अपने औषधीय गुणों के लिए भी दुनियाभर में मशहूर है लौंग…

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे- कविता, गल्प, नाटक, चित्रकारी के साथ संगीत और नृत्य में भी उनकी असाधारण गति थी। उनकी एक रचना की पंक्ति है- ‘लवंग लता डोले!’ इसे सुनने से पहले हमारे लिए लवंग लता एक स्वादिष्ट मिठाई भर थी जिसके आवरण का अलंकरण एक जड़ाऊ लौंग करती थी।

जान पर खेलकर लाई गई लौंग

इतिहासकार बताते हैं कि मध्ययुगीन चीनी सम्राटों ने यह फरमान जारी किया था कि जो दरबारी उनके समीप खड़े रहते हैं वे लौंग का सेवन करें जिससे उनकी श्वास सुवासित रहे! सबसे अच्छी किस्म की लौंग दक्षिण पूर्व एशिया में मोलुक्का द्वीप समूह में मिलती है। उस पर डच उपनिवेशवादियों ने कब्जा करने के बाद लौंग के व्यापार पर एकाधिपत्य स्थापित कर लिया। लौंग की कीमतें चढ़ने लगीं। एक फ्रांसीसी तस्कर जान पर खेलकर इसके बीज रियूनियन द्वीप समूह तक ले आया, फिर वहीं इनकी खेती शुरू हो गई। भारत में केरल में अच्छी-खासी लौंग की पैदावार है। अतः हमें दूसरों पर काम निर्भर रहना पड़ता है।

कम मात्रा, बड़ा असर

लौंग की तासीर गर्म समझी जाती है। खुशबूदार गरम मसाले का यह अभिन्न अंग है। लौंग नमकीन और मीठे, लगभग सभी प्रकार के व्यंजनों में जान डालती है। कश्मीरी पंडित वाजवान में हींग, सौंठ, सौंफ के साथ-साथ लौंग की बड़ी अहमियत मानते हैं। केरल के मशहूर स्टू में सिर्फ लौंग, काली मिर्च तथा हरी इलायची का ही इस्तेमाल होता है। रतलाम शहर की मशहूर सेवों में लौंग की सेव का अलग स्थान है।

पश्चिमी खान-पान में भुने हुए मांसाहारी व्यंजनों में लौंग की कीलें लगाई जाती हैं तथा इंडोनेशिया में लौंग को अच्छी-खासी मात्रा में तंबाकू के साथ मिलाकर क्रोतोक नाम की सिगरेट का उत्पादन लंबे समय से किया जा रहा है। यह सुवासित चुरट बहुत मशहूर है। हल्दी, धनिया, जीरे की तुलना में लौंग महंगा मसाला है पर यह बहुत कम मात्रा भी अपना कमाल दिखा सकती है।

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