अयोध्या में इस पेड़ पर अपने आप बन रहा है राम का नाम, बनेगा पर्यटन का केंद्र

रमेश मिश्रा
अयोध्या। श्रीराम नाम अंकित दुर्लभ वृक्ष पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेगाl इसके प्रति श्रद्धालुओं के आकर्षण को देखते हुए इसके संरक्षण को लेकर संतों और विश्व हिन्दू परिषद ने इसके संरक्षण की मांग उठाई हैl इन संगठनों का कहना है कि स्वतः प्रकट यह वृक्ष देव प्रदत्त है। इस दर्शनीय अलौकिक वृक्ष को सरकार सुरक्षित करे। राज्य के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के अनुसार, सरकार प्रारंभ से ही ऐतिहासिक पुरातात्विक साक्ष्यों के संरक्षण हेतु संवेदनशील है।
सियराम मय सब जग जानी, करहु प्रणाम जोरी जुग पानी।। अर्थात- सम्पूर्ण संसार में श्रीराम का निवास है। सब में भगवान विराजमान हैं, और हमें उनको हाथ जोड़कर प्रणाम करना चाहिए। यही कल्पना सम्पूर्ण रामनगरी के कण-कण में साकार होती है। यहां की पावन “रज” में श्री सीताराम के प्रति अगाध निष्ठा बसी है। श्रीसीताराम जी का स्वर जब साधु-संतों और भक्तों के कंठों से निकलता है, तो मानो प्रभु का अवतरण पुनः होने जा रहा हो वैसे भी कहा गया ‘कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा।। अर्थात कलयुग में मानव केवल प्रभु का सच्चे मन से स्मरण करके एवं उनकी पावन कथा सुनकर भवसागर को पार कर सकता है।
यह भी सत्य ही कहा गया है श्रीराम से बड़ा राम का नाम। इसी को चरितार्थ करते हुए अयोध्या जनपद की पवित्र भूमि पर कदम प्रजाति का एक ऐसा चमत्कारी वृक्ष है जिसकी डालियों और टहनियों पर भगवान राम का नाम अंकित है।
राम की नगरी अयोध्या की पंचकोसी परिक्रमा क्षेत्र की पावन परिधि में स्थित यह वृक्ष लोगों की आस्था का केंद्र है, और स्थानीय लोग इस वृक्ष की पूजा-अर्चना करते हैं। इस वृक्ष की चमत्कारी प्रकृति के बारे में विश्वास करना आसान नहीं है लेकिन इस वृक्ष के चित्र देखने के बाद लोगों को विश्वास हो जाएगा।
अयोध्या नगर से सटे ग्रामीण क्षेत्र भीखी का पुरवा से कुछ दूरी पर गोरखपुर-अयोध्या हाईवे पर मुख्य सड़क मार्ग के किनारे मौजूद गांव तकपुरा पूरे निरंकार के एक खेत में मौजूद इस वृक्ष के बारे में आस-पास के लोग बहुत अच्छी प्रकार से जानते हैं। इसे रामनाम वृक्ष कहकर पुकारा जाता है। कदम प्रजाति के इस वृक्ष की जड़ और डालियों पर भगवान” राम का नाम प्राकृतिक रुप से अंकित हुआ है, और समय के साथ-साथ राम नाम की संख्या बढ़ती ही जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दशकों पहले इस वृक्ष पर भगवान राम का नाम लिखा हुआ देखा गया। धीरे-धीरे ये संख्या बढ़ती चली गई और आज भी बढ़ती जा रही है। जब आस पास के लोगों को राम नाम के इस चमत्कार का पता चला तो उन्होंने इस वृक्ष को आस्था के रूप से देखना शुरु किया और इसकी नित्य पूजा अर्चना आरंभ कर दी।
वर्ष में एक बार इस वृक्ष के नीचे बड़ा भारी मेला लगता है। यहां पर नियुक्त पुजारी प्रति दिन निष्ठा भाव से प्रातः इस अलौकिक दर्शनीय वृक्ष की पूजा करते हैं। इसके अतिरिक्त पितृ विसर्जन के दिन भी इस वृक्ष के नीचे मेले का आयोजन होता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस वृक्ष की पूजा करता है, उसके सभी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्ट दूर हो जाते हैं और वे सुखी जीवन यापन करते हैं।
धार्मिक मत-
आज से तीस वर्ष पश्चात इस वृक्ष की हर टहनी और पत्तियों पर भगवान श्रीराम का नाम लिखा मिलेगा। आज से लगभग तीस वर्ष पूर्व ऐसा ही एक वृक्ष प्राचीन एवं ऐतिहासिक मणि पर्वत के समीप था। जो सूख गया। उसके सूखने के उपरांत उसी प्रकार का यह वृक्ष स्वतःप्रकट हुआ है। जिसके दर्शनार्थ रामभक्त यहां नित्य आते हैं।
