हल से हाईटेक तक…, नौकरी छोड़ खेतों में उतरे कार्तिक, ड्रोन से लिखी खेती की नई कहानी

भारत एक कृषि प्रधान देश है और इसकी उन्नति का आधार हमेशा से खेती रही है। समय के साथ खेती का तरीका भी बदल रहा है। पूर्णिया के खेतों में अब केवल हल-बैल या ट्रैक्टर की आवाज नहीं सुनाई देती, बल्कि आसमान में उड़ते ड्रोन नई कृषि क्रांति का संकेत दे रहे हैं। पूर्णिया के युवा और प्रगतिशील किसान कार्तिक किशोर इस बदलाव के प्रमुख चेहरे बनकर सामने आए हैं। वे आधुनिक उपकरणों की मदद से खेती को लाभ का व्यवसाय बना रहे हैं।

अब खेतों में उड़ रहा ड्रोन
जो ड्रोन पहले शादी-ब्याह और फिल्मों की शूटिंग तक सीमित थे, वे अब खेतों में दवा और खाद का छिड़काव कर रहे हैं। कार्तिक किशोर बताते हैं कि पहले कीटनाशक छिड़काव के लिए मजदूरों को घंटों तलाशना पड़ता था और पूरा दिन लग जाता था। अब वही काम ड्रोन से कुछ ही मिनटों में हो जाता है।

समय और पैसे की बचत
कार्तिक किशोर के अनुसार, ड्रोन तकनीक से सबसे बड़ा लाभ समय और लागत की बचत है। छिड़काव एक समान और सटीक होता है। इससे फसल के हर हिस्से को बराबर पोषण मिलता है और विकास भी समान रूप से होता है। वे कहते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार की कृषि हितैषी नीतियों के कारण ही आज ड्रोन जैसे महंगे उपकरण किसानों की पहुंच में आ रहे हैं। सरकार इन पर अनुदान दे रही है और प्रशिक्षण शिविरों के जरिए किसानों को प्रशिक्षित भी कर रही है।

विभाग भी दे रहा प्रोत्साहन
पूर्णिया के सहायक उपनिदेशक पौधा संरक्षण जय किशन कुमार ने कहा कि यह तकनीक भविष्य की जरूरत है। सरकार किसानों को जागरूक कर रही है। किसान इस सुविधा का लाभ लेने के लिए विभाग में आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इससे रसायनों का अनावश्यक खर्च कम होता है और किसान सीधे दवा के संपर्क में भी नहीं आता, जिससे उसका स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है।

नौकरी छोड़कर अपनाई खेती
कार्तिक किशोर पहले बेंगलुरु में एक बड़ी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करते थे। लेकिन खेती के प्रति लगाव और कुछ नया करने की इच्छा उन्हें गांव वापस ले आई। उन्होंने अपनी तीन एकड़ जमीन पर आधुनिक खेती शुरू की। आज वे उसी जमीन पर जैविक तरीके से 50 से अधिक किस्म के आम और अन्य फसलों की खेती कर रहे हैं। वे पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रहे, बल्कि जैविक खेती और नई तकनीकों को अपनाया। ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक से उनकी लागत कम हुई और उत्पादन बेहतर हुआ।

सरकार ने किया सम्मानित
कार्तिक किशोर के इस प्रयास को सरकार ने भी सराहा है। वर्ष 2025 में उन्हें बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और जिलाधिकारी के हाथों सम्मानित किया गया। आज कार्तिक किशोर सीमांचल के उन शिक्षित युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं, जो खेती को पिछड़ा हुआ काम मानते हैं। उनका मानना है कि अगर नई तकनीक और सही सोच के साथ खेती की जाए, तो यह भी एक सफल और सम्मानजनक व्यवसाय बन सकती है।

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