लॉकडाउन में घर-घर आए राम, गूंजा ‘मंगल भवन अमंगल हारी…’

 
तीन पीढ़ियों ने एक साथ बैठकर टीवी पर देखी रामायण
महान संगीतकार-गीतकार रविंद्र जैन भले ही आज हमने बीच नहीं हैं लेकिन उनकी जीवंत आवाज में ‘रामायण’ की चौपाइयां आज भी कई तस्वीरों को नजरों के सामने उतार देती हैं। 80 के दशक का सबसे दमदार टीवी धारावाहिक ‘रामायण’ ने एक बार फिर से छोटे पर्दे पर वापसी की है।
दरअसल, दुनिया इन दिनों कोरोना की वजह से विपरीत परिस्थितियों में है। लगातार कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही है। भारत में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन किया गया है। लोगों से घरों में रहने की अपील की गई है। अब ऐसे में सरकार ने एक बार फिर दूरदर्शन पर 33 साल बाद धारावाहिक रामायण का प्रसारण शनिवार से शुरू कर दिया। इसके साथ ही टेलीविजन में फिर से रविंद्र जैन की खनकती आवाज में गूंजा-‘मंगल भवन अमंगल हारी द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी।’ (अर्थ : जो मंगल करने वालेऔर अमंगल हो दूर करने वाले है , वो दशरथ नंदन श्री राम है वो मुझपर अपनी कृपा करें।) यह वह सिग्नेचर आवाज थी जो पूरे देश को बांध देती थी, क्योंकि उसके बाद अगले एक घंटे तक हर जगह सब कुछ थम सा जाता था। देश भर में सुबह जैसे ही टीवी पर रामायण शुरू हुई, कई घरों में लोगों ने आरती उतारकर रामायण देखी। पहला एपिसोड शनिवार सुबह 9 बजे प्रसारित किया गया, दूसरा रात 9 बजे दिखाया जाएगा।
लॉकडाउन में टीवी सीरियल के नए एपिसोड नहीं हो रहे शूट
कोरोना वायरस से जंग में पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया गया है और ऐसे में टीवी शोज के नए एपिसोड शूट नहीं हो पा रहे हैं। लोग अपने ही घरों में रहने को मजबूर हैं। इस दौरान सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए रामायण का रिपीट टेलीकास्ट करने का फैसला किया।
सड़कें और गलियां सुनसान हो जाती थीं
भारतीय टेलीविजन के इतिहास में ऐसे कम ही धारावाहिक हुए हैं, जिन्हें दर्शकों का इतना प्यार मिला है, जितना रामायण को मिला था। रामायण को देखने के लिए दर्शक टीवी के सामने चप्पल उतारकर बैठा करते थे। रामायण का जब टीवी पर प्रसारण होता था तो लाइट जाने पर लोग ट्रैक्टर या बाकी चीजों की स्पेयर बैट्री से टीवी को जोड़ कर देखा करते थे। इस शो का क्रेज ऐसा था कि रविवार को सड़कें और गलियां सुनसान हो जाती थीं और लोग रामायण देखने अपने या पड़ोसी के घरों में बैठे होते थे। आज जब पूरे देश में लॉकडाउन है, ऐसे में एक बार फिर रामायण के लिए लोगों में उसी तरह का क्रेज दिखाई दिया।
बरेली में तीन पीढ़ियों ने एक साथ बैठकर देखी रामायण
तीन दशक के बाद टीवी पर एक बार फिर रामायण का प्रसारण शुरू हुआ तो लोगों का क्रेज देखते ही बना। अधिकांश घरों में तीन पीढ़ियों ने एक साथ बैठकर रामायण देखी। बहुत से लोग तो भावुक हो उठे। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी ने भी अपने पूरे परिवार के साथ में रामायण का पहला एपिसोड देखा। उनके यहां भी तीन पीढ़ियां रामायण देखते हुए भावुक हो गई।
सनराइज एनक्लेव के देवनारायण त्रिवेदी ने अपने पौत्र को बताया कि उस समय टीवी सबके घरों में नही होता था। मोहल्ले में एक-दो घरों में टीवी हुआ करते थे। एक ही टीवी के सामने सैकड़ों लोग बैठकर भक्ति भाव से रामायण देखते थे। तब लगभग सभी घरों में ब्लैक एंड व्हाइट टीवी ही थे। आज तो कलर टीवी पर देखने को मिला।
