संतान होने का सुख नहीं मिल रहा तो जांच करायें, इसकी वजह टीबी तो नहीं?

स्‍टडी के अनुसार महिलाओं में बांझपन के लिए 60 फीसदी जिम्‍मेदार होती है टीबी
सिर्फ फेफड़ों की ही नहीं जननांगों सहित अन्‍य अंगों में भी होती है टीबी

लखनऊ। क्षय रोग केवल फेफड़ों को ही नही शरीर के किसी भी अंग और किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। क्षय रोग की वजह से महिलाओ में बांझपन की समस्या आ रही है। एक स्‍टडी में देखा गया है कि बांझपन की शिकार 60 से 80 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन का कारण टीबी पाया गया है। जननांग अंगों के क्षय रोग का शुरूआती अवस्था में पकड़ना मुश्किल होता है। क्षय रोग के कारण बांझपन के जो लक्षण महिलाओं में पाये जाते हैं उनमें समय से माहवारी न होना, जननांग से रक्‍त मिश्रित स्राव होना तथा सम्‍भोग के समय दर्द होना मुख्‍य हैं।
 
यह जानकारी आज शनिवार 23 मार्च को यूपी प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में टीबी विशेषज्ञों ने दी। प्रेस वार्ता का आयोजन कल 24 मार्च को होने वाले वर्ल्‍ड टीबी डे के अवसर पर किया गया था। इस पत्रकार वार्ता में एरा मेडिकल कॉलेज के डॉ राजेन्‍द्र प्रसाद, केजीएमयू के पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के डॉ आरएएस कुशवाहा, डॉ वेद प्रकाश, डॉ राजीव गर्ग उपस्थित थे। विशेषज्ञों ने टीबी मुक्त भारत के सपने को 2025 तक साकार करने के लिए आवश्‍यक कार्य योजना पर प्रकाश डाला गया।
 
विशेषज्ञों के बताया कि महिलाओं में क्षय रोग से जो जननांग ग्रस्‍त हो जाते हैं उनमें फैलोपियन ट्यूब 95 से 100 प्रतिशत तक,    यूटेराइन इन्डोमैट्रियिम 50 से 60 प्रतिशत तक, ओवरी 20 से 30 प्रतिशत तक, सर्विक्स 5 से 15 प्रतिशत तक, मायोमैट्रियिम 2.5 प्रतिशत तक, वैजाइना 1 प्रतिशत तक। डॉ वेद ने बताया कि 90 प्रतिशत जननांगों का क्षय रोग 15 से 40 साल की महिलाओं में पाया जा रहा है। विगत वर्षो में जननांगों का क्षय रोग 10 प्रतिशत से बढकर 30 प्रतिशत हो गया है।
 
विशेषज्ञों ने बताया कि इसी प्रकार पुरुषों में भी इनफर्टिलिटी की समस्‍या टीबी के कारण पायी गयी है। पुरुषों में इस टीबी के होने के लक्षणों में स्खलन ना होना, स्‍पर्म की संख्‍या में कमी तथा पिटयूटरी ग्‍लैंड में समस्‍यायें होती हैं। पुरुषों में क्षय रोग सें ग्रसित होने वाले जननांग एपिडिमों-आरकाइटिस। मूत्रनलिका का बंद होना पाया गया है। बच्चों में होना वाला क्षय रोग उनके विकास को भी प्रभावित करता है।
 
क्षय रोग आज सम्पूर्ण विश्‍व में 10 प्रमुख मृत्यु की जिम्मेदार बीमारियों में से एक है। 2017 में एक करोड़ लोग क्षय रोग से प्रभावित हुए जिसमें 16 लाख लोगों की मृत्यु हो गयी। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर 10 लाख बच्चे भी क्षय रोग से प्रभावित थे।
 
टीबी के बैक्टीरिया श्वांस द्वारा शरीर में प्रवेश करते हैं और रोगी के खांसने, बात करने, छींकने, थूकने से दूसरे लोगों में इसका संक्रमण हो जाता है। इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि मरीज के मुंह पर कपड़ा या मास्क रखा जाय और होने वाले संक्रमण से बचा जाये। सामान्‍य तौर पर टीबी फेफड़ों की होती है, इसके लक्षणों की अगर बात करें तो दो हफ्ते से ज्यादा तक खांसी का आना, बलगम आना,     बलगम के साथ रक्त आना, सीने में दर्द, बुखार आना, भूख एवं वजन तेजी से कम होना हैं।
 
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के आधार पर 2017 में 5 लाख 58 हजार रिफैंम्पिसिन रजिस्‍टैन्ट मरीज पाये गये, जिसमें से 82 प्रतिशत एमडीआर के मरीज थे। विश्‍व  में टीबी इंसीडेंस 2 प्रतिशत की दर से घट रहा है। टीबी रोग को समाप्त करने के लिए टीबी इंसीडेंस को 2020 तक 4 से 5 प्रतिशत की कमी तक ले जाने की आवश्‍यकता है।

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