आग मत लगाओ, चर्चा करो: उपवास पर बैठे शिवराज की किसानों से अपील

भोपाल. हिंसक किसान आंदोलन के बीच मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार से भेल (BHEL) के दशहरा मैदान पर अनिश्चितकालीन उपवास शुरू कर दिया। उन्होंने किसानों को समस्याओं पर चर्चा के लिए खुला निमंत्रण दिया है। शिवराज ने कहा, “जब-जब प्रदेश में किसानों पर संकट आया, मैं सीएम आवास से निकल उनके बीच पहुंच गया। नया आयोग फसलों की सही कीमत तय करेगा। हम किसानों को सही कीमत दिलाएंगे।” शिवराज ने कहा- किसान आग न लगाएं, चर्चा के लिए आएं। अनशन से पहले शिवराज और उनकी पत्नी साधना सिंह ने पूर्व सीएम कैलाश जोशी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। जोशी ने तिलक कर सफल होने की शुभकामनाएं दी। इस बीच, प्रदेश के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा, “किसानों के कर्ज माफी का कोई सवाल ही नहीं उठता, मैं पहले भी इसके पक्ष में नहीं था और अब भी नहीं हूं।” हर वर्ग का कल्याण हो, सरकार का यही लक्ष्य…
आग मत लगाओ, चर्चा करो: उपवास पर बैठे शिवराज की किसानों से अपील
 
– सीएम के उपवास के लिए दशहरा मैदान पह वाटरप्रूफ पंडाल बनाया गया है। मंदसौर में फिलहाल हालात नॉर्मल बताए जा रहे हैं। उधर, होम मिनिस्ट्री ने सभी पड़ोसी राज्यों को अलर्ट किया है। हिंसा में घिरे इलाकों में सुरक्षा के लिए कुल 13 कंपनियां तैनात की गई हैं।
– शिवराज ने कहा, “प्रदेश में हर वर्ग का कल्याण हो, हमारा एक ही लक्ष्य रहा है- प्रदेश का विकास। मुख्यमंत्री बनते समय मेरी प्राथमिकता किसान भाई-बहन रहे।”

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– “प्रदेश को आगे बढ़ाना है तो खेती को आगे बढ़ाना है। मुख्यमंत्री बना तो साढ़े सात लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती थी, अब ये रकबा 40 लाख हेक्टेयर तक बढ़ चुका है।”
– “खेतों में पानी पहुंचाने में हमने कोई कसर नहीं छोड़ी। हमने 18% कर्ज घटाकर 0% कर दिया। -10% पर लोन दिया। जब संकट की घड़ी आई, मैं कभी सीएम आवास पर नहीं बैठा, खेतों में गया। किसानों को पर्याप्त राहत देने की कोशिश की। पिछले साल सोयाबीन की फसल खराब हुई थी, हमने 4800 करोड़ का मुआवजा दिया।”

– “मालवा रेगिस्तान बनने की दिशा में बढ़ रहा था। हमने नर्मदा ले जाकर ये सुनिश्चित किया कि मालवा रेगिस्तान ना बने।”
– “दुनिया में सिर्फ मध्यप्रदेश में ऐसा होता है कि एक लाख ले जाओ, खाद-बीज के लिए और 90 हजार ही वापस करो।”
– “पिछले साल प्याज के दाम गिर गए थे। तब मैंने तय किया कि प्याज 6 रुपए किलो खरीदा जाएगा।”
– “इस साल भी बंपर फसल आई है। अन्न के भंडार भर गए हैं। जब उत्पादन बंपर होता है तो कीमत गिरती है। इससे किसान को नुकसान होता है। इससे किसान को तकलीफ होती है। इसलिए हमने फैसला किया कि पूरा प्याज 8 रुपए किलो खरीदा जाएगा।”
 
