सप्लाई-दाम पर नजर रखेगी टीम, ग्राहकों से फीडबैक लेंगे 175 अफसर

नई दिल्ली. जीएसटी लागू होने के बाद सरकार चीजों के दाम और उनकी सप्लाई पर नजर रखे हुए है। खास कर जरूरी और रोजाना इस्तेमाल की चीजों पर। राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 15 सचिवों की सेंट्रल मॉनिटरिंग कमेटी हर मंगलवार को स्थिति की समीक्षा करेगी। इसके अलावा 175 अधिकारियों की टीम जिलों पर नजर रखेगी। हर अधिकारी के जिम्मे 4-5 जिले होंगे। ये अधिकारी एडिशनल और ज्वाइंट सेक्रेटरी स्तर के हैं। निगरानी के लिए जिलों को 166 क्लस्टर में बांटा गया है। अफसरों से जरूरी चीजों की उपलब्धता और उनके दाम पर नजर रखने को कहा गया है। गुड्स की एंट्री पर टैक्स खत्म…
सप्लाई-दाम पर नजर रखेगी टीम, ग्राहकों से फीडबैक लेंगे 175 अफसर
 
– इस बीच, अढिया ने स्पष्ट किया कि स्थानीय निकायों के मंडी शुल्क और वाहन एंट्री शुल्क खत्म नहीं हुए हैं। जीएसटी के बावजूद ये लगते रहेंगे। गुड्स की एंट्री पर टैक्स खत्म हो गया है। मॉनिटरिंग पर सरकार की तरफ से नोटिफिकेशन भी जारी किया गया है। 
– इसके अनुसार ये अधिकारी उपभोक्ता, उपभोक्ता संगठन, बिजनेस एसोसिएशन, जिला प्रशासन आदि से रोजाना फीडबैक लेंगे। इसके लिए कॉल सेंटर, वेब पोर्टल, वीडियो कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जाएगा। ये कारोबारी के बिलिंग सॉफ्टवेयर की भी जांच करेंगे। 
– अगर कारोबारी ग्राहक से ज्यादा कीमत ले रहा है, तो उपभोक्ता मामले और राजस्व विभागों को तत्काल इसकी जानकारी देनी पड़ेगी।

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दिव्यांगों के इस्तेमाल की सभी चीजों पर 5% टैक्स लगेगा
– सरकार ने स्पष्ट किया है कि दिव्यांगों के इस्तेमाल की सभी चीजों पर सिर्फ 5% टैक्स लगेगा। ये प्रोडक्ट जिन मैटेरियल से बनते हैं, उनपर 18% टैक्स है। कंपनियां इसका क्रेडिट क्लेम कर सकती हैं। 
-जीएसटी कानून में यह प्रावधान भी है कि अगर इनपुट पर ज्यादा और प्रोडक्ट पर कम टैक्स है, तो निर्माता क्रेडिट का रिफंड भी क्लेम कर सकता है।
 
डायरेक्ट सेलिंग फेडरेशन की 18% जीएसटी हटाने की मांग
विभिन्न उत्पादों की सीधे उपभोक्ताओं को बिक्री करने वाले उद्यमियों के संगठन फैडरेशन आफ डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन ने सरकार से डायरेक्ट सेलिंग क्षेत्र पर 18 फीसदी जीएसटी हटाने की मांग की है। उसका कहना है कि जीवन बीमा एजेंटों को जिस प्रकार जीएसटी से छूट दी गई है उसी तरह उत्पादों की सीधे बिक्री करने वालों को भी जीएसटी से छूट दी जानी चाहिए।
 
आज से उपलब्ध होगा कंपोजीशन स्कीम चुनने का विकल्प, इनपुट डिस्ट्रीब्यूटर रजिस्ट्रेशन भी आज से
– जीएसटी नेटवर्क के पोर्टल पर बुधवार से कारोबारियों के लिए कंपोजीशन स्कीम चुनने का विकल्प उपलब्ध होगा। इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर (आईएसडी) के लिए भी रजिस्ट्रेशन बुधवार से शुरू होगा। 
-टीसीएस (टैक्स कलेक्शन एट सोर्स) और टीडीएस (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स) के लिए यह 20 जुलाई से शुरू होगा। जीएसटीएन के चेयरमैन नवीन कुमार ने यह जानकारी दी। 
– इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर कंपनी की अलग यूनिट के रूप में काम करेगा। सभी इनपुट क्रेडिट उसके पास आएंगे। वह अलग-अलग विभागों को उनकी एलिजिबिलिटी के हिसाब से क्रेडिट बांटेगा। 
– टीसीएस खास तौर से ई-कॉमर्स के लिए है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनी को सप्लायर को पेमेंट से पहले टीसीएस काटना है। हालांकि अभी इस प्रावधान पर अमल अभी टाल दिया गया है। टीडीएस सरकारी विभागों के लिए है।
 
