लोकसभा चुनाव 2019 के लिए ये रहा AAP सरकार का मास्टर स्ट्रोक

स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करवाने के लिए आंदोलन कर रहे किसानों को दिल्ली सरकार से राहत मिल सकती है। इसके लागू होने के बाद किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। किसानों को राहत देने के लिए सब्सिडी का भी एलान किया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो विकास विभाग इस संबंध में काम कर रहा है। कहा यह भी जा रहा है कि यह लोकसभा चुनाव 2019 के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) का मास्टर स्ट्रोक भी हो सकता है।






स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट हो सकती है लागू
मुख्यमंत्री केजरीवाल के निर्देश पर किसानों को राहत देने की तैयारी चल रही है। संभावना है कि विकास मंत्री गोपाल राय सोमवार को इस संबंध में ठोस नीति का एलान कर सकते हैं। वहीं विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में 10 हजार से ज्यादा किसान हैं।
नरेला, नजफगढ़ अनाज मंडी में हर साल करीब 70 हजार टन अनाज आता है। इसमें अधिकतर किसान दिल्ली के होते हैं। इसके अलावा आजादपुर, केशोपुर, ओखला सब्जी मंडी सहित अन्य मंडियों में भी दिल्ली के किसान अपनी फसल बेचने जाते हैं। इन किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष पैकेज का एलान हो सकता है।
बता दें कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री के निर्देश पर फसल नष्ट होने पर किसानों को देश में सबसे ज्यादा 20 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने की घोषणा की थी।
यह है स्वामीनाथन रिपोर्ट
गौरतलब है कि अनाज की आपूर्ति को भरोसेमंद बनाने और किसानों की आर्थिक हालत को बेहतर करने के मकसद से 18 नवंबर, 2004 को तत्कालीन केंद्र सरकार ने एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया गया था। आयोग ने पांच रिपोर्ट सौंपी थीं।
स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट में भूमि सुधारों को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। अतिरिक्त और बेकार जमीन को भूमिहीनों में बांटना, आदिवासी क्षेत्रों में पशु चराने का हक देना आदि है। आयोग की सिफारिशों में किसान आत्महत्या की समस्या के समाधान, राज्य स्तरीय किसान कमीशन बनाने, सेहत सुविधाएं बढ़ाने और वित्त-बीमा की स्थिति पुख्ता बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। यदि इसे लागू किया जाए तो किसानों की स्थिति में काफी सुधार की संभावना है।
स्वामीनाथन आयोग को निम्न मुद्दों पर विचार करने के लिए कहा गया है
1. सभी को सार्वभौमिक खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए एक ऐसी रणनीति बनाना जिससे कि देश में खाद्य और पोषण सुरक्षा को बढाया जा सके
2. देश में कृषि की उत्पादकता, लाभप्रदता में वृद्धि करना
3. सभी किसानों के लिए ऋण की उपलब्धता बढ़ाना
4. शुष्क और अर्ध शुष्क क्षेत्रों, पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों में किसानों के लिए विशेष कार्यक्रम को तलाशना
5. कृषि उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने और लागत को कम करने के उपाय सुझाना ताकि उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके
6. किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए कोई उपाय सुझाना