साल 2026 में भी FPI का भारतीय बाजार से निकलना जारी

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने 2026 की शुरुआत सतर्क रुख के साथ की है। पिछले साल के अपने बिकवाली के सिलसिले को जारी रखते हुए उन्होंने जनवरी के पहले दो कारोबारी सत्रों में ही भारतीय इक्विटी मार्केट से 7,608 करोड़ रुपये निकाले। इससे पहले उन्होंने 2025 में 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी की थी। ऐसा अस्थिर मुद्रा, वैश्विक व्यापार तनाव, अमेरिकी शुल्क संबंधी चिंताओं और बाजार के बढ़े हुए मूल्यांकन के कारण हुआ।

रुपये में आई गिरावट

एफपीआई की बिकवाली के दबाव ने 2025 के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में हुई गिरावट में लगभग पांच प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में यह रुख बदल सकता है।

क्या कह रहे हैं जानकार?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि इस साल एफपीआई की रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि बेहतर होते घरेलू बुनियादी कारक निवेश को आकर्षित करना शुरू कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मजबूत जीडीपी वृद्धि और कॉर्पोरेट मुनाफे में सुधार की संभावना आने वाले महीनों में सकारात्मक एफपीआई प्रवाह के लिए शुभ संकेत है।

इन कंपनियों की मार्केट कैप बढ़ी

उधर इक्विटी बाजार में सकारात्मक रुझान के बीच पिछले सप्ताह शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में सात के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में 1,23,724.19 करोड़ रुपये का उछाल आया। इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे अधिक लाभ हुआ। पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 720.56 अंक या 0.84 प्रतिशत चढ़ा।
टॉप 10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, लार्सन एंड टुब्रो और हिंदुस्तान यूनिलीवर लाभ में रहे, जबकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इंफोसिस और बजाज फाइनेंस के मूल्यांकन में गिरावट दर्ज की गई।

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