सोलो डेट्स से लेकर ओपन किचन तक, रील की दुनिया छोड़ अब रियल लाइफ जी रही है Gen-Z

आज की पीढ़ी, जिसे हम जेन-जी कहते हैं, इंटरनेट और मोबाइल के बीच ही बड़ी हुई है। लेकिन अब यही पीढ़ी जानबूझकर अपनी डिजिटल स्क्रीन से दूरी बना रही है।

हाल ही में आई एक नई रिपोर्ट ‘टचिंग ग्रास 2026’ एक दिलचस्प बदलाव की ओर इशारा करती है। अब इंस्टाग्राम पर रील डालना उतना बड़ा सोशल स्टेटस नहीं रहा, जितना कि घर से बाहर निकलकर असल दुनिया को महसूस करना।

इस रिपोर्ट ने एक नया शब्द दिया है ‘गोइंग-आउट क्रेडिट स्कोर’। इसका मतलब है कि आप बाहर कितनी बार निकलते हैं और लोगों से कैसे मिलते हैं, यह अब आपकी जिज्ञासा और भावनात्मक मौजूदगी का पैमाना बन गया है। आइए समझते हैं कि फिटनेस से लेकर खाने की टेबल तक, इस पीढ़ी की पसंद में क्या बड़े बदलाव आ रहे हैं।

खाने में स्वाद से ज्यादा एहसास की तलाश
आजकल के 61% युवा ऐसे रेस्टोरेंट चुनना पसंद कर रहे हैं जहां ओपन किचन हो। उन्हें सिर्फ प्लेट में सजा हुआ खाना नहीं चाहिए, बल्कि वे शेफ को खाना बनाते देखना और उनसे बात करना चाहते हैं। इसे इंटरैक्टिव डाइनिंग कहा जाता है, जहां फोटो खिंचवाने से ज्यादा उस पल के अनुभव को महत्व दिया जा रहा है।

ग्रुप का इंतजार नहीं, सोलो डेट का बढ़ता क्रेज
एक दौर था जब अकेले कहीं जाना अकेलेपन की निशानी माना जाता था, लेकिन अब यह आत्मविश्वास का प्रतीक है। रिपोर्ट के अनुसार, 22% युवा अब अकेले ही म्यूजिक कॉन्सर्ट या इवेंट्स में जा रहे हैं। वे इस बात पर निर्भर नहीं रहना चाहते कि जब उनका पूरा ग्रुप फ्री होगा, तभी वे बाहर निकलेंगे। ‘मूड है तो जाओ’ वाला यह एटीट्यूड युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है।

अकेले जिम नहीं, अब ग्रुप वर्कआउट का जमाना
जिम की मशीनों पर अकेले पसीना बहाने के दिन अब पुराने हो रहे हैं। करीब 83% भारतीय जेन-जी अब कम्युनिटी फिटनेस क्लास जैसे रन क्लब, योगा ग्रुप और साइकलिंग कम्युनिटी को प्राथमिकता दे रहे हैं। यहां मुख्य उद्देश्य सिर्फ कैलोरी बर्न करना नहीं, बल्कि नए दोस्त बनाना और अपना नेटवर्क बढ़ाना है।

पार्टी के लिए अब शनिवार का इंतजार क्यों?
मनोरंजन के लिए वीकेंड का इंतजार अब खत्म हो रही है। लगभग 40% युवा अब सोमवार से गुरुवार के बीच यानी वीकडेज पर भी बाहर खाने और घूमने जा रहे हैं। सुबह की कॉफी मीट-अप और दोपहर के ब्रंच अब सोशल टाइम का जरूरी हिस्सा बन चुके हैं।

अजनबियों के बीच अपनापन
रिपोर्ट एक बेहद खास कॉन्सेप्ट के बारे में बताती है, जिसे एम्बिएंट बिलॉन्गिंग कहा गया है। यह एक ऐसा अहसास है जहां आप बिना किसी दबाव के किसी सोशल स्पेस का हिस्सा महसूस करते हैं। यहां अजनबियों से बात करना और पल को रियल रखना ही असली सुख है।

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