लुभावने अंतरिम बजट से फिसल सकता है राजकोषीय लक्ष्य, मोदी सरकार को दी चेतावनी

वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने शुक्रवार को मोदी सरकार की ओर से पेश होने वाले अंतरिम बजट से ठीक पहले राजकोषीय लक्ष्य को लेकर चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने कहा कि अगर सरकार मतदाताओं को रिझाने के लिए ज्यादा लोक-लुभावन घोषणाएं करती है तो राजकोषीय घाटे पर दबाव बढ़ेगा और वह लगातार दूसरे साल अपने लक्ष्य से चूक सकती है। फिच ने बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा पेश किया जाने वाला बजट आम चुनाव को देखते हुए काफी लोकप्रिय हो सकता है, लेकिन इसका असर राजकोषीय समेकन पर पड़ेगा जो रेटिंग के लिए संवेदनशील विषय होता है।लुभावने अंतरिम बजट से फिसल सकता है राजकोषीय लक्ष्य, मोदी सरकार को दी चेतावनी

रिपोर्ट के अनुसार, आगामी चुनावों को देखते हुए मौजूदा सरकार के ऊपर मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए ग्रामीण और छोटे कारोबारियों के लिए खर्च बढ़ाने का दबाव रहेगा। सत्ताधारी दल को हाल में हुए कुछ चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है, जिसका सबसे बड़ा कारण ग्रामीण क्षेत्रों की नाराजगी और बेरोजगारी रही थी।

पहले से ही राजस्व घटने का दबाव

फिच ने कहा कि गिरते राजस्व के कारण पहले से ही राजकोषीय दबाव है और किसानों का कर्ज माफ करने व ब्याज में छूट देने की घोषणाओं से यह दबाव और बढ़ने की आशंका है। लिहाजा चुनाव से पहले खर्च में ज्यादा बढ़ोतरी आने से लगातार दूसरे साल बजटीय लक्ष्य चूकने के साथ ही कर्ज का बोझ भी बढ़ सकता है।

अभी लक्ष्य पाने की स्थिति में सरकार

रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च में पूंजी खर्च और बिल भुगतान के बावजूद फिलहाल इस बात की पूरी उम्मीद है कि सरकार चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे के बजटीय लक्ष्य 3.3 फीसदी (जीडीपी के मुकाबले) को पूरा कर लेगी, जो उसके राजकोषीय विश्वसनीयता को बढ़ाने में भी मददगार रहेगी। हालांकि 31, मार्च 2019 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष में जीएसटी राजस्व के लक्ष्य से कम रहने आशंका है।
कर्ज का लक्ष्य पाना भी मुश्किल

आधिकारिक रूप से सरकार मार्च, 2025 तक कुल कर्ज के लक्ष्य को जीडीपी के मुकाबले 60 फीसदी पर रखने पर जोर दे रही है लेकिन रेटिंग एजेंसी का कहना है कि अगले कुछ वर्षों तक कर्ज का लक्ष्य जीडीपी के लगभग 70 फीसदी के बराबर रहेगा। ऐसे में भारत की रेटिंग बीबीबी(-) पर स्थिर रह सकती है।

अंतरिम बजट को चुनावी दांव ही मानती हैं सरकारें

-यूपीए के दोनों अंतरिम बजट में भी मतदाताओं को लुभाने की हुई थी कोशिश, एनडीए के भी पीछे रहने की उम्मीद नहीं

वैसे तो चुनावी साल में नई सरकार के गठन तक अपना खर्च चलाने के लिए सरकार अंतरिम बजट पेश करती है, लेकिन यह मतदाताओं को लुभाने और अपने पाले में खींचने का अंतिम मौका भी होता है। इसी वजह से सरकार किसी भी दल की हो वह अंतरिम बजट में भी बड़ा दांव खेलने से नहीं चूकती।

वर्ष 2019 का अंतरिम बजट पेश करने जा रही मोदी सरकार के पास भी चुनावी दांव खेलने का यह आखिरी मौका है। आयकर स्लैब में राहत के लिए चार साल से सरकार की ओर टकटकी बांधे देख रहे लोगों की उम्मीदें अंतरिम बजट में पूरी हो सकती हैं। साथ ही सरकार किसानों को एक निश्चित लेकिन नकद आमदनी देने के लिए भी अपना पिटारा खोल सकती है।

चिदंबरम ने खेला था बड़ा दांव

यूपीए-2 की ओर से वर्ष 2014 के अंतरिम बजट में तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने भी बड़ा चुनावी दांव खेला था। उन्होंने महिलाओं से लेकर मध्य वर्ग और सैनिकों तक के लिए कई लुभावनी घोषणाएं की थीं। हालांकि उनका दांव नहीं चला और यूपीए की करारी हार हुई।
बड़ी घोषणाएं

