पर फूटा किसानों का गुस्सा; 15 ट्रैक्टरों की मदद से पाया काबू, क्लस्टर स्तर पर दमकल तैनात करने की मांग

पकी हुई खेती में आग लग गई। देखते ही देखते 100 बीघा में खड़ी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। घटना शाजापुर के शुजालपुर क्षेत्र की है। हालातों को देखते हुए किसानों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया।

शाजापुर के शुजालपुर (तिलावत) क्षेत्र के ग्राम तिलावत में गुरुवार को बिजली के शॉर्ट सर्किट ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया। शॉर्ट सर्किट से गेहूं के खेतों में लगी भीषण आग ने करीब 100 बीघा में खड़ी फसल को जलाकर खाक कर दिया। आग इतनी विकराल थी कि सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच इसने कई खेतों को अपनी चपेट में ले लिया।

‘फायर लाइन’ बनाकर रोकने का प्रयास
आग लगने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्रित हुए। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद फायर ब्रिगेड काफी देरी से पहुंची। इस बीच, किसानों ने हिम्मत दिखाते हुए स्वयं ही मोर्चा संभाला। आग को आगे बढ़ने से रोकने के लिए 15 से अधिक ट्रैक्टरों का उपयोग किया गया। किसानों ने ट्रैक्टरों से खेतों की मिट्टी पलटकर ‘फायर लाइन’ बनाई, जिससे आग के प्रसार को रोका जा सका।

इन किसानों को हुआ भारी नुकसान
पीड़ित किसान शिवनारायण चौधरी और पंकज कलमोदी ने रुआंसे स्वर में बताया कि उनकी पूरी फसल आंखों के सामने जलकर राख हो गई। वहीं, ग्रामीण राकेश चौधरी और राहुल पटेल ने प्रशासन के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि दमकल समय पर पहुंच जाती, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्रामीण इलाकों में आगजनी की घटनाओं को देखते हुए हर 5 पंचायतों के क्लस्टर पर एक दमकल की स्थाई तैनाती की जाए।

प्रशासन ने दिया मुआवजे का आश्वासन
घटना की सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार शिल्पा सिंह ने राजस्व टीम के साथ घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने बताया कि प्रभावित खेतों का निरीक्षण कर लिया गया है। तहसीलदार ने आश्वासन दिया कि शाम तक प्रत्येक किसान के नुकसान का सटीक आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसके बाद आरबीसी (RBC) के नियमों के अनुसार उचित मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू होगी।

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