सच: पहले रखा 9 दिन भूखा-प्यासा, फिर धकेला सूखे कुएं में, अंत में पेड़ पर 10 दिन तक लटकी रही लाश
जयपुर/भीलवाड़ा.करेडा तहसील के उदलपुरा गांव की गीता बलाई की जिंदगी उसी के परिजनों ने छीन ली। पति के मंदबुद्धि होने के कारण घर और खेती का सारा काम गीता संभाल रही थी जो शायद उसकी जेठानी को पसंद नहीं आया। गीता पर डायन होने का आरोप लगाकर वह उसे धनोप माता मंदिर ले गई जहां नवरात्र में उसे 11 दिन तक भूखा-प्यासा रखा गया। कुएं पर पानी पीने गई तो धक्का देकर भीतर धकेल दिया। सूखे कुएं में एक पेड़ पर गीता का शव दस दिन तक अटका रहा।
जेठानी ने गांव पहुंचकर उसे चरित्रहीन बताते हुए यह प्रचारित कर दिया कि वह तो कहीं भाग गई। गीता के भाई बालू ने उसकी गुमशुदगी का मामला भी दर्ज कराया, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। हारकर उसने जाति पंचायत बुलाई जिसमें गीता की जेठानी पर उसकी हत्या का आरोप लगाया। जेठानी ने पंचायत में तो उसे मारने की बात कबूल ली लेकिन पुलिस के सामने वह मुकर गई।
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कुएं पर चील-कौवें मंडराने लगे तब गीता की लाश का पता चला। आज तक पुलिस ने इस मामले में किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। हैरानी देखिए…इस मामले में आरोपी अपना गुनाह भरी पंचायत में कबूल कर चुकी थी। पुलिस उसके खिलाफ कोई सबूत ही नहीं जुटा पाई।