किसान की मेहनत को बेकार नहीं जाने देंगे
– “किसान की मेहनत और परिश्रम को बेकार नहीं जाने दिया जाएगा। किसान को लाभकारी मूल्य देने में मध्यप्रदेश सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी।”
– “किसान की मर्जी के बिना किसान की जमीन नहीं ली जाएगी। किसान विरोध मुद्दों को ऑर्डिनेंस लाकर बदला जाएगा।”
– “चेक पेमेंट में परेशानी आई तो किसान चेक लेकर घूमता रहा। हमने फैसला किया कि आरटीजीएस से पेमेंट किया जाएगा।”
– “किसानों को लाभकारी मूल्य देना मध्यप्रदेश में सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए केंद्र द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पैदावार ली जाएगी। इसके अलावा हमने एक आयोग बनाने का फैसला किया है जो किसान की लागत का आकलन कर यह तय करेगा कि किसान को लाभकारी मूल्य दिया जा सके।
– “सही कीमत देने के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष बना रहे हैं। इसके लिए 1 हजार करोड़ का कोष बनाया जा रहा है। एक बड़ी विसंगति है कि किसान बेचता है तो सस्ता बिकता है। उपभोक्ता को महंगा मिलता है। मेरी कोशिश रहेगी कि 8% आढ़त को घटाकर 2% किया जाए।”
– “भविष्य में हम ये कोशिश करेंगे कि किसान और उपभोक्ता के बीच कोई बिचौलिया ना रहे जिससे किसान को उसकी फसल का उचित मूल्य मिल सके।”
 
किसानों को भड़काया जा रहा है
– शिवराज ने कहा, “आंदोलन तब जायज है जब सरकार ना सुने। जब मुख्यमंत्री कह रहा है कि आइए चर्चा करेंगे। चर्चा करके समाधान निकालेंगे। तो किसान चर्चा के लिए आएं।”
– “मेरी एक वीडियो क्लिपिंग चलाई गई। जिससे किसानों को भड़काया गया कि मैं एक धेला नहीं दूंगा। मैंने किसानों के लिए ऐसा कभी नहीं कहा। मैंने ग्रामोदय अभियान के दौरान जो कहा था, उसे किसानों से जोड़ दिया गया। तब मैंने कर्मचारियों से कहा था- हड़ताल करने से क्या होगा, एक धेला नहीं दूंगा।”
– “जो दुर्भाग्यपूर्ण घटना मंदसौर जिले में हुई, उससे मैं अंदर तक हिल गया।”
 
कृषि मंत्री ने क्या कहा?
– मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा, ”जो जैसा व्यवहार करेगा, उसके साथ वैसे ही निपटा जाएगा। यह आंदोलन अब किसानों का नहीं रहा। राहुल गांधी यहां क्यों आए थे, उनका जन्म मप्र में हुआ है क्या? किसानों के कर्ज माफी का कोई सवाल ही नहीं उठता मैं पहले भी इसके पक्ष में नहीं था और अब भी नहीं हूं।”
– जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि सरकार ने किसानों को बातचीत के लिए खुला मंच दिया है। वे यहां आकर अपनी समस्या रख सकते हैं।
– राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि ये सरकार किसानों की है। हम हरसंभव मदद के लिए तैयार हैं। किसानों से अपील है कि वे शांति बनाए रखे और सीएम के सामने अपनी मांगे रखें।
 
विपक्ष ने कहा- ये सब नौटंकी
– विपक्ष ने सीएम के उपवास और दशहरा मैदान से सरकार चलाने के फैसले को महज नौटंकी करार दिया है। कांग्रेस का कहना है कि चौहान को नौटंकी करने के बजाय किसानों की समस्याओं को सुनकर उन्हें दूर करना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने कहा, “खुद को संवेदनशील मुख्यमंत्री बताने वाले चौहान छह किसानों की मौत के बाद मंदसौर नहीं गए, यहां तक कि बालाघाट में एक पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट में 25 लोगों की मौत के बाद उन्होंने वहां भी जाना मुनासिब नहीं समझा। वे सिर्फ नौटंकी और मुद्दों से भटकाने की कोशिश करते रहे हैं। उपवास भी इसी का हिस्सा है।”
 