सुरेश शर्मा नगर के सुदेश दीक्षित ने बताया कि आज लॉकडाउन के बाद भी सड़कों पर उतना सन्नाटा नजर नहीं आ रहा है, जितना रामायण और महाभारत के प्रसारण के दौरान हुआ करता था। रामायण को लोगों ने कभी भी मनोरंजन के दृष्टि से नहीं देखा। यह हमेशा भक्ति भाव के साथ में देखी गई। रामानंद सागर द्वारा निर्मित रामायण में पात्रों की भूमिका निभाने वाले कलाकार आज भी लोगों के मन में भगवान के स्वरूप में ही बसे हुए हैं।
शाहजहांपुर में हाथ जोड़कर पूरे परिवार ने टीवी पर देखी रामायण
रामायण देखने का क्रेज लोगों में खूब रहा। शाहजहांपुर के कुछ परिवारों ने तो हाथ जोड़कर रामायण टीवी पर देखी। रामायण शुरू करने के सरकार के फैसले का आमजनने बहुत स्वागत किया है और कहा है कि लॉक डाउन के दौरान रामायण से घर में रहकर लोगों को बड़ी शिक्षा मिलेगी, निश्चित तौर पर लोग रामायण से सीखेंगे।
देश में रहती थी लॉकडाउन जैसी स्थिति
बता दें कि 25 जनवरी, 1987 से 31 जुलाई, 1988 तक यानी कि लगातार 75 रविवारों तक रामायण का प्रसारण हुआ था। उस दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में लॉकडाउन जैसी ही स्थिति रहती थी। न कोई दुकान खुलती थी औऱ न ही लोग सड़कों पर निकलते थे।
राम का किरदार निभा चुके अरुण गोविल खासे उत्साहित
रामायण के रिपीट टेलीकास्ट को लेकर राम का किरदार निभा चुके अरुण गोविल खासे उत्साहित हैं और उन्होंने कहा है कि अब वह अपने पोते के साथ इस शो को देखेंगे।
अरुण गोविल ने बताया कि वह पहले कुछ शोज और फिल्मों में रामानंद सागर के कैंप में काम कर चुके थे जब उन्हें खबर मिली कि सागर साहब रामायण बनाने जा रहे हैं तो उन्हें लगा कि उन्हें राम बनना चाहिए। अरुण गोविल ने बताया, “मैं उनके पास चला गया। मैंने कहा मैं राम का किरदार करना चाहता हूं। उन्होंने चश्मा ठीक करते हुए मुझे देखा और कहा कि ठीक है जब टाइम आएगा तब देखेंगे। टाइम आया और उन्होंने मेरा ऑडीशन लिया और आउटराइट रिजेक्ट कर दिया।”
तेरे जैसा राम नहीं मिल रहा
“एक रोज मुझे सागर साहब का फोन आया। उन्होंने कहा क्या कर रहे हो? मैंने कहा कुछ नहीं तो उन्होंने मुझे कहा कि जरा मिलने आ जाओ। मैं उनसे मिलने उनके घर गया तो उन्होंने कहा कि हमारी सिलेक्शन कमेटी ने ये तय किया है कि तेरे जैसा राम नहीं मिल रहा है। अरुण गोविल ने बताया कि शायद हर मोड़ पर इंसान की मर्जी तो नहीं चलती, उसकी जब चलती है ना तो किसी की नहीं चलती।”
लोग भगवान राम मानने लगे थे
एक साक्षात्कार के दौरान अरुण गोविल ने इस बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि सीरियल में भगवान राम का किरदार निभाने के बाद लोग उन्हें वास्तव में भगवान राम मानने लगे थे। वो जहां भी जाते थे, या तो लोग उनके पैर छूने लग जाते थे या फिर उनके आगे हाथ जोड़कर खड़े हो जाते थे। हैरानी की बात तो ये है कि कुछ लोग रामायण सीरियल देखते वक्त टीवी के सामने अगरबत्ती तक जलाने लगे थे।
यूपी के रहने वाले हैं अरुण गोविल
अरुण गोविल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ के रहने वाले हैं। उनका जन्म 12 जनवरी, साल 1958 को राम नगर में हुआ था। मेरठ यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के दौरान उन्होंने कुछ नाटकों में भी काम किया था। युवावस्था में वह सहारनपुर में रहे। अरुण के पिता तो चाहते थे कि उनका बेटा सरकारी नौकरी करे लेकिन खुद अरुण गोविल कुछ ऐसा करना चाहते थे, जो यादगार बन जाए। इसी बात को ध्यान में रखते हुए वह मुंबई तक आ पहुंचे। वैसे तो वह यहां बिजनेस करने आए थे, लेकिन बाद में अभिनय का रास्ता चुन लिया।

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