अजमेर दरगाह दीवान बोले- पत्थरबाजों से भी बड़े देशद्रोही हैं अलगाववादी नेता

अजमेर।सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन अली खान ने कहा कि कश्मीर के पत्थरबाजों से भी बड़े देशद्रोही अलगाववादी नेता हैं, जो इन्हें पत्थरबाजी के लिए उकसाते हैं और आतंकवादियों को भगाने में मदद करते हैं। और यह कहना है सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान का…

– दरगाह के दीवान का कहना है कि इन पर नकेल कसना जरूरी है। हिंसा किसी भी बात का हल नहीं हो सकती इसे सभी नेता बखूबी समझते हैं पर अपने निहित स्वार्थों के लिए अलगाववादी नेताओं के सुर में सुर मिलाने लगते हैं।
– दरगाह दीवान ने ख्वाजा साहब के धर्म गुरु हजरत ख्वाजा उस्मान हरवनी के उर्स के मौके पर कश्मीर के नौजवानों के नाम अपना पैगाम जारी किया।
– दरगाह दीवान ने ख्वाजा साहब के धर्म गुरु हजरत ख्वाजा उस्मान हरवनी के उर्स के मौके पर कश्मीर के नौजवानों के नाम अपना पैगाम जारी किया।
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– उन्होंने कहा कि कश्मीर के मीरवाइज जैसे नेता असल गुनहगार व देशद्रोही हैं, जो कश्मीरी युवकों को भड़का कर पाकिस्तान के मंसूबों को साकार कर रहे हैं।
– अगर भारत सरकार ऐसे अलगाववादी नेताओं पर नकेल डाल दे तो कश्मीर समस्या तुरंत हल हो जाएगी। कश्मीर में ऐसे बहुत लोग हैं जो सूफी मत का विस्तार चाहते हैं।
– संस्थागत समर्थन नहीं होने के कारण वे मजबूरन चुप रहते हैं और चरमपंथ के विस्तार का विरोध नहीं कर पाते।
– भारत सरकार को उग्रवाद आतंकवाद निरोधक अभियानों तथा पत्थरबाजों एवं राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के दमन के मामलों में किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहिए।
इस्लाम शांति का मजहब
– दीवान ने यह भी कहा कि इस्लाम एक ऐसा मजहब है, जो संपूर्ण मानव जाति के लिए प्रकाश स्तंभ के रूप में उभरा है।
– इस्लाम जाति एवं संप्रदाय के आधार पर भेदभाव के खिलाफ है तथा श्वेत अश्वेत सभी नस्लों के साथ समानता में विश्वास करता है।
– उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को समाज में व्यक्ति की हैसियत जाति एवं मत के आधार पर दुर्भावनाग्रस्त नहीं होना चाहिए, क्योंकि सारे इंसान आदम की औलाद हैं तथा यह तथ्य सारी शंकाओं को दरकिनार करते हुए यह स्थापित करता है कि इस्लाम एक शांति का मजहब है। यह प्रेम एवं शांति का प्रतिनिधित्व करता है और हर व्यक्ति को विश्व में दूसरों के लिए समस्या तथा अराजकता पैदा नहीं करनी चाहिए।
– अतः जो आतंक फैलाने में विश्वास करते हैं, उनका समाज में कोई स्थान नहीं है। वर्तमान परिवेश में देश भर में होने वाली आतंकी घटनाओं को इंगित करते हुए कहा कि इस्लाम विभाजन की इजाजत नहीं देता है और सभी की सलामती में विश्वास करता है।
– इस्लाम को बदनाम करने के लिए फैलाई जा रही अफवाहों से अलग इस्लाम का फैलाव अख्लाक, रहम, विश्व बंधुत्व तथा इसके अनुयायियों के बीच प्यार के आधार पर हुआ है।
– आज भारत में आईएसआईएस मॉडल कामयाब नहीं हो सका और न ही होगा, क्योंकि हिंदुस्तान के मुसलमान अलग स्वभाव के हैं।
– हिंदुस्तानी मुसलमान धैर्यवान संवेदनशील सहिष्णु है और वे भाईचारे में विश्वास करते हैं तथा यह मुस्लिम धर्मगुरुओं की जिम्मेदारी है कि वह आईएसआईएस और उसके दुष्प्रचार से संबंधित भ्रांतियों को दूर करें और साथ ही साथ अलगाववादी जैसे देशद्रोही लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने की अपील करें।





