सभी पापों को हरने वाला है महाशिवरात्रि का व्रत: पंडित देसराज

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महाशिवरात्रि से एक दिन पूर्व समराला रोड स्थित गुग्गा माड़ी शिव मंदिर में पंडित देसराज शास्त्री ने श्रद्धालुओं को इस पर्व का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि देवों के देव भगवान भोले नाथ के भक्तों के लिए श्री महाशिवरात्रि का व्रत विशेष महत्व रखता है।सभी पापों को हरने वाला है महाशिवरात्रि का व्रत: पंडित देसराज

यह पर्व फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन का व्रत रखने से भगवान भोले नाथ शीघ्र प्रसन्न होकर उपासक की मनोकामना पूरी करते हैं। इस व्रत को सभी स्त्री-पुरुष, बच्चे, युवा व बुजुर्ग रख सकते हैं। विधि पूर्वक व्रत रखने और शिवपूजन, शिव कथा, शिव स्रोतों का पाठ करते हुए रात्रि जागरण करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। व्रत के दूसरे दिन ब्राह्माणों को यथा शक्ति वस्त्र-क्षीर सहित भोजन, दक्षिणा आदि प्रदान करके संतुष्ट किया जाता है।

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शिवरात्रि व्रत की महिमा

इस व्रत के विषय में यह मान्यता है कि इस व्रत को जो जन करता है, उसे सभी भोग की प्राप्ति के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत सभी पापों का क्षय करने वाला है और इस व्रत को लगातार 14 वर्षो तक करने के बाद विधि-विधान के अनुसार इसका उद्यापन कर देना चाहिए।

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महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प

व्रत का संकल्प सम्वत, नाम, मास, पक्ष, तिथि-नक्षत्र, अपने नाम व गोत्रादि का उच्चारण करते हुए करना चाहिए। महाशिवरात्रि के व्रत का संकल्प करने के लिए हाथ में जल, चावल, पुष्प आदि सामग्री लेकर शिवलिंग पर छोड़ दी जाती है।

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पूजन सामग्री

उपवास की पूजन सामग्री में जिन वस्तुओं को प्रयोग किया जाता है, उसमें पंचामृत (गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद व सुगंधित फूल, शुद्ध वस्त्र, बेल पत्र, धूपदीप, नैवेध, चंदन का लेप, ऋतुफल आदि। महाशिवरात्रि व्रत को रखने वाले जन को उपवास के

पूरे दिन भगवान भोले नाथ का ही ध्यान करना चाहिए। प्रात: स्नान करने के बाद भस्म का तिलक कर रुद्राक्ष की माला धारण की जाती है। इसके ईशान कोण दिशा की ओर मुख कर शिव का पूजन धूप, पुष्प आदि व अन्य पूजन सामग्री से पूजन करना चाहिए।

महाशिवरात्रि के दिन शिव अभिषेक करने के लिए सबसे पहले एक मिट्टी का बर्तन लेकर उसमें पानी भरकर पानी में बेल पत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग को अर्पित किए जाते हैं। व्रत के दिन शिवपुराण का पाठ सुनना चाहिए और

मन में असात्विक विचारों को आने से रोकना चाहिए। शिवरात्रि के अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेल पत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है।

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