सिर्फ औरत ही नहीं मर्द भी चाहते हैं न्यूक्लियर फैमिली ये है मुख्य बाते…

New Delhi : अक्सर महिलाओं पर यह इल्जाम लगाया जाता है कि घर से अलग होने की उतावली उन्हें ज्यादा रहती है। सच तो यह है कि एक वक्त के बाद पुरुष भी न्यूक्लियर फैमिली का ही विकल्प चाहते हैं।

ऐसे नहीं तोड़ना चाहिए किसी का दिल

कारण कि संयुक्त परिवार में उनकी आय और संपत्ति का वितरण योग्यता और परिश्रम के मुताबिक नहीं होता। फर्जों और दायित्वों के नाम पर उनसे सारी आर्थिक जिम्मेदारियों को ढोने की उम्मीद करते हैं, तिस पर उनकी व्यक्तिगत पसंद-नापसंद की उपेक्षा होती है। सामूहिकता के नाम पर एक ही लकड़ी से सबको हांकने की कोशिश होती है।
उनकी पत्नियों को यथोचित सम्मान और स्वतंत्रता नहीं मिल पाती। बड़े-बूढ़ों के लिहाज के नाम पर उन्हें दबे-सहमे रहना पड़ता है। लोग कहते हैं कि अक्सर शादी के बाद पति की स्थिति घरवालों और बीवी की उम्मीदों के कारण सैंडविच सी हो जाती है। हालांकि इसके लिए पति भी कम दोषी नहीं है।
दोनों पक्षों को नाराज नहीं करने के चक्कर में उनसे झूठी अपेक्षाएं करता है। वह दोनों को सच्चाइयों से अवगत नहीं करवाता। दोनों पक्षों को खुश रखने की कोशिश में ‘न’ कहने से बचता है।
डिसिजन मेकिंग पति के लिए सबसे अहम है। अगर उसे लगता है कि बीवी का दोष है तो उसे प्यार से समझाए, अगर मां गलत है तो उन्हें सम्मानपूर्वक जतला दे कि उनकी राय ठीक नहीं है।
न्यूक्लियर फैमिली को व्यक्ति के स्वतंत्र विकास का अवसर माना गया है और यह भी पाया गया है कि इसमें रहकर लोगों की आर्थिक स्थिति ज्यादा मजबूत हो गई क्योंकि परिवार को चलाने और घर के खर्चों को पूरा करने के लिए व्यक्ति पहले से ज्यादा मेहनत करता है।
न्यूक्लियर फैमिली पति-पत्नी के पुराने पारंपरिक रिश्तों से आगे निकलकर कंपैनियनशिप की बुनियाद पर चलता है क्योंकि दोनों को घर-बाहर एक दूसरे का बराबर सहयोग करना होता है।
खासतौर पर महिलाओं को अपने लिए सोचना चाहिए कि अगर उनकी आर्थिक स्थिति ठीक है तो वे घर के कामकाज के लिए नौकरानी रख सकती हैं। आज भी भारतीय पुरुषों के लिए पत्नी का मतलब किचन में खटती महिला से है जो उनके खाने की फरमाइशों को पूरा करती रहे। उन्हें अब इस सोच से आगे बढ़ना चाहिए। अगर वे अपने करियर में तरक्की चाहते हैं तो महिलाएं भी करियर की बुलंदी पर पहुंचना चाहती हैं।
न्यूक्लियर फैमिली तभी जरूरी होती है जब जॉइंट फैमिली में घर के सदस्यों को लगता है कि उनकी आजादी बाधित हो रही है। जब तक आपको लगता है कि आपके ससुराल का माहौल दमघोंटू और दमनकारी नहीं है, वहां आपको थोड़ी-बहुत छूट मिल सकती है तो ससुराल के साथ रहने में ही समझदारी है।
उससे आपको घर की देखभाल का बेवजह का तनाव नहीं झेलना पड़ेगा। निश्चिंत होकर बच्चों को उनके दादा-दादी के पास छोड़कर जा सकते हैं। मगर साथ रहते हुए यदि जरूरत से ज्यादा दखल और टेंशन पैदा हो रही है तो न्यूक्लियर फैमिली का ऑप्शन बुरा नहीं। ऐसी फैमिली में महिलाएं बेझिझक अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं।
अपनी मरजी से टाइम मैनेजमेंट करके अपने परिवार का ध्यान रखते हुए अपने स्वास्थ्य और रुचियों का भी ख्याल रख सकती हैं, जो कि अमूमन जॉइंट फैमिली में नहीं हो पाता।
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