आखिर क्यों अपनी बेटी को दोबारा पांचवीं में पढ़ाना चाहता है ये पिता?

चंपावत। भारत-नेपाल सीमा पर लगे चंपावत जिले के पास एक गांव है। जहां पर एक पिता ने अपनी बेटी को दोबारा से पांचवीं क्लास में एडमिशन दिलाने की गुहार लगाई है ताकि उसकी बेटी को मिड-डे मील का खाना मिलता रहे।
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पांचवीं क्लास में दोबारा पढ़ाने के लिए प्रधानाध्यापक को पत्र लिखकर की गुजारिश
बता दें, चंपावत जिले का अंतिम गांव है खेत जो सड़क से लगभग 25 किमी की दूरी पर है। यहां तक ग्रामीणों को पहुंचने के लिए पैदल इतनी दूरी नापनी पड़ती है। इसी गांव में राजमिस्त्री सोबन सिंह व गोविंदी देवी रहते हैं। उनकी बेटी भावना ने गांव के प्राथमिक विद्यालय से इस बार पांचवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की।
लेकिन किस्मत का खेल देखो सोबन सिंह उसे आगे पढ़ाना तो दूर, परिवार के लिए खाने का इंतजाम भी नहीं कर पा रहे। इस वजह से उन्होंने प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक कृष्ण सिंह को पत्र लिखकर गुजारिश की है कि भावना को पांचवीं में दोबारा प्रवेश दिला दें। ताकि उसे मिड-डे मील का खाना तो मिलता रहे।
सोबन सिंह मकान बनाने का काम करते हैं, लेकिन इससे परिवार की गुजर बामुश्किल ही हो पाती है। यही वजह है कि वह अपनी लाडली भावना को छठवीं कक्षा में प्रवेश नहीं दिला पा रहे। क्योंकि, आगे की पढ़ाई के लिए उसे 27 किमी दूर टनकपुर या 50 किमी दूर चम्पावत भेजना पड़ेगा।
भावना के दो भाई भी हैं। भावना की मां गोविंदी देवी कहती हैं कि जैसे-तैसे परिवार की गुजर हो रही है। बेटी को बाहर भेजने पर शिक्षा तो निश्शुल्क मिल जाएगी, लेकिन उसके रहने-खाने का खर्च उठाना उनके बूते में नहीं। ऐसे में भावना को यहीं दोबारा पांचवीं कक्षा में प्रवेश मिल जाए तो वह पढ़ती भी रहेगी और दोपहर का खाना भी मिल जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक सत्यनारायण ने बताया कि किसी भी छात्र-छात्रा को दोबारा उसी कक्षा में प्रवेश नहीं दिया जा सकता। वह आर्थिक आधार पर भी ऐसा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि इस मामले में उच्चाधिकारियों से सलाह कर कोई रास्ता निकालने की कोशिश की जाएगी।