पूर्व सैनिकों की बहुप्रतीक्षित मांग वन रैंक-वन पेंशन के तहत सरकार ने वर्ष 2006 से पहले रिटायर करीब 30 लाख पूर्व सैन्यकर्मियों के लिए इसका एलान किया था।

छोटी-बड़ी कारों पर उत्पाद शुल्क घटाया जिससे इनकी कीमतों में 1500 से 80 हजार रुपये तक की कमी आई।
किसानों की कर्ज सीमा बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दी।

सरकार ने वर्ष 2009 से पहले के शिक्षा ऋण लेने वाले छात्रों का ब्याज खुद चुकाने की बात कही।
महिलाओं को लुभाने के लिए निर्भया फंड में 1000 करोड़ रुपये बढ़ा दिए।

प्रणब ने बढ़ाया था मनरेगा का बजट

यूपीए-1 सरकार के तत्कालीन वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने वर्ष 2009 के अंतरिम बजट में फ्लैगशिप योजनाओं के लिए खजाने का मुंह खोल दिया था। इसके तहत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का बजट 88 फीसदी बढ़ाकर 16 हजार करोड़ से 30,100 करोड़ कर दिया था।

अन्य बड़ी घोषणाएं

फ्लैगशिप योजनाओं के लिए कुल 1.31 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए, जिसके लिए लेखानुदान तक पारित नहीं कराया।
ग्रामीण विकास के लिए बजट 38,500 करोड़ से बढ़ाकर 55,170 करोड़ कर दिया।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में 12,070 करोड़ का विशेष प्रावधान किया।

जसवंत सिंह ने बढ़ाया अंत्योदय योजना का दायरा

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वर्ष 2004-05 का अंतरिम बजट भी लुभावनी घोषणाओं वाला था। तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने अंत्योदय योजना में लाभार्थियों की संख्या 4 गुना बढ़ाते हुए 50 लाख परिवारों से दो करोड़ परिवार कर दिया था। इसके अलावा चाय और शुगर इंडस्ट्री को राहत पैकेज देने की घोषणा कर कारोबारी समुदाय को भी साधने का प्रयास किया। साथ ही महंगाई भत्ते को बेसिक पेमेंट के साथ जोड़कर नौकरीपेशा वर्ग को भी आकर्षित करने की कोशिश की गई थी।

सरकार ने संशोधन में 0.5 फीसदी बढ़ाई विकास दर
विश्व बैंक व संयुक्त राष्ट्र संघ सहित तमाम वैश्विक संस्थाओं और रेटिंग एजेंसियों की ओर से तेज विकास का अनुमान जताए जाने के बाद बृहस्पतिवार को सरकार ने भी 2017-18 के लिए आर्थिक विकास दर संशोधित करते हुए 0.5 फीसदी बढ़ा दिया है। सरकार ने इस दर को पूर्व में लगाए 6.7 फीसदी के अनुमान से बढ़ाकर 7.2 फीसदी कर दिया है।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने बताया कि यह बढ़ोतरी कृषि क्षेत्र में आई तेजी की वजह से दिखी है। वित्त वर्ष 2017-18 और 2016-17 के लिए वास्तविक जीडीपी या स्थिर (2011-12) मूल्यों पर आधारित जीडीपी क्रमश: 131.80 लाख करोड़ और 122.98 लाख करोड़ रुपये रही। इस आधार पर 2017-18 में आर्थिक वृद्धि 7.2 फीसदी और 2016-17 के लिए 8.2 फीसदी प्रदर्शित करती है।

सीएसओ ने कहा कि 2017-18 के लिए संशोधित दर अनुमानों को उद्योगवार/संस्थावार विस्तृत जानकारी का उपयोग करते हुए तैयार किया गया है, जबकि 31 मई, 2018 को जारी अनंतिम अनुमान बेंचमार्क-सांकेतिक विधि से तैयार किया गया था।

इन क्षेत्रों में भी किया संशोधन

सीएसओ ने 2016-17 के लिए राष्ट्रीय आय, उपभोग व्यय, बचत और पूंजी संचय का भी दूसरा संशोधित अनुमान जारी किया है। उसने 2017-18 के लिए प्राथमिक क्षेत्र (कृषि, वन उद्योग, मछली पालन, खनन एवं उत्खनन) में 5 फीसदी वृद्धि का अनुमान लगाया है। पिछले साल यह अनुमान 6.8 फीसदी था। वहीं, द्वितीयक क्षेत्रों (निर्माण, बिजली, गैस, जल आपूर्ति एवं अन्य उपयोगी सेवाएं) में 6 फीसदी (पूर्व में 7.5 फीसदी) और तृतीयक क्षेत्र (सेवाओं) में 8.1 फीसदी (पूर्व में 8.4 फीसदी) का अनुमान लगाया है।

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