लॉकडाउन : छह दिन में हुई 20 मौते, जिम्मेदार कौन?

न्यूज डेस्क
पिछले छह दिनों में देश में जितनी मौते कोरोना वायरस के संक्रमण से नहीं हुई उतनी प्रवासी मजदूरों की सड़क हादसों में हो गई। पूरे देश में लॉकडाउन लागू होने के बाद दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया तो वह अपने गांव लौटने की मजबूर हो गए। सरकारी बस, ट्रेन के साथ-साथ निजी गाडिय़ों पर रोक के चलते सैकड़ों मजदूर अपनी पत्नी, छोटे-छोटे बच्चों के साथ गांव के लिए पैदल ही चल पड़े। इनमें से किसी ने कई किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद दम तोड़ दिया तो कई ट्रक की तेज रफ्तार की चपेट में आ गए।
 

पिछले छह दिनों में सड़क हादसों में 20 प्रवासी मजूदरों की मौत हो गई। ये मरने वाले लोग उत्तर प्रदेश, बिहार और दूसरे कई राज्यों के गांवों के हैं जो रोटी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में गए थे।
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 24 मार्च की रात से पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की है। इन दौरान सारी गतिविधियों पर रोक लगने के कारण प्रवासी मजदूरों के लिए अपने रोजाना के खर्चों को निकालना बेहद मुश्किल हो गया है।
उत्तर प्रदेश, बिहार और दूसरे कई राज्यों के मजदूर देश के अलग-अलग हिस्सों में कमाने-खाने के मकसद से जाते हैं, लेकिन सबकुछ बंद हो जाने से तकलीफदेह हालात में प्रवासी मजदूर अपने घरों को पैदल वापस लौट रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से देशभर से परेशान करने वाली ऐसी तस्वीरें आ रही हैं जिनमें प्रवासी मजदूर सैंकड़ों किमी पैदल चलकर अपने घरों को जा रहे हैं। केवल पुरुष ही नहीं महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी इस तकलीफदेह सफर को करते दिखाई दे रहे हैं।
गौरतलब है कि देश में सड़क हादसों में वैसे तो औसतन रोजाना 17 लोग मारे जाते हैं लेकिन जब से लॉकडाउन का ऐलान हुआ है, तब से इन दुर्घटनाओं में बड़े तौर पर प्रवासी मजदूर ही मर रहे हैं क्योंकि देश के हाइवे और सड़कों पर आम नागरिकों की कोई आवाजाही नहीं हो रही है।
सड़कों पर चल रहे मजदूरों के हुजूम को देखकर कहा जा सकता है कि पीएम मोदी की अपील कि लोग अपने घरों में रहे और सामाजिक दूरी बनाकर रखे, पालन नहीं हो रहा है।

प्रवासी मजदूरों में भगदड़ मची हुई है। वे बस अड्डों पर बड़ी भीड़ के रूप में दिखाई दे रहे हैं। ये मजदूर किसी भी हालत में बड़े शहरों से निकलकर गांवों और कस्बों में अपने घरों पर वापस जाना चाहते हैं।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार , 29 मार्च 2020 तक कोरोना वायरस के चलते देश में कुल 25 लोगों की मौत हो चुकी थी। दूसरी ओर, लॉकडाउन के चलते रोड एक्सीडेंट्स और मेडिकल इमर्जेंसी से अब तक 20 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लॉकडाउन के ऐलान के बाद से सड़क हादसों के 4 मामले सामने आए हैं। बहुत ज्यादा पैदल चलने की वजह से मेडिकल इमर्जेंसी के 2 मामले देखे गए हैं और अन्य प्रकार की घटनाओं का एक मामला सामने आया है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 27 मार्च को हैदराबाद के पेड्डा गोलकोंडा के पास हुए सड़क हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में तेलंगाना के प्रवासी मजदूर थे और इनमें दो बच्चे भी शामिल थे। ये लोग कर्नाटक में अपने घरों को वापस जा रहे थे। ये एक खुले ट्रक में यात्रा कर रहे थे। इस ट्रक को पीछे से आ रही एक लॉरी ने टक्कर मार दी। तेलंगाना की सरकार के लॉकडाउन के ऐलान के बाद से ही तमाम प्रवासी मजदूर अपनी-अपनी जगहों पर फंस गए हैं।

दो अन्य मामलों में, गुजरात के 6 प्रवासी मजदूरों के मारे जाने की ख़बर आई है। 28 मार्च को महाराष्ट्र से गुजरात में अपने घरों की ओर वापस लौट रहे चार प्रवासी मजदूरों को तेज रफ्तार से आ रहे एक टेंपो ने कुचल दिया। इन चारों लोगों की मौत हो गई। यह सड़क हादसा मुंबई-अहमदाबाद हाइवे पर पारोल गांव के पास हुआ।
उसी दिन, गुजरात के वलसाड जिलेे में दो महिला मजदूरों की भी मौत हो गई। ये महिलाएं एक रेलवे पुल को पार कर रही थीं, तभी एक मालगाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी।
पुलिस के अनुसार, ‘महिलाएं श्रमिक थीं और लॉकडाउन के चलते उन्हें अपने गांव वापस लौटना पड़ रहा था।’ वहीं एक न्यूज एजेंसी के हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 29 मार्च की सुबह कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे पर 4 लोगों को एक गाड़ी ने कुचल दिया। बताया जा रहा है कि मरने वाले सभी लोग इस हाइवे पर पैदल जा रहे थे।

26 मार्च को 39 साल के एक शख्स की मौत मध्य प्रदेश के मुरैना में अपने घर जाते वक्त रास्ते में हो गई। रणवीर सिंह दिल्ली में बतौर फूड डिलीवरी बॉय का काम करते थ। वह दिल्ली से मुरैना में अपने घर के लिए पैदल ही चल पड़े थे। दिल्ली से मुरैना की दूरी करीब 300 किमी है। बीच रास्ते में आगरा में वह गिर पड़े और उनकी मौत हो गई।
27मार्च को गुजरात के सूरत में 62 साल के गंगाराम की मौत हो गई। गंगाराम एक हॉस्पिटल से अपने घर की ओर पैदल जा रहे थे जो कि करीब 8 किमी दूर था। उन्हें घर जाने के लिए कोई साधन नहीं मिला और उन्हें पैदल जाने का फैसला करना पड़ा.
पंडेसारा में अपने घर के पास सड़क पर वह बेहोश होकर गिर गए। उन्हें दोबारा अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
ये सभी मौते लॉकडाउन होने के बाद से उपजे हालात की वजह से हुईं। अब सवाल उठता है कि ये जो 20 मौते हुई हैं इनको कोरोना से मरने वाले आंकड़ों में जोड़ा जायेगा या सड़क हादसों में? इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा?

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