सुबह जल्‍दी उठने से आपका बच्‍चा हो सकता है डिप्रेशन का शिकार

kids2नई दिल्‍ली (20 सितंबर): सुबह-सुबह स्कूल के लिए बच्चों को तैयार करना। बच्चों को स्कूल भेजकर जल्दी-जल्दी ऑफिस जाना। ज्यादातर घरों में ये आम बात है, लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया कि आपका बच्चा कहीं स्कूल के चक्कर में कम नींद तो नहीं सो रहा। कहीं कम नींद का असर आपके बच्चे पर तो नहीं पड़ रहा। ये सवाल एक रिसर्च के बाद उठ रहे हैं। इस रिसर्च के मुताबिक सुबह-सुबह बच्चों को जल्दी स्कूल भेजने का डरावना पहलू भी है।

घड़ी की सुई पांच पर पहुंचते ही घर में बच्चों को तैयार करने की दौड़-भाग शुरू हो जाती है। वैसे तो जल्दी उठना सेहत के लिए अच्छा माना जाता रहा है लेकिन एक रिसर्च के बाद ये मांग उठ रही है कि बच्चों को स्कूल थोड़ा देर से शुरू हो ताकि उन्हें पूरी नींद मिले। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की इस रिसर्च के मुताबिक स्कूल का टाइम सुबह जल्दी होने से बच्चों को पूरी नींद नहीं मिल रही और उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।

ये स्टडी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ब्रिटिश वैज्ञानिक कैली ने की है। कैली ने ये रिसर्च बिट्रेन के बच्चों पर की है। रिसर्च के मुताबिक जल्दी स्कूल की वजह से बच्चे 10 घंटे से कम की नींद ले रहे हैं। जिससे उनमें कई बीमारियां होने का खतरा पैदा हो जाता है। ऑक्सफोर्ड की इस रिसर्च में ये भी बताया गया है कि बच्चों को कितनी नींद मिलनी चाहिए और उनका स्कूल समय क्या हो। रिसर्च के मुताबिक 8-10 साल की उम्र के बच्चों का स्कूल सुबह साढ़े 8 से होना चाहिए। 16 साल की उम्र के बच्चों के लिए स्कूल 10 बजे से होना चहिए और 18 साल के बच्चों के लिए स्कूल सुबह 11 बजे से होना चाहिए।

अब आपको बतातें है वो लक्षण जिनसे आप ये जान सकते हैं कि आपका बच्चा पूरी नींद ले रहा है या नहीं। कम नींद लेने वाले बच्चे दिन में आलसी से रहते हैं। ऐसे बच्चों में डिप्रेशन की शिकायत हो सकती है। सिरदर्द होना और पढ़ाई पर ध्यान न होना आम हो जाता है और स्कूल में बच्चे का परफॉर्मेंस खराब होता जाता है। स्टडी के मुताबिक आजकल बच्ची टीवी, कंप्यूटर और गेम की वजह से रात को देर से सो रहे हैं। इसलिए अगर आपका बच्चा स्कूल जाता है तो ये जरूर ध्यान रखे कि वो कितना सोता है। सवाल ये भी है कि क्या ऐसी रिसर्च के बाद भारत में स्कूलों का समय बदलेगा।

 

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