संत और गो सेवा के लिए बेची 200 करोड़ की संपत्ति, स्वामी हरीश्वरानंद के प्रपौत्र ने बताया अनोखा किस्सा

संगम की धरा पर दान-पुण्य का सिलसिला अनवरत जारी है। यहां एक ऐसा मठ भी डेरा जमाए है, जिसके किस्से सुनकर आप हैरान हो जाएंगे। इस मठ ने संतों और गाय की सेवा के लिए तकरीबन 200 करोड़ की संपत्ति बेच दी थी।
सेक्टर-6 स्थित श्री स्वामी डूंग जी महाराज संस्थान (भूरा मठ) के संचालक और दंडी समाज के प्रवक्ता विद्यामार्तंड अरविंद स्वामी जोशी बताते हैं कि उनका मठ पिछले 134 वर्षों से संपूर्ण पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में अन्नक्षेत्र का संचालन कर रहा है। इस समय माघ मेला में अन्नक्षेत्र का संचालन किया जा रहा है।
इसमें बड़ी संख्या में संतों व गरीब-असहायों को भोजन प्रसाद वितरित किया जाता है। वह बताते हैं कि यह संस्कार उन्होंने अपने बाबा स्वामी हरीश्वरानंद तीर्थ (हुकुमानंद जी) से प्राप्त किया।
106 वर्ष के जीवनकाल में स्वामी हरीश्चरानंद तीर्थ ने गोवंश की हत्या रोकने के लिए अपने सभी आश्रमों को बेच दिया। इसमें काशी में आश्रम के पांच भवनों के साथ चित्रकूट, हरिद्वार, बृजघाट, कोलकाता, रिसड़ा और प्रयागराज के आश्रम शामिल हैं।
प्रयाग से जाते हैं खाली हाथ
स्वामी अरविंद बताते हैं कि वह हर वर्ष तंबुओं की नगरी में शिविर लगाते हैं। इस बीच वह प्रतिदिन भव्य तरीके से अन्नक्षेत्र का संचालन करते हैं। आखिरी दिन वह स्वच्छता कर्मियों को भोजन कराते हैं और उन्हें अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित करते हैं। फिर शिविर में बचे हुए सामान को यहीं पर गरीबों के बीच दान कर गंगा मैया से आशीर्वाद लेकर रवाना हो जाते हैं।





