हाउसिंग बोर्ड : 5 साल पहले एक मकान के 1000 आवेदक, आज कोई लेने वाला नहीं

जयपुर.राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने सबसे धनी उपक्रम के रूप में तो ख्याति हासिल कर ली, लेकिन आवासों को बेचने के मामले में बुरी तरह पिछड़ गया। कारण- हाउसिंग बोर्ड जो मकान बना रहा है वह गुणवत्ता में कमजोर हैं और कई निजी आवास योजनाओं से महंगे हैं। जितने में हाउसिंग बोर्ड का वन बीएचके आवास मिल रहा है, उससे सस्ता प्राइवेट बिल्डर्स बनाकर दे रहे हैं, वो भी क्लब हाउस की सुविधा के साथ।
हाउसिंग बोर्ड : 5 साल पहले एक मकान के 1000 आवेदक, आज कोई लेने वाला नहीं
हाउसिंग बोर्ड पिछले पांच सालों से लगातार आवास तो बनाता जा रहा, लेकिन जनता की मांग व आपूर्ति का अंदाजा नहीं लगा पाया। शुरुआत में एक-एक आवास के लिए बोर्ड को औसतन 1000 आवेदन मिले, लेकिन ग्राहक को बोर्ड संतुष्ट नहीं कर पाया। महंगे मंडल के पास सरप्लस आवासों की संख्या 22 हजार पार हो गई और 5875 आवास प्रोसेस में है। यानी करीब 28 हजार आवास बना दिए गए, लेकिन बेचे नहीं जा सके। इन आवासों की वर्तमान कीमत ही पांच हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है। जिन लोगों ने हाउसिंग बोर्ड के मकानों में आवेदन कर राशि जमा करा दी, वे भी रिफंड मांग रहे हैं। इस तर्क के साथ कि उन्हें हाउसिंग बोर्ड से अच्छा आवास निजी बिल्डर दे रहे हैं। हालांकि हाउसिंग बोर्ड लोगों का पैसा रिफंड नहीं कर रहा है।

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निर्माण पर रोक लगा दी
सरकार ने 24 मई 2016 को बोर्ड के नए निर्माण पर रोक लगा दी। 6 अक्टूबर 2016 को भूमि अवाप्ति पर भी रोक लगा दी। अब सीएम जन आवास शुरू करने की तैयारी कर ली है।
 
कमजोर नहीं, अच्छे मकान बनाए इसलिए महंगे हैं
मकानों की गुणवत्ता में कमी नहीं हैं, प्रॉपर्टी व मार्केट में मंदी की वजह से मकान नहीं बिक रहे हैं। हम खुद भी इसे लेकर चिंतित हैं। अफसरों से चर्चा भी की गई है कि मंदी में बचे हुए मकानों को किस तरह से बेचा जाए। बने हुए अच्छे हैं, इसलिए महंगे हैं। – कुंजबिहारी गुप्ता, कमिश्नर, हाउसिंग बोर्ड
 
इसी का नतीजा है- हाउसिंग बोर्ड की जमीन बिल्डरों को देगी सरकार
राज्य सरकार हाउसिंग बोर्ड की जमीन प्राइवेट डवलपर्स को सौंपेगी। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अलवर और अजमेर समेत कई जिलों में 5300 हैक्टेयर का लैंड बैंक है। इन प्रोजेक्ट्स की साइज न्यूनतम 5 हैक्टेयर से लेकर अधिकतम 10 हैक्टेयर की होगी।
हाउसिंग बोर्ड की ओर से यह प्रस्ताव शुक्रवार को यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में रखा जाएगा। ताजा प्रस्ताव के मुताबिक बिल्डर जो प्रोजेक्ट तैयार करेगा उसमें कुल निर्माण का 30 फीसदी हिस्सा मुख्यमंत्री जनआवास योजना व प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रावधानों के मुताबिक ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी के लिए रिजर्व रखा जाएगा तथा सरकार की ओर से तय दरों पर ही इसका बेचान होगा।
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