DB EXPOSE: इसलिए भड़का आंदोलन
आंदोलन…के लिए 1000 से ज्यादा किसान मंगलवार को मंदसौर और पिपलियामंडी के बीच बही पार्श्वनाथ फोरलेन पर उतर आए। पहले चक्का जाम करने की कोशिश की। पुलिस ने सख्ती दिखाई तो पथराव शुरू कर दिया।
फायरिंग… आंदोलनकारियों का पीछा किया गया तो वो दो टुकड़ों में बंट गए। एक टुकड़ी का सामना CRPF से हुआ, जिसने फायरिंग कर दी। दूसरी टुकड़ी थाने के पास थी। हालात बेकाबू देख थाने में एक दर्जन पुलिसवालों ने भी फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में 6 लोगों की मौत हो गई। किसानों का आरोप है कि बिना वार्निंग दिए फायरिंग कर दी।
बेकाबू हालात…तब हुए जब किसानों की मौत की खबर फैली। बुधवार को आधा मालवा हिंसा और आगजनी की चपेट में आ गया।
 
पहली चूक… हालात संभालने के लिए 2014 बैच के प्रोबेशनल IPS साईं कृष्णा को भेजा गया। ये फैसला मंदसौर कलेक्टर स्वतंत्र सिंह और एसपी ओपी त्रिपाठी ने लिया। लेकिन, कृष्णा बेकाबू हालात को संभाल नहीं पाए।
दूसरी चूक…मंदसौर में हिंसा भड़कने के बाद सरकार ने भोपाल में मीटिंग्स शुरू कीं। सीएम बैठक में मौजूद थे। कलेक्टर और एसपी को हटाने का फैसला लिया गया ताकि आंदोलनकारियों में मैसेज जाए। लेकिन, शाम तक यही नहीं तय हो पाया कि एसपी-कलेक्टर की जगह किसे भेजा जाए। जब कलेक्टर मृतकों के परिजनों से मिलने पहुंचे तो लोगों का गुस्सा देखकर उन्हें भागना पड़ा। गुरुवार सुबह सरकार ने दोनों अफसरों का तबादला किया।
यू टर्न… मंगलवार को एमपी के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने पुलिस फायरिंग में किसानों के मारे जाने से इनकार कर दिया था। उन्होंने ये भी कहा कि CRPF और पुलिस ने फारिंग नहीं की। मंदसौर कलेक्टर ने भी कहा कि फायरिंग किसने की, इसका पता पोस्टमार्टम के बाद ही चलेगा। तीन दिन बाद गुरुवार को भूपेंद्र सिंह ने कहा,”जांच में साबित हो गया है कि पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें 5 किसानों की मौत हो गई।”
कब से हुई शुरुआत?
– महाराष्ट्र में पुणतांबा के किसानों से प्रभावित हो कर छोटे-बड़े किसान संगठन, नेता इकट्ठा हो गए। 1 जून से किसान क्रांति मोर्चा के नाम से आंदोलन शुरू कर दिया गया। पश्चिम महाराष्ट्र के किसानों ने आंदोलन शुरू किया। नासिक और अहमदनगर आंदोलन का केंद्र है।
– मध्य प्रदेश में 2 जून से इस आंदोलन की शुरुआत हुई। यहां इंदौर, धार, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, खंडवा और खरगोन के किसान आंदोलन कर रहे हैं।
 
क्या हैं किसानों की मांगें?
महाराष्ट्र

1) कर्ज माफ किया जाए।
2) प्रोडक्शन कॉस्ट से 50% ज्यादा मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) मिले।
3) 60 साल और उससे ज्यादा उम्र के किसानों के लिए पेंशन स्कीम हो।
4) बिना ब्याज के लोन मिले, दूध का रेट बढ़ाकर 50 रुपए/लीटर किया जाए।
6) माइक्रो इरिगेशन इक्विपमेंट्स के लिए फुल सब्सिडी मिले।
 
मध्य प्रदेश
1) किसानों को कर्ज माफी मिले।
2) सरकारी डेयरी दूध के ज्यादा दाम दे।
3) स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू हों।
4) किसानों पर दायर केस वापस लिए जाएं।
 
आंदोलन की क्या है खासियत?
पहली बार…दो राज्यों के किसान एकसाथ आंदोलन के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।

चेहरा…कोई नहीं है। महाराष्ट्र में आंदोलन किसानों ने शुरू किया। ये विदर्भ या मराठवाड़ा के किसान नहीं हैं, जो सूखे से प्रभावित रहते हैं।
संकट… गेहूं, दाल, चावल उगाने वाले किसानों के अलावा उन पर भी मंडरा रहा है, जो फल-दूध-सब्जी बेचते हैं।
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