सीएम योगी का सख्त निर्देश: इन्वेस्टर्स समिट घपले में दोषियों से वसूली के साथ दर्ज होगी FIR

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन्वेस्टर्स समिट के दौरान सजावट में घपले के दोषी तत्कालीन उद्यान अधीक्षक धर्मपाल यादव समेत तीन कर्मचारियों को निलंबित करने के आदेश दे दिए हैं। धर्मपाल से 82 लाख रुपये वसूली करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा उप निदेशक के पद पर पदोन्नति पाने वाले धर्मपाल को पदावनत (रिवर्ट) करने का भी फैसला किया गया है। पर्यवेक्षण में लापरवाही के आरोप में तत्कालीन निदेशक, उद्यान समेत पांच अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस दिया जाएगा। 
पिछले साल फरवरी में हुई इन्वेस्टर्स समिट में कार्यक्रम स्थल इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान और राजधानी में फूलों से सजावट की जिम्मेदारी उद्यान विभाग को सौंपी गई थी। इसमें घपले की शिकायत पर अमर उजाला ने मामले को प्रमुखता से उठाया था। मुख्यमंत्री ने एपीसी प्रभात कुमार को जांच कराने के आदेश दिए। एपीसी ने जांच के लिए पीसीएफ के एमडी प्रमोद उपाध्याय और निदेशक वित्त आलोक अग्रवाल की कमेटी बनाई थी। कमेटी ने 39 पेज की अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में कुल 85 लाख 54 हजार 26 रुपये की शासकीय क्षति बताई गई। मनमाने ढंग से चहेतों को सजावट का ठेका देने की पुष्टि हुई। जांच में पता चला कि गमले भी बाजार दर से ज्यादा पर खरीदे गए थे।
एपीसी ने कड़ी कार्रवाई की सिफारिश के साथ रिपोर्ट मुख्य सचिव के माध्यम से सीएम को भेजी थी। इसमें बाकी बचा करीब 96 लाख रुपये का भुगतान ‘शून्य’ घोषित करने की संस्तुति की गई है। एपीसी ने तत्कालीन उद्यान अधीक्षक धर्मपाल यादव, उद्यान प्रभारी संजय राठी और लेखाकार किशोर पाठक को निलंबित करने के साथ ही उप निदेशक के पद पर प्रमोट हुए धर्मपाल की रिवर्ट करने की और उससे 82 लाख रुपये की वसूली की सिफारिश की थी।
इसी तरह से एपीसी ने उद्यान प्रभारी राठी से एक लाख रुपये की वसूली, तीनों दोषी कार्मिकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर और शिथिल पर्यवेक्षण के दोषी अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की थी। सीएम ने एपीसी की रिपोर्ट को यथावत स्वीकार करते हुए कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं। बता दें कि इन्वेस्टर्स समिट में कुल 2 करोड़ 48 लाख 197 रुपये का खर्च दिखाया गया था। इसमें से 1 करोड़ 51 लाख 91 हजार 815 रुपये का भुगतान कर दिया गया था। लेकिन घपले की शिकायत पर 96 लाख 10 हजार 158 रुपये का भुगतान रोक दिया गया था।