सिर्फ 10 दिनों में हुए 3.58 लाख नए रजिस्ट्रेशन
– जीएसटीएन चेयरमैन ने बताया कि 25 जुलाई से अब तक 3.58 लाख नए रजिस्ट्रेशन हुए हैं। इस दौरान एक्साइज, सर्विस टैक्स और वैट के असेसी भी माइग्रेट हुए हैं। कुल मिलाकर करीब 68 लाख कारोबारियों का माइग्रेशन हो चुका है।
– सालाना 75 लाख रुपए तक टर्नओवर वाले कारोबारी कंपोजीशन स्कीम चुन सकते हैं। इसमें कंप्लायंस कम होगा, रिटर्न हर तिमाही भरना पड़ेगा।
– पूरे टर्नओवर पर टैक्स लगेगा। ट्रेडर को टर्नओवर पर 1%, मैन्युफैक्चरर को 2% और रेस्तरां को 5% टैक्स चुकाना पड़ेगा। सर्विस में रेस्तरां को इजाजत।
 
(भास्कर को कारोबारियों ने इनवॉयस के बारे में काफी सवाल भेजे हैं। इनमें से कुछ सवालों के जवाब यहां दिए जा रहे हैं)
Q. क्या रजिस्टर्ड कारोबारी अनरजिस्टर्ड कारोबारी को गुड्स या सर्विसेज की बिक्री कर सकता है?
A. हां। अनरजिस्टर्ड कारोबारी ने 50,000 रु. से ज्यादा का सामान खरीदा तो इनवॉयस पर उसका नाम-पता, राज्य का नाम-कोड और डिलीवरी की जगह लिखनी पड़ेगी। इससे कम का सामान खरीदने पर भी बिल पर नाम-पता लिखना होगा। अगर वह मांगता है तो इनवॉयस पर बाकी डिटेल्स लिखनी पड़ेगी।
Q. कारोबारी इनवॉयस की अलग-अलग सीरीज जारी कर सकता है?
A. कारोबारी अलग वित्त वर्ष के लिए अलग तरह के बिल बना सकता है। सीरियल नंबर 16 कैरेक्टर से अधिक नहीं होना चाहिए।
Q. कारोबारी को अभी तक जीएसटीआईएन नहीं मिला, तो बिल कैसे जारी किया जा सकता है?
A. बिल जारी कर सकते हैं। लेकिन जीएसटीआईएन मिलने के बाद संशोधित बिल बनाना पड़ेगा।
Q. बिल पर एचएसएन कोड लिखना होगा?
A. पिछले वित्त वर्ष 1.5 करोड़ तक टर्नओवर वालों के लिए जरूरी नहीं। इससे ऊपर 5 करोड़ तक के कारोबारियों को 2 डिजिट और 5 करोड़ से ज्यादा वालों को 4 डिजिट का कोड लिखना पड़ेगा।
 
