लॉकडाउन का इफेक्‍ट : एक्‍सपर्ट ने बताया, क्‍या खायें, जब नशे की तलब सताये

-पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, शराब का सेवन करने वालों के काम की खबर
डॉ सुनील पाण्‍डेय, राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍व़ास्‍थ्‍य कार्यक्रम के उत्‍तर प्रदेश के नोडल अधिकारी व वरिष्‍ठ मनोचिकित्‍सक 
धर्मेन्‍द्र सक्‍सेना
लखनऊ। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन जारी है, इसके साथ ही गुटखा, पान मसाला पर पूरी तरह रोक लगी हुई है, हालांकि अभी कुछ लोग चोरी-छिपे छोटी-मोटी दुकानों पर रखे पुराने स्‍टॉक को खरीद कर लोग काम चला रहे हैं। यही हाल शराब का सेवन करने वालों का है। इन चीजों पर पाबंदी भले ही अभी फौरी तौर पर लगी है, लेकिन आदर्श स्थिति यही है कि इसका सेवन सेहत को नुकसान ही पहुंचाता है। इन सभी नशे वाली चीजों के बंद होने से इसका सेवन करने वाले लोगों की इस समय की मन:स्थिति कैसी चल रही है, तथा इन नशों को अपनी आदत बना चुके लोगों को इस समय क्‍या करना चाहिये, इस मुद्दे को लेकर ‘सेहत टाइम्‍स’ ने  राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍व़ास्‍थ्‍य कार्यक्रम के उत्‍तर प्रदेश के नोडल अधिकारी व वरिष्‍ठ मनोचिकित्‍सक डॉ सुनील पाण्‍डेय से विशेष वार्ता की।
डॉ सुनील पाण्‍डेय ने बताया कि पान मसाला, गुटखा, खैनी, बीड़ी, सिगरेट, शराब, गांजा, भांग आदि का सेवन करने वालों के उनके पास फोन आ रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि इसकी तलब को खत्‍म करने के लिए छोटे-छोटे उपाय हैं, उन्‍हें करके ऐसे लोग स्‍वस्‍थ रह सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि अदरक को छीलकर उसे कद्दूकस कर लें, कद्दूकस की हुई अदरक को फ्रि‍ज में रख लें, जब तलब लगे तो थोड़ी अदरक निकालकर उसमें नीबू और काला नमक मिला लें, इसे सुरती की तरह गाल में दबा लें, इसके सेवन से जो आनंद मिलता है वह वैसा ही होता है जो गुटखा खैनी खाने से लगता है।
इसी प्रकार सौंफ, लौंग, इलायची, मिश्री का मिश्रण बना कर लें, इससे गले को भी आराम मिलेगा। इस मिश्रण में काली मिर्च, छोटी पीपरी 2 पीस भी डाली जा सकती है, इसकी तीन-चार खुराक दिन भर के लिए बनाकर रख लें तथा सुरती की तरह मुंह में दबाये।
सुबह फ्रेश होने से पहले नशा करने वाले लोगों को सलाह
डॉ पाण्‍डेय ने बताया कि बहुत से लोग यह कहते हैं कि बिना सिगरेट पीये या तम्‍बाकू खाये फ्रेश होने के लिए प्रेशर नहीं बनता है, इसके लिए ऐसे लोगों को चाहिये कि पपीता खायें, ईसबगोल की भूसी, हरी सब्जियां, आटे का चोकर खायें, मैदा ज्‍यादा न खायें। अगर उन्‍हें कब्जियत की दवा ही लेनी पड़े तो अपने फैमिली डॉक्‍टर से कन्‍सल्‍ट करके दवा ले सकते हैं।
डॉ सुनील ने बताया कि डायबिटीज वाले मरीज जो इन नशों का सेवन करते हैं, उन्‍हें खासतौर से कब्जियत की शिकायत होती है, ऐसे लोग  साबुत अनाज, फल खायें, फल न मिले तो गोभी, शिमला मिर्च आदि सब्जियों को उबाल कर रोज एक कटोरी खायें।
तनाव दूर करने के लिए करें व्‍यायाम
डॉ पाण्‍डेय ने बताया कि तनाव, उलझन होने की शिकायत में व्‍यायाम बहुत फायदा करता है, क्‍योंकि व्‍यायाम करने में जो हार्मोन पैदा होता है वह खुशी देने वाला होता है, यानी व्‍यक्ति को खुशी महसूस होती है, व्‍यायाम करने से घबराहट भी कम हो जाती है क्‍योंकि ब्‍लड सरकुलेशन बढ़ता है, ब्रेन में भी खून का सरकुलेशन बढ़ता है जो हार्मोन रिलीज होता है उससे घबराहट, उलझन और हताशा जैसी चीजें दूर होती हैं।
तलब पूरी न होने का प्रभाव मनोवैज्ञानिक है शारीरिक नहीं
उन्‍होंने बताया कि इस समय उनके पास ऐसे बहुत से फोन आ रहे हैं, जो शराब पीते थे, भांग, गांजा या दूसरा नशा करते थे, उनका कहना होता है कि लॉकडाउन के समय हमें कुछ मिल नहीं पा रहा है, मेरा सारा स्‍टॉक खत्‍म हो गया है, अब क्‍या दवा खायें। डॉ सुनील पाण्‍डेय ने बताया कि चूंकि दवाइयां स्‍थायी समाधान तो हैं नहीं, खासतौर से तम्‍बाकू कंट्रोल करने में तो मनोवैज्ञानिक दिक्‍कत होती है, जैसे  घबराहट, उलझन, एकाग्रता में कमी होती है, लेकिन शारीरिक दिक्‍कत नहीं होती है।

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