राहुल की 5 कमजोरियों पर फोकस करके BJP ने बनाया 2019 का प्लान

लखनऊ. 2014 लोकसभा चुनावों में पहली बार राहुल गांधी को टक्कर देने के लिए बीजेपी ने स्मृति ईरानी को उतारा था। उनके कैम्पेन के लिए नरेन्द्र मोदी भी पहुंचे थे,हालांकि राहुल गांधी ने चुनाव जीतकर अपना दबदबा कायम रखा। स्मृति ईरानी 90 हजार वोटों से हार कर दूसरे नंबर पर रहीं। अब फिर बीजेपी ने राहुल को उनके तीन पीढ़ियों के गढ़ अमेठी में घेरने का दांव चल दिया है। जाहिरा कारण भले ही ये हो कि गुजरात में बीजेपी को घेर रहे राहुल वापस अमेठी लौटने को मजबूर होजाएं। इसके लिए बीजेपी ने राहुल की इन पांच कमजोरियों पर खास तौर से फोकस करने की रणनीति बनाई है।राहुल की 5 कमजोरियों पर फोकस करके BJP ने बनाया 2019 का प्लान

 #अमेठी को जागीर मान कर चलना
-राहुल गांधी अमेठी को अपनी जागीर मान कर चलते हैं। इसके बावजूद वह अमेठी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। किसी की डेथ में भी वह छह महीने बाद या कुछ दिनों बाद ही जब उनका दौरा होता है , तब वह वहां पहुंचते हैं।
-राहुल अमेठी दौरे पर हमेशा ही चुनिंदा जगह ही पहुंचते हैं। वह भी उनके कुछ खास लोग तय करते हैं, जबकि राहुल के उलट स्मृति ईरानी हर बार नए लोगों से मुलाकात करती हैं।
-राहुल गांव-गांव अमेठी में दौरा तो करते हैं, लेकिन कोई उनसे सुरक्षा व्यवस्था के चलते अलग से नहीं मिल सकता है।
-अमेठी राहुल का संसदीय क्षेत्र है, लेकिन कभी चार महीने पर, कभी छह महीने पर ही वह अमेठी में नजर आते हैं।
-यहां तक अमेठी का प्रशासन का काम भी उनकी वजह से इस जिले में नहीं दिखता है, जबकि इसके उलट इटावा भी वीआईपी सीट है, जहां विकास आसानी से देखा जा सकता है।
# पार्टी संगठन की अमेठी से दूरी
-राहुल गांधी जब भी अमेठी के दौरे पर आते हैं लखनऊ यूपीसीसी का कोई भी सदस्य वहां नहीं जाता है। सिर्फ एक या दो लोग उनके साथ होते हैं।
-राहुल के साथ कभी भी यूपी कांग्रेस से न तो प्रदेश अध्यक्ष जाता है, न ही कोई जनरल सेक्रेटरी अमेठी जाता है।
-पार्टी सूत्रों का कहना है कि जब उन्होंने संगठन को दूर किया है, तब संगठन वहां क्यों एक्टिव होगा।
-राहुल अमेठी दौरे को हमेशा ही निजी दौरा बनाकर चलते हैं, जबकि अन्य दौरों पर प्रदेश अध्यक्ष या अन्य पदाधिकारी नजर आते हैं।
# आम वर्कर्स से राहुल नहीं मिल पाते
-राहुल गांधी अमेठी में भले ही गेस्ट हाउस में स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनते हो, लेकिन वह अपने कुछ लोगों को छोड़ कर लोकल वर्कर्स का नाम तक नहीं जानते हैं।
-राहुल गांधी से वह वर्कर मिल भी नहीं सकता है. राहुल के प्रतिनिधि भी इस मामले में किसी की कोई मदद नहीं करते हैं।
-चूंकि राहुल से बुजुर्ग पीढ़ी अपना आत्मीय रिश्ता जोडती है, लेकिन यंग जनरेशन अब धीरे धीरे दूर होती जा रही है।
#डेवलपमेंट पर फोकस न करना
-राहुल गांधी के समय ही अमेठी के जगदीशपुर को इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव पास हुआ था ।
-लेकिन कुछ लोगों ने वहां जमीनों के नाम पर सरकार से सब्सिडी ली और फरार हो गए। अब खाली जमीने पड़ी हैं.
-जहां तक अमेठी के डेवलपमेंट का सवाल है, वहां शहर के बाहर और अंदरुनी इलाकों में सडकों की हालत कई सालों से खराब है।
-अगर राहुल अमेठी को अपनी जागीर मानते भी है तो उन्हें सांसद निधि के अलावा अन्य स्रोतों के जरिये भी अमेठी में काम कराना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
#चुनावी रणनीति में कमजोरी
-राहुल का फोकस सिर्फ अपनी संसदीय सीट पर ही है। वह अमेठी की विधानसभा सीटों पर फोकस नहीं कर रहे हैं।
-2012 विधानसभा चुनावों में सपा ने अमेठी में सेंध लगाई थी, इस बार भाजपा ने सेंध लगाई।
-2012 में जहां अमेठी में सपा ने वर्चस्व जमाया था। वहीं, 2017 में बीजेपी ने 4 में से 3 सीटें जीती हैं.
-अभी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के पुराने सदस्य तिलोई विधानसभा से विधायक डॉ मुस्लिम ने भी कांग्रेस छोड़ कर बसपा ज्वाइन कर लिया था। यह बताता है कि संसदीय क्षेत्र की विधानसभा के हिसाब से रणनीति पर राहुल कितना ध्यान देते हैं।

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2019 के लिए बीजेपी का है ये प्लान
सूत्रों का कहना, राहुल की कमजोरियों का चिन्हित करके 2019 के लोकसभा चुनाव तक उन्हें अमेठी में घेरेगी ।
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