शादीशुदा और कुंवारी महिलाएं किस हाथ में बंधवाएं कलावा

सनातन धर्म में पूजा-पाठ या किसी अनुष्ठान के दौरान कलाई पर कलावा बांधने का विधान है। शास्त्रों में कलावा बांधने के नियम के बारे में बताया गया है। कलाई पर कलावा बांधने के लिए शादीशुदा और कुंवारी महिलाओं के लिए नियम अलग-अलग होते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलावे को कलाई पर बांधने से व्यक्ति के चारों ओर एक सकारात्मक ऊर्जा का घेरा बन जाता है और जीवन में आने वाले संकटों से बचाव होता है, क्योंकि कलावा के धागों में त्रिदेव और मां सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती का वास माना गया है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि कलावा बांधने के नियम के बारे में।

किस हाथ मे बांधें कलावा?
कलावा कुंवारी कन्याओं को दाहिने हाथ की कलाई पर बंधवाना चाहिए। वहीं, शादीशुदा महिलाओं के लिए बाएं हाथ की कलाई में कलावा बंधवाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलाई पर कलावा होने से जीवन में शुभ परिणाम देखने को मिलते हैं। इसके अलावा पुरुषों को दाहिने हाथ में कलावा बंधवाना चाहिए।

क्या है कलावा बांधने का सही तरीका
कलावा बंधवाने के दौरान सिर पर रुमाल या पल्लू रखना चाहिए। कलावा बंधवाते समय सिर पर रुमाल या पल्लू न होने से कलावा बंधवाना शुभ नहीं माना जाता।
कलावा बंधवाने के दौरान मुट्ठी बंद होनी चाहिए और उसमें चावल, पुष्प या दक्षिणा जरूर होनी चाहिए। भूलकर भी खाली हाथ कलावा नहीं बंधवाना चाहिए।
कलावा बंधवाते समय पुरोहित के द्वारा मंत्रों का जप किया जाता है।
कलाई पर कलावा 3, 5 या 7 बार लपेटना बेहद शुभ माना जाता है।

कलावा उतारने के नियम
अगर आपका कलावा पुराना हो गया है, तो तोड़ कर भूलकर भी नहीं उतारना चाहिए। कलावे को खोलकर ही उतारना चाहिए।
मंगलवार या शनिवार का दिन कलावा उतारने के लिए शुभ माना जाता है।
उतारे गए कलावे को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करना चाहिए। पुराने कलावे को इधर-उधर फेंकने से बचना चाहिए। इसके बाद नया कलावा कलाई पर बंधवाएं।
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कलाई पर कलावा होने से क्या होता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलाई पर कलावा होने से व्यक्ति नकारात्मक विचारों से दूर रहता है और उसके आस-पास एक सकारात्मक ऊर्जा का घेरा बना रहता है, जिससे सारी बाधाएं दूर रहती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलाई पर कलावा होने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
इसके अलावा व्यक्ति पर ब्रह्मा, विष्णु, महेश और माता लक्ष्मी, पार्वती व सरस्वती की कृपा बनी रहती है, जिससे जीवन में कोई संकट नहीं आता।

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