आखिर क्यों इन जगहों पर पूतना और दुर्योधन जैसे असुरों को होती है पूजा, वजह चौकाने वाली…

दुनिया भर में कई देवी देवताओं के मंदिर हैं जिनकी सभी पूजा करते हैं और उन्हें आराध्य भी मानते हैं. वहीं असुरों की बात की जाए तो इनका बखान पुराणों और शास्त्रों में तो मिलता ही है लेकिन इन्हें पूजा नहीं जाता. शास्त्रों और पुराणों में हमने अब तक यही देखा है कि असुर बुरे होते हैं, बुरे काम करने के कारण उन्हें भगवान दंड दिया था और उनका वध कर देवी देवताओं के साथ दुनिया की रक्षा भी की थी. इसी कारण हम अक्सर ही देवी देव को ही पूजते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कुछ जगह ऐसी भी हैं जहां भगवन को नहीं बल्कि असुरों को पूजा जाता है. आइये जानते हैं कौनसी है वो जगह. आखिर क्यों इन जगहों पर पूतना और दुर्योधन जैसे असुरों को होती है पूजा, वजह चौकाने वाली...

* दुर्योधन मंदिर –

दुर्योधन जिसे हम कभी भी पूजना पसंद ना करें, लेकिन उत्तराखंड के नेटवार नामक स्थान से करीब 12 किमी की दूरी पर महाभारत के दुर्योधन का एक मंदिर बना हुआ है. यहाँ के लोग भगवान मानकर इसे पूजते है. इसी के पास एक और मंदिर बना हुआ है जो दुर्योधन के मित्र कर्ण का है जो साथ ही में बनाये गए हैं. यहाँ के लोग इन्हें भगवान मानकर पूजते हैं.

* पुतना का मंदिर –

तना, जिसने भगवान कृष्णा को अपना दूध पिलाकर मारने की कोशिश की थी, इसका मंदिर भी उत्तर प्रदेश के गोकुल में बना हुआ है जहां कंस और पूतना की पूजा की जाती है. पूतना एक बहुत बड़ी राक्षसी थी लेकिन दूध श्रीकृष्ण को दूध पिलाने की वजह से इसे माता भी कहा जाता है जिसके कारण इसकी पूजा की जाती है. यहां पूतना की लेटी हुई मूर्ति है जिसमें छाती पर चढ़कर उसका दूध पीते भगवान कृष्ण भी हैं. 

* दशानन मंदिर –

उत्तरप्रदेश के कानपुर स्थित शिवाला में दशानन का मंदिर है जहां पर रावण की पूजा होती है. यहां के लोगों का मानना है कि रावण एक प्रसिद्ध पंडित था जिसके चलते उसकी पूजा की जाती है. इतना ही नहीं लोग यहां मनोकामना लेकर भी आते हैं जो पूरी भी होती हैं. 

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