श्रीनगर: केंद्र सरकार ने शंकराचार्य मंदिर रोपवे परियोजना को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने श्रीनगर स्थित शंकराचार्य मंदिर तक श्रद्धालुओं की सुगम पहुंच के लिए पर्वतमाला योजना के तहत 126 करोड़ रुपये की लागत से रोपवे निर्माण को मंजूरी दी है।
श्रीनगर के प्रसिद्ध शंकराचार्य मंदिर को रोपवे से जोड़ने की प्रक्रिया तेज हो गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की पर्वतमाला योजना के तहत इस परियोजना को मंजूरी मिल गई है। सरकार ने शंकराचार्य मंदिर रोपवे को प्रयागराज के संगम रोपवे के साथ ही टेंडर प्रक्रिया के लिए प्रस्तावित कर दिया है।
इन दोनों परियोजनाओं की कुल लंबाई 3.25 किलोमीटर होगी, इसमें शंकराचार्य मंदिर तक बनने वाला रोपवे एक किलोमीटर से अधिक लंबा होगा। इस परियोजना पर केंद्र सरकार 126 करोड़ रुपये खर्च करेगी। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के अलावा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में भी पर्वतमाला योजना के तहत रोपवे निर्माण को मंजूरी दी है।
इस योजना का उद्देश्य दूरस्थ धार्मिक स्थलों तक पहुंच को आसान बनाना है। शंकराचार्य मंदिर, जो श्रीनगर में एक हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है, में फिलहाल गर्भगृह तक पहुंचने के लिए 244 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। रोपवे बनने के बाद श्रद्धालुओं के लिए यात्रा सुगम हो जाएगी।
इस परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर पूरा किया जाएगा। केंद्र सरकार ने पहले ही हिमाचल प्रदेश के बिजली महादेव, हरियाणा के दोशी और मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर मंदिर के लिए रोपवे प्रोजेक्ट आवंटित कर दिए हैं। इसके अलावा, सोनप्रयाग-केदारनाथ, गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब (उत्तराखंड), कामाख्या मंदिर (असम), तवांग मठ (अरुणाचल प्रदेश), काठगोदाम-हनुमानगढ़ी मंदिर (उत्तराखंड), रामटेक गढ़ मंदिर (महाराष्ट्र) और ब्रह्मगिरि-अंजनेरी (महाराष्ट्र) सहित सात अन्य प्रोजेक्ट के टेंडर आमंत्रित किए गए हैं।
शंकराचार्य मंदिर रोपवे का निर्माण आगामी डेढ़ साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में काफी सुविधा होगी। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस परियोजना को शीघ्र शुरू करने के लिए टेंडर प्रक्रिया तेज कर दी है।
भगवान शिव को समर्पित है मंदिरश्रीनगर का शंकराचार्य मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर की स्थापना 371 बीसी में राजा गोपादात्या ने की थी। मंदिर के कपाट सुबह साढ़े सात बजे से शाम साढ़े चार बजे तक खुले रहते हैं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढि़यां माध्यम हैं लेकिन अब केंद्र सरकार रोपवे से मंदिर को जोड़ने जा रही है।





