अब अपराध की जांच कर रहे प्रोफेसर: संभाल रहे साइबर; डीएनए और नारकोटिक्स केस

जम्मू-कश्मीर में फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की जांच व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग के अनुभवी प्रोफेसर की सेवाएं ली जा रही हैं। साइबर अपराध, डीएनए जांच और नशे जैसे संवेदनशील मामलों में इन विशेषज्ञों की तैनाती से फॉरेंसिक जांच और गुणवत्ता में सुधार लाया है।

एफएसएल में तकनीकी और अकादमिक विशेषज्ञता के उद्देश्य से गृह विभाग अलग-अलग विभागों से कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर लेता है। अकादमिक के साथ-साथ तकनीकी विशेषज्ञता होने के कारण उच्च शिक्षा विभाग के प्रोफेसर सबसे ज्यादा आवेदन करते हैं। इसी क्रम में एफएसएल में एक साल की प्रतिनियुक्ति पर पीएचडी डिग्रीधारी प्रोफेसरों को लाया गया। विभाग ने प्रतिनियुक्ति एक साल के लिए और बढ़ा दी है।

ये प्रोफेसर दे रहे सेवाएं:
जम्मू एफएसएल में डिप्टी डायरेक्टर एवं ऑफिसर इंचार्ज कुमार सौरभ साइबर एक्सपर्ट होने के साथ-साथ निदेशालय के वित्तीय व विकास कार्यों की निगरानी भी कर रहे हैं। डिजिटल उपकरणों, ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में उनकी विशेषज्ञता है। अंकुश कुमार उप निदेशक, नारकोटिक्स और केमिकल हैं। नशे से जुड़े मामलों में सैंपल की जांच और रिपोर्टिंग में भूमिका अहम रहती है। श्रीनगर में सैयद अशफाक मंजूर उप निदेशक तकनीकी एफएसएल हैं। काजी दानिश उप निदेशक जीव विज्ञान हैं और डीएनए व जैविक साक्ष्यों से जुड़े मामलों की जांच संभाल रहे हैं।

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