कंज्यूमर: बीज पर टैक्स नहीं है, लेकिन कीटनाशक पर 18% टैक्स
Q. आइस ब्लॉक और दूसरी आइस पर कितना टैक्स है? आरओ का पानी खुला बेचता हूं, उस पर भी टैक्स है?
A.बर्फ पर 5% टैक्स लगेगा। खुले पानी पर कोई टैक्स नहीं है।
Q. जीएसटी में कौन से टैक्स शामिल नहीं हैं?
A.जमीन रजिस्ट्रेशन में लगने वाली स्टांप ड्यूटी, बिजली सेस, लोकल बॉडी का एंटरटेनमेंट टैक्स, प्रॉपर्टी टैक्स, रोड टैक्स, टोल टैक्स जीएसटी में बने रहेंगे।
Q. मैंने एक फ्लैट लिया है। उसकी रजिस्ट्री करवानी है। जीएसटी का रेट क्या होगा?
A. रेडी-टू-सेल फ्लैट खरीद रहे हैं तो उस पर जीएसटी लागू नहीं होगा। अंडर कंस्ट्रक्शन है तो 12% जीएसटी लगेगा।
Q. खेती के बीज व दवाइयों पर कितना जीएसटी लगेगा? ये अभी तक टैक्स फ्री थे हरयाणा में। क्या बीज व पेस्टिसाइड विक्रेता को भी जीएसटी नंबर लेना होगा?
A.बीज पर टैक्स नहीं है। कीटनाशक पर 18% टैक्स लगेगा। जहां तक जीएसटी नंबर की बात है, तो सालाना बिक्री 20 लाख रुपए तक है तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं। लेकिन इससे ज्यादा है तो लेना पड़ेगा।
Q. जिम के सामान पर 5.5% लगता था। जीएसटी में कितना टैक्स लगेगा? कुछ सामान चाइना से आयात होता है।
A. जिम की मशीनों पर 28% टैक्स लगेगा। जो मशीन चीन से इंपोर्ट होगी, उस पर इतनी ही आईजीएसटी के साथ कस्टम ड्यूटी भी लगेगी।
Q. मैं एक छोटा दुकानदार हूँ। स्कूल बैग व लेडीज पर्स बेचता हूँ। दैनिक बिक्री 1500 से 1800 रु के बीच है। क्या मुझे कभी-कभी दिल्ली से सामान लाने की इजाजत है? मेरी दुकान दादरी (हरियाणा) में है। कंपोजीशन स्कीम क्या है?
A. आप कहीं से भी सामान खरीद सकते हैं। इस पर कोई बंदिश नहीं। दूसरे राज्यों में सामान बेचते हैं तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। सालाना 75 लाख रुपए टर्नओवर वालों के लिए कंपोजीशन स्कीम है। इसमें तिमाही रिटर्न फाइल करना होगा। सिर्फ टर्नओवर बताना होगा। इनवॉयस की डिटेल नहीं देनी। लेकिन कोई इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा।
ट्रेडर: जितने राज्यों में कारोबार है, हर राज्य में अलग रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा
Q. मेरा टर्नओवर 15 लाख रुपए है। मैं जीएसटी में रजिस्ट्रेशन नहीं करता तो मुझे इनपुट क्रेडिट कैसे मिलेगा? मैं कस्टमर को बिल कैसे दूंगा?
A. इनपुट चाहिए तो रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा। बिल पर आपका जीएसटी नंबर, दुकान का नाम-पता आदि लिखना होगा। आम कंज्यूमर को बेचेंगे तो उसका नाम-नंबर भी। किसी कारोबारी को सामान बेचते हैं तो उसका जीएसटी नंबर बिल पर लिखना होगा।
Q. मैं दूसरे राज्य से माल लेता हूं। अब बड़ा व्यापारी बिना जीएसटी नंबर के माल देने से इनकार कर रहा है। सालाना बिक्री 12 लाख है। क्या करना चाहिए?
A. इस बारे में आपको थोक व्यापारी से बात करनी चाहिए। उनसे कहिए कि आपका सालाना टर्नओवर ज्यादा नहीं है, इसलिए रजिस्ट्रेशन नंबर जरूरी नहीं है।
Q. मेरा टर्नओवर 15 लाख है। जीएसटी में रजिस्ट्रेशन करा लिया है। तो क्या जीएसटी पोर्टल पर इनवॉयस लोड करनी होगी और रिटर्न भी भरना होगा?
A.कंज्यूमर को सामान बेचते हैं तो इनवॉयस की डिटेल नहीं देनी। टैक्स और रिटर्न भरना पड़ेगा।
Q. मेरा कॉस्मेटिक सामान का मैन्युफैक्चरिंग का काम है। माल दूसरे राज्य से आता है। जीएसटी नंबर ले चुका हूं और सालाना बिक्री 20 लाख से ज्यादा दिखाता हूं, पर बिक्री कम होती है। एक लोन लेने के लिए बिक्री ज्यादा दिखानी पड़ी थी। अब क्या मुझे जीएसटी भरना पड़ेगा और कितना?
A. टैक्स देना पड़ेगा। जिस प्रोडक्ट पर जितना टैक्स होगा, उतना लगेगा।
Q. मेरी दो फर्म हैं। एक राजस्थान और दूसरी गुजरात में। क्या मुझे दो जीएसटी नंबर लेने पड़ेंगे या एक नंबर से ही काम चलेगा?
A.जितने राज्यों में कारोबार करेंगे, हर राज्य में अलग रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा।
Q. मैं कंपोजीशन डीलर हूं। दूसरे राज्यों से सेमीफिनिश्ड गुड्स खरीदता हूं। अपने स्टेट में उस पर जॉब वर्क करवाता हूं। कब कितना टैक्स लगेगा?
A. सरे राज्यों से सामान खरीदने पर आईजीएसटी लगेगा। जॉब वर्क करने वाला अनरजिस्टर्ड है तो आपको रिवर्स चार्ज में टैक्स चुकाना पड़ेगा। कंपोजीशन वाला कारोबारी अपने सामान की बिक्री पर किसी से टैक्स नहीं ले सकता। उसे टैक्स क्रेडिट भी नहीं मिलेगा। टैक्स पूरे टर्नओवर पर लगेगा।
Q. दूसरे राज्यों को सर्विसेज की सप्लाई करता हूं। क्या मेरे लिए 20 लाख रुपए की छूट सीमा मान्य होगी?
A. नहीं। दूसरे राज्यों में गुड्स या सर्विसेज की सप्लाई करने के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन जरूरी है। भले ही आपका बिजनेस 20 लाख रुपए से कम हो।
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