हरियाणा रोडवेज की बस में सफर करते हैं तो देखिए, ये खबर आपके लिए ही है

अगर आप हरियाणा रोडवेज की बस में सफर करते हैं तो ये खबर आपके लिए ही है। देखिए, कुछ नए नियम लागू हुए हैं।

दरअसल, अब हरियाणा रोडवेज की बसों में कंडक्टर खुले रुपयों के बदले टॉफियां नहीं दे पाएंगे। चूंकि, हरियाणा राज्य परिवहन निदेशालय ने रोडवेज बसों का किराया 5, 10 और 15 के राउंड फिगर में निर्धारित कर दिया है।
रोडवेज डिपो में ऐसा प्रावधान करने से अब यात्रियों को अपना बकाया लेने के लिए कंडक्टर से झगड़ा नहीं करना पड़ेगा। वहीं दूसरी तरफ कंडक्टरों को खुले रुपयों के झंझट से मुक्ति मिलेगी।
रोडवेज के डीआई कपूर चंद ने बताया कि हरियाणा के चंडीगढ़ निदेशालय में उच्चाधिकारियों व सरकार की मीटिंग हुई थी। जिसमें कंडक्टरों की खुले रुपयों के चक्कर में यात्रियों से झड़प के मामलों को कम करने के लिए हरियाणा रोडवेज बसों का किराया 5, 10 और 15 के राउंड फिंगर निर्धारित किया है।
जिससे कंडक्टरों को चिल्लर की समस्या से रोडवेज परिचालकों व यात्रियों को मिलेगी। किराये को पांच के गुणांक में निर्धारित किया गया है। यदि किराया पांच के गुणांक में ढाई रुपये से कम है तो बढ़ा हुआ किराया कम होगा और यदि यह ढाई रुपये से अधिक होगा तो यह कम हो जाएगा।
नियमानुसार यदि एक किलोमीटर पर 85 पैसे के हिसाब से 15 किलोमीटर यात्रा का किराया 12.75 रुपये निर्धारित था जिसके 13 रुपये वसूल किये जाते थे। लेकिन नए नियमानुसार ढाई के राउंड के कारण यह 13 से बढ़कर 15 रुपये लिया जाएगा।
यह आदेश जारी होते ही पांच रुपये के सिक्कों की डिमांड बढ़ेगी। रोडवेज कंडक्टरों व यात्रियों को खुल्ले के चक्कर में न पड़ने से पांच रुपये रखना अब अनिवार्य हो जाएगा। ताकि दोनों को खुंले के कारण दर-दर भटकना न पड़े। अब रोडवेज डिपो में एक और दो रुपये के सिक्के खत्म हो जाएंगे और पांच के सिक्के अधिक हो जाएंगे।
हरियाणा राज्य परिवहन निदेशालय ने रोडवेज बसों के किराए में नया संशोधन कर किराण् की नई सूची तैयार की है। जिसमें 5, 7, 10, 12 व 15 किलोमीटर पर सबसे अधिक चिल्लरों की आवश्यकता को खत्म कर यात्रियों और कंडक्टर के बीच होने वाली झड़प तो दूर हुई है। वहीं कुछ रूटों पर किराया कम हुआ है तो कुछ रूटों पर किराया बढ़ कर सामने आया है। छोटे रूटों पर चलने वाली गाडिय़ों में सबसे अधिक झड़प होती थी। जो इस संशोधन को करने के बाद चिल्लर को लेकर नहीं होगी।
सरकार का फैसला बिलकुल सही है। चूंकि अधिकतर यात्रियों के पास टिकट लेने के लिए खुले पैसे नहीं होते है। जिस कारण या तो कंडेक्टर को दो रुपये यात्री से कम लेने पड़ते थे या अधिक ले लेते थे। किराया राउंड फिंगर में होने के कारण कंडेक्टर और यात्री दोनों को राहत मिलेगी और न ही किराये को लेकर झगड़ा होगा।
– एके डोगरा, जीएम, रोडवेज पानीपत।