इस समय कोरोना महामारी के दौरान जनपद को लॉकडाउन किये जाने के पश्चात बाहरी दर्शनार्थी नही आ पा रहे है। जिसके कारण स्थानीय भक्त ही दर्शन पूजन अनुष्ठान कर के अपनी श्रद्धानिवेदित कर रहे हैं।
क्या कहते हैं धर्माचार्य
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अध्यक्ष मणिराम दास जी छावनी महंत नृत्य गोपाल दास महाराज का कहना है। यह दुर्लभ वृक्ष का प्रकटीकरण समस्त अयोध्या वासियों के लिए शुभ और आश्चर्य चकित करने वाला है। उन्होंने कहा कलिकाल मे श्रीराम नाम ही समस्त जगत का कल्याण करेगा यह तो साक्षात भगवत कृपा है कि अयोध्या मे रामनाम को अंगीकार करने वाले वृक्ष की उत्पति हुई है। इसकी पूजा-अर्चना नित्य चलती रहनी चाहिए, तथा भक्तों के दर्शनार्थ इसका व्यापक प्रचार- प्रसार भी होना चाहिए।
सदगुरूसदन गोलाघाट के महंत सियाकिशोरी शरण महाराज ने राम-नाम वृक्ष को साक्षात भगवान का स्वरूप बताया और कहा कि अयोध्या की पवित्र भूमि के कंण-कंण मे प्रभु का वास है। मठ-मंदिर हो या माता सरयू की पवित्र धारा या फिर पशु-पक्षी, जीव-जंतु सभी मे प्रभु का वास तथा सभी भगवान की उपस्थिति के संवाहक हैं। यह दिव्य दर्शनीय वृक्ष अयोध्या के लिए गौरव है।
विहिप केन्द्रीय प्रबंध समिति सदस्य पुरूषोत्तम नारायण सिंह ने ऐसे दुर्लभ वृक्ष की उपस्थित को कल्याणकारी और मंगलकारक बताया और कहा जो लोग तुष्टिकरण के कारण भगवान श्रीराम को काल्पनिक बताते रहे हैं, उन्हें अयोध्या की पवित्र धरती पर आकर इस पुण्यदायी वृक्ष को दिन में खुली आंखो से देखकर कर अपने पापों का प्रायश्चित करना चाहिए। उन्होंने सरकार से श्रीराम नाम अंकित वृक्ष को सुरक्षित, संरक्षित और क्षेत्र को विकसित करने की मांग उठाई है।
रामनाम अंकित वृक्ष के संरक्षण पर सरकार का विचार
उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री “केशव प्रसाद मौर्य” से वृक्ष के संबंध मे चर्चा की गई तो उन्होंने इसे प्रभु प्रदत्त चमत्कार बताया और कहा भारत की वसुंधरा अनेक चमत्कारों से परिपूर्ण है। अयोध्या तो साक्षात देव नगरी है।
उन्होंने कहा बीस वर्ष पूर्व अयोध्या मेरी कर्मस्थली थी तब मेरे संज्ञान मे ऐसे वृक्ष की चर्चा नही आई लेकिन अब ज्ञांत हुआ है,तो लॉकडाउन की समाप्ति के उपरांत ऐसे अद्भुत वृक्ष का दर्शन अवश्य करना शौभाग्य समझूंगा।
उन्होंने कहा श्रीराम की शक्ति-भक्ति अतुलनीय है।जब राम-नाम अंकित एक-एक शिला विशाल, सागर मे तैर कर, बांध का स्वरूप धारण कर सकती है,तो एक वृक्ष पर श्रीराम नाम का प्रकटीकरण उन्ही की लीला का अंग हो सकता है।
उन्होंने रामचरितमानस के शब्दों में नाम का उल्लेख करते हुये कहा
नहिं कलि करम न भगति बिबेकू। राम नाम अवलंबन एकू।। कालनेमि कलि कपट निधानू। नाम सुमति समरथ हनुमानू।। कलियुग में न कर्म है, न भक्ति है, और न ज्ञान ही है; रामनाम ही एक आधार है।कपट की खान कलियुग रूपी कालनेमि को (मारने के) लिये रामनाम ही, बुद्धिमान और समर्थ श्रीहनुमान जी हैं।यह राम नाम तो विजय महामंत्र है, यह उद्धारक है। सभी को इसका स्मरण करना चाहिए।
उन्होने कहा हमारी सरकार प्रारंभ से ही ऐतिहासिक पुरातात्विक साक्ष्यों को संरक्षण प्रदान करने हेतु संवेदनशील है। ऐसे दुर्लभ वृक्ष को हर प्रकार से स्थानीय जनप्रतिनिधयों वा प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत करने के उपरान्त संरक्षण संवर्धन किया जायेगा।





