अभी अभी: PM मोदी ने दिया बड़ा पंच, जम्मू और कश्मीर में भी लागू होगा GST


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बता दें कि जम्मू कश्मीर में GST को लागू करने के लिए राज्य की महबूबा मुफ़्ती सरकार एक जुलाई से पूर्व ही एक अध्यादेश ला सकती है। हालाँकि दो दिन पहले श्रीनगर में इस संबंध में बुलाई गई सभी दलों की बैठक का विपक्षी दलों नेशनल कांफ्रेस और कांग्रेस ने बहिष्कार कर दिया था इसलिए आपसी सहमति नहीं बन पायी है । इसके बाद अपने पत्ते खोलते हुए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल एन एन वोहरा से मिलकर बात चीत की है । उनकी मुलाक़ात के बाद जीएसटी को लागू करने पर चर्चा शुरू हो गयी है और इसके लिए अध्यादेश जारी होने की संभावनाओं को बल मिला है।
वहीं दूसरी तरफ़ जीएसटी पर सहमति बनाने के मकसद से बुलायी गयी बैठक का विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया। बता दें कि राज्य सरकार की तरफ से पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद मुजफ्फर हुसेन बेग की अध्यक्षता में ये बैठक बुलाई गई थी। यहाँ तक कि सरकार के वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू की तरफ से भी वीरवार को आल पार्टी कंसल्टेटिव ग्रुप के सदस्यों को निमंत्रण दिया गया था।
लेकिन बहिष्कार के बावजूद बैठक हुई और इस बैठक में बेग ने कहा कि रियासत में जीएसटी लागू करने के रास्तों में राजनीतिक सहमति के लिए और समय दिया जाना चाहिए। दूसरा राज्य विधायिका के पास ले जाने तथा तीसरा कैबिनेट से इस मामले में फैसला लेने को कहा। कहा कि इन तीनों विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
उधर विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस के संभागीय अध्यक्ष नासिर असलम वानी ने पीडीपी भाजपा गठबंधन सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने पूर्व बैठक में लिए गए फैसले कि ड्राफ्ट प्रस्ताव तैयार कर पार्टियों को उपलब्ध करवाया जाएगा, के बिना ही सर्वदलीय बैठक शनिवार को बुलाई। बैठक का न्योता दोपहर सवा बारह बजे नेकां नेताओं को हासिल हुआ। ड्राफ्ट प्रस्ताव के बिना बैठक का कोई औचित्य नहीं था। ऐसे में नेकां ने बैठक में जाना जरूरी नहीं समझा।
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बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने भी ड्राफ्ट प्रस्ताव के अभाव में बैठक में शामिल होने से मना कर दिया और भाग नहीं लिया । लेकिन अगर GST जम्मू और कश्मीर ने लागू होता है तो उसका सबसे बड़ा फ़ायदा भारत को मिलेगा क्यूँकि फिर केंद्र सरकार के पास राज्य से सम्बंधित सभी वित्तीय अधिकार आ जायेंगे । बताते चलें कि धारा 370 की वजह से अभी केंद्र के पास सब अधिकार नहीं हैं ।





