साधारण रोगी जैसे होते हैं कोरोना वायरस के 81 फीसदी मरीज

-14 फीसदी थोड़े गंभीर तथा 5 फीसदी को ही जरूरत पड़ती है आईसीयू या वेंटीलेटर की
-योजना भवन में आयोजित वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग कार्यशाला में डॉ सूर्यकांत ने डॉक्‍टरों को सिखाया इलाज 

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो
लखनऊ। कोरोनावायरस के संक्रमण के कारण 81% रोगी साधारण रोगी होते हैं और उनको अस्पताल में भर्ती करना या आईसीयू जैसी जरूरत नहीं पड़ती है। 14% रोगी थोड़े गंभीर होते हैं लेकिन उनका भी उपचार साधारण अस्पतालों में किया जा सकता है, केवल 5% रोगी ही ऐसे होते हैं जिनको आईसीयू की जरूरत पड़ती है या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है।
यह जानकारी शुक्रवार को योजना भवन में आज उत्तर प्रदेश के चिकित्सकों के लिए आयोजित एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कार्यशाला में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनि‍वर्सिटी के पल्‍मोनरी विभाग के विभागाध्‍यक्ष ने देते हुए उन्होंने चिकित्सकों को बताया कि कोरोनावायरस के इलाज करते समय अपने को सुरक्षित रखते हुए गाइडलाइन के अनुसार उपचार करें। उन्‍होंने कहा कि इसकी मृत्यु दर भी केवल 2.5% होती है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश के समस्त जिला चिकित्सा अधिकारी एवं अन्य चिकित्सकों को कोरोना वायरस संक्रमण के गंभीर रोगियों के उपचार के बारे में चिकित्सकों को प्रशिक्षित करना था। डॉ सूर्यकांत ने अपना एक प्रस्तुतीकरण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उत्तर प्रदेश के समस्त चिकित्सकों को दिया। डॉ सूर्यकांत ने बताया की निमोनिया ए आर डी एस जैसी स्थितियां कोरोनावायरस के रोगी को गंभीर बनाती हैं, अगर कोरोनावायरस रोगी के सांस की गति 25 प्रति मिनट से ज्यादा है रोगी की नब्ज या दिल की गति 120 से ज्यादा है तथा रोगी का सिस्टोलिक ब्लडप्रेशर 90 से कम है तो रोगी को आईसीयू उपचार की आवश्यकता है तथा अगर बेहोशी या उसकी चेतना अवस्था में भी गिरावट आती है तो भी आईसीयू के उपचार की जरूरत पड़ सकती है, इन्हीं में से कुछ गंभीर रोगियों को वेंटिलेटर की जरूरत भी पड़ सकती है।
डॉ सूर्यकांत ने सभी चिकित्सकों को अपनी सुरक्षा बनाए हुए संकट की इस घड़ी में सभी रोगियों का संवेदना के साथ उपचार करने की अपील की और कहा किस संक्रमण के सभी बचाव तथा उपचार की गाइडलाइंस मौजूद है उनका पालन करें। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के कोरना संक्रमण के इंचार्ज डॉ विकासेंदु अग्रवाल तथा स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ मिथिलेश चतुर्वेदी तथा उनकी समस्त टीम मौजूद रही।

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