गोबर के गोदाम वाले अस्पताल का बड़ा वायरल सच आया सबके सामने

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के जरिए दावा है कि एक अस्पताल को गोबर का गोदाम बना दिया गया है. एक अस्पताल जहां लोगों का इलाज नहीं होता बल्कि लोग यहां गोबर के उपले रखते हैं.

गोबर के गोदाम वाले अस्पताल का बड़ा वायरल सच आया सबके सामने क्या है गोबर के गोदाम वाले अस्पताल का वायरल सच

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो मिनट 50 सेकेंड के एक वीडियो में शुरू में सब सामान्य लगता है, लेकिन वीडियो आगे बढ़ने के साथ-साथ कहानी भी आगे बढ़ती है. कुछ कमरे हैं. कमरों में ताले लगे हैं, लेकिन 2 मिनट के बाद जो नजारा दिखता है वो हैरान करने वाला है. एक इमारत के बाहर खुली जगह में गोबर के उपले रखे दिखाई दे रहे हैं.

एक कमरे के बाहर बनी सीढ़ियों के पास जमीन पर गोबर के उपलों का ढेर दिखाई देता है. वीडियो बनाने वाला शख्स सीढ़ियों की तरफ आगे बढ़ता है तो कमरे के अंदर भी उपलों का ढेर नजर आता है.

दावा है कि ये वीडियो उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगपुरा गांव का है. वीडियो में आधी-अधूरी बनी दिख रही इमारत को एक सरकारी अस्पताल बताया जा है. वीडियो के साथ एक मैसेज भी है जिसमें लिखा है, ‘’10 सालों से बंद पड़ा ये सरकारी अस्पताल जिसमें लोग गोबर रखते हैं और हर साल इसमें काम होता है.’’

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दिल्ली से 944 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के बलिया जिले पहुंचकर नगपुरा गांव में गोबर के गोदाम वाले अस्पताल के बारे में तहकीकात शुरु की. हमें इस गांव में गुलाबी रंग की वो इमारत दिखाई दी जिसे वायरल वीडियो में सरकारी अस्पताल बताया गया था. इमारत के बाहर एक बोर्ड भी था जिसमें लिखा था-

‘’प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगपुरा, बलिया का शिलान्यास माननीय श्री घूरा राम जी विधायक एवं पूर्व स्वास्थ्य राज्य मंत्री (उ.प्र) के कर कमलों द्वारा दिनांक 15-6-2008 दिन रविवार को सम्पन्न हुआ.’’

ये बोर्ड इस बात की गवाही दे रहा था कि अस्पताल का शिलान्यास 9 साल पहले साल 2008 में हुआ था. हम अंदर पहुंचे तो देखा कुछ कमरों में ताला लटक रहा था तो कई कमरों में गोबर के उपले रखे गए थे. सिर्फ कमरों को ही नहीं खुली जगह को भी गोबर के उपले रखने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था.

नगपुरा गांव के प्रधान ने बताया कि अस्पताल में कभी-कभी तो काम चलता है लेकिन कई महीनों के लिए रुक भी जाता है. यही वजह है कि गांववालों को इलाज के लिए 10-12 किलोमीटर दूर के अस्पताल में जाना पड़ता है.

बलिया के गांव में शुरू हुई पड़ताल में हम इस वीडियो को वायरल करने वाले शख्स तक भी पहुंच चुके थे. ये वीडियो गांव के ही विनय कुमार सिंह ने वायरल किया था.

विनय कुमार सिंह ने बताया, ‘’हर साल मेनटेनेंस का खर्च आता है. लोगों को इलाज के लिए 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. लोग यहां अब गोबर रखते हैं. इस वीडियो को इसलिए वायरल किया है कि आपके माध्यम से इसे चलाया जाए. उद्देश्य यही था कि इस अस्पताल को जल्द से जल्द शुरु किया जाए.’’

एक इमारत जो गांव के लिए उम्मीद बनकर 9 साल पहले शुरू हुई थी वो अब भी आधी अधूरी है. ये कब पूरी होगी इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है.

 

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