लेह के सिंगे नामग्याल चौक पर मनाया गया 26वां कारगिल विजय दिवस

लेह के सिंगे नामग्याल चौक पर 26वां कारगिल विजय दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया, जिसमें वीर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में प्रमुख अधिकारियों और नागरिकों ने भाग लेकर कारगिल युद्ध के नायकों के अदम्य साहस और बलिदान को याद किया।

26वां कारगिल विजय दिवस शुक्रवार को लेह के सिंगे नामग्याल चौक पर श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर सैनिकों को याद करते हुए पूरे क्षेत्र में देशभक्ति की भावना छाई रही। कार्यक्रम का आयोजन लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (एलएएचडीसी), लेह द्वारा किया गया।

इस अवसर पर एलएएचडीसी के अध्यक्ष ताशी ग्यालसन ने स्मारक स्थल पर पुष्प अर्पित किए और वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के मुख्य सचिव डॉ. पवन कोटवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा, सेना के अधिकारी, युद्ध के दिग्गज, स्थानीय नागरिक और कई गणमान्य व्यक्ति भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

मुख्य भाषण में डॉ. पवन कोटवाल ने कारगिल युद्ध के नायकों को नमन करते हुए परमवीर चक्र विजेताओं और लद्दाख के गौरव कर्नल सोनम वांगचुक, महावीर चक्र सम्मानित अधिकारी की वीरता को याद किया। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों का समर्पण अतुलनीय है, खासकर लद्दाख जैसे दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में। उन्होंने यह भी दोहराया कि लद्दाख प्रशासन, सशस्त्र और अर्धसैनिक बलों के साथ खड़ा है और उनका हरसंभव सहयोग करेगा।

अध्यक्ष ताशी ग्यालसन ने भी अपने संबोधन में कारगिल युद्ध के कठिन हालातों की चर्चा की और कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय साहस और बलिदान की गाथा है। उन्होंने हाल ही में हुए ऑपरेशन “सिंदूर” का उल्लेख करते हुए सशस्त्र बलों की निरंतर सेवा और बलिदान की सराहना की। साथ ही उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे राष्ट्र की प्रगति में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं और अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन करें।

अध्यक्ष ताशी ग्यालसन ने भी अपने संबोधन में कारगिल युद्ध के कठिन हालातों की चर्चा की और कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय साहस और बलिदान की गाथा है। उन्होंने हाल ही में हुए ऑपरेशन “सिंदूर” का उल्लेख करते हुए सशस्त्र बलों की निरंतर सेवा और बलिदान की सराहना की। साथ ही उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे राष्ट्र की प्रगति में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं और अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन करें।

समारोह में कारगिल युद्ध के वीर जवानों और उनके परिवारों को पारंपरिक फेयपोर और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। कारगिल विजय दिवस न केवल एक सैन्य विजय का प्रतीक है, बल्कि यह हर भारतीय के लिए प्रेरणा और आत्मगौरव का दिन है।